महाराष्ट्र में विधायकों के पर्सनल असिस्टेंट और ड्राइवरों के मानदेय में बढ़ोतरी
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य विधानसभा के मौजूदा सदस्यों के साथ काम करने वाले पर्सनल असिस्टेंट और ड्राइवरों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। सरकार के इस निर्णय के बाद अब विधायकों के निजी सहायकों और वाहन चालकों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान किया जाएगा।
संशोधित व्यवस्था के तहत पर्सनल असिस्टेंट का मासिक मानदेय 30,000 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, ड्राइवरों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है। ड्राइवरों को अब 20,000 रुपये की जगह 30,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अगस्त 2026 से प्रभावी माना जाएगा। यानी नई दरों का लाभ पिछली तारीख से लागू किया जाएगा।
मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सदस्यों को उनके विधायी और प्रशासनिक कार्यों में सहायता के लिए पर्सनल असिस्टेंट उपलब्ध कराए जाते हैं। यह व्यवस्था ‘महाराष्ट्र विधानसभा सदस्य वेतन और भत्ता अधिनियम, 1956’ के प्रावधानों के तहत की गई है।
उन्होंने बताया कि विधायकों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। विधानसभा क्षेत्र से जुड़े काम, सरकारी विभागों के साथ समन्वय, नागरिकों की समस्याओं का समाधान और विधायी कार्यों को प्रभावी तरीके से पूरा करने में पर्सनल असिस्टेंट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई और काम के बढ़ते दबाव को देखते हुए मानदेय में संशोधन जरूरी था। लंबे समय से पर्सनल असिस्टेंट और ड्राइवरों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी।
विधायकों के पर्सनल असिस्टेंट आमतौर पर कार्यालय संबंधी कार्यों, दस्तावेजों की तैयारी, बैठकों की व्यवस्था, पत्राचार और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों में सहायता करते हैं। वहीं, ड्राइवर विधायकों के आवागमन और क्षेत्रीय दौरों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार के इस फैसले से विधानसभा सदस्यों के साथ काम करने वाले कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। मानदेय बढ़ने से उनकी आय में सुधार होगा और वे अपने कार्यों को अधिक प्रभावी तरीके से कर सकेंगे।
महाराष्ट्र विधानसभा में बड़ी संख्या में विधायक राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनके कार्यालयों और दैनिक कामकाज को सुचारू रखने में सहायक कर्मचारियों की भूमिका अहम होती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के काम का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं और उचित भुगतान मिलना जरूरी है।
महाराष्ट्र सरकार समय-समय पर विधायकों और विधानसभा से जुड़े कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों में संशोधन करती रही है। यह फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि, सरकारी खर्च में बढ़ोतरी को लेकर भी ऐसे फैसलों पर चर्चा होती रहती है। सरकार का तर्क है कि विधानसभा सदस्यों को बेहतर प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित और जिम्मेदार कर्मचारियों का होना जरूरी है।
चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि विधायकों के पर्सनल असिस्टेंट और ड्राइवर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए उनके मानदेय में उचित संशोधन किया गया है।
इस फैसले के बाद अब पर्सनल असिस्टेंट को हर महीने 40 हजार रुपये और ड्राइवरों को 30 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। नई व्यवस्था से विधानसभा सदस्यों के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
सरकार के इस कदम को विधानसभा से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत भरा निर्णय माना जा रहा है। आने वाले समय में अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के मानदेय और सुविधाओं को लेकर भी सरकार की ओर से समीक्षा की जा सकती है।