कौशांबी: उत्तर प्रदेश के कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के मामले में फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी शकील अहमद को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में शकील के बाएं पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी हाथ जोड़कर भावुक नजर आया और हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों से माफी मांगता दिखा।

देवर कोतारी के पास हुई मुठभेड़
पुलिस के मुताबिक शुक्रवार रात मंझनपुर पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि शकील क्षेत्र से भागने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी शुरू की। करीब रात नौ बजे देवर कोतारी के पास बाइक से जा रहे शकील को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस का दावा है कि खुद को घिरता देखकर शकील ने टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके बाएं पैर में गोली लगी और वह घायल होकर गिर गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
तमंचा और कारतूस बरामद
पुलिस ने शकील के कब्जे से एक तमंचा, तीन जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस और एक बाइक बरामद करने का दावा किया है। घायल आरोपी को पुलिस सुरक्षा में अस्पताल पहुंचाया गया। शकील इस मामले में फरार चल रहा आखिरी नामजद आरोपी था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पहले 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे शुक्रवार को प्रयागराज रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय मिश्रा ने बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया था। उसी रात पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद हाथ जोड़कर मांगी माफी
गिरफ्तारी के बाद अस्पताल ले जाए जाते समय शकील ने हाथ जोड़कर हादसे पर अफसोस जताया। उसने कहा कि उसका अपना घर भी गिर गया और बच्चे इधर-उधर हो गए हैं। उसने विस्फोट में बच्चों और परिवार के सदस्यों को खोने वाले लोगों से माफी मांगी। हालांकि आरोपी की ओर से कही गई बातें कानूनी रूप से दोष स्वीकार करने के बराबर नहीं मानी जा सकतीं। मामले में उसकी आपराधिक जिम्मेदारी जांच और अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
31 अगस्त को हुआ था भीषण धमाका
यह मामला 31 अगस्त 2026 को मनौरी क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट से जुड़ा है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। हादसे में मृतकों की संख्या बाद में बढ़कर 14 हो गई। इनमें बच्चे भी शामिल थे। तीन गंभीर घायलों का प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में इलाज जारी होने की जानकारी पुलिस ने दी थी। घटना के बाद फैक्ट्री के संचालन और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए। रिपोर्ट के मुताबिक फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही निलंबित या रद्द हो चुका था, इसके बावजूद वहां पटाखा निर्माण का काम कथित तौर पर जारी था।
नौशाद समेत छह लोगों पर दर्ज हुई FIR
पुलिस ने पटाखा फैक्ट्री के मालिक एवं संचालक नौशाद समेत छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। मुख्य आरोपी नौशाद को भी इससे पहले पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने दूसरे आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू किया। फैक्ट्री मालिक के बेटे आदिल को भी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक इस मामले के अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पहले हो चुकी थी और शकील आखिरी फरार आरोपी था।
अवैध पटाखा कारोबार की जांच जारी
पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि लाइसेंस संबंधी कार्रवाई के बावजूद पटाखा निर्माण कैसे जारी रहा और इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री वहां कैसे पहुंची। मामले में स्थानीय स्तर पर हुई संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। हादसे के बाद प्रशासन ने अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। विस्फोट में 14 लोगों की जान जाने के बाद यह मामला कानून-व्यवस्था के साथ प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शकील की गिरफ्तारी के साथ विस्फोट मामले में फरार आखिरी नामजद आरोपी भी पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। अब पुलिस की जांच का फोकस विस्फोट के पीछे की परिस्थितियों, अवैध फैक्ट्री के संचालन और इसमें शामिल पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट करने पर रहेगा।
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