पुलिसवाला बनकर 40 हजार की लूट सीसीटीवी से कुछ घंटों में पकड़ा गया आरोपी
नवी मुंबई। तुर्भे में पुलिसकर्मी बनकर एक व्यक्ति से 40 हजार रुपये लूटने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो युवकों ने 30 वर्षीय शिकायतकर्ता को रोककर खुद को पुलिसवाला बताया और ‘रेड ज़ोन’ में प्रवेश करने के नाम पर भारी जुर्माने का डर दिखाया। इसके बाद वे उसे एटीएम ले गए, जहां उससे जबरन नकदी निकलवाई गई। गूगल पे के जरिए भी पैसे ट्रांसफर करवाए गए। घटना के कुछ ही घंटों के भीतर एपीएमसी पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसका कथित साथी फरार है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 20 वर्षीय यश मोतीराम पाटिल के रूप में हुई है। वह वाशी के कोपरी गांव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, उसका पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामले में शामिल बताया जा रहा दूसरा आरोपी डोंबिवली का निवासी है। फिलहाल उसके पकड़े जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी विश्लेषण की मदद से यश की पहचान की और घटना के कुछ घंटों के भीतर उसे पकड़ लिया।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने शिकायतकर्ता को पुलिसकर्मी बनकर रोका था। उन्होंने दावा किया कि वह ‘रेड ज़ोन’ में घुस गया है और इसके लिए उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। आरोपियों ने इसी दावे के जरिए शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया। यहां ‘रेड ज़ोन’ में प्रवेश की बात आरोपियों की ओर से कही गई थी। उपलब्ध जानकारी में शिकायतकर्ता द्वारा किसी वास्तविक प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने या नियम तोड़ने की पुष्टि नहीं की गई है।
आरोप है कि जुर्माने का डर दिखाने के बाद दोनों शिकायतकर्ता को एटीएम तक ले गए। वहां उससे जबरन नकदी निकलवाई गई। इसके अलावा गूगल पे के माध्यम से रकम ट्रांसफर करवाई गई। इस तरह नकद और डिजिटल भुगतान के जरिए कुल 40 हजार रुपये लिए गए। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि एटीएम से कितनी नकदी निकलवाई गई और गूगल पे से कितनी राशि भेजी गई। दोनों माध्यमों से ली गई कुल रकम 40 हजार रुपये बताई गई है।
मामले में पुलिस की पहचान का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता को डराने का आरोप प्रमुख है। आरोपियों ने स्वयं को पुलिसवाला बताकर अपने दावे को अधिकारपूर्ण रूप देने की कोशिश की। भारी जुर्माने की बात कहने के बाद शिकायतकर्ता से पैसे निकलवाए गए। पुलिस अधिकारी के बयान के अनुसार, भुगतान स्वेच्छा से नहीं हुआ, बल्कि उससे जबरदस्ती रकम ली गई। यही घटनाक्रम शिकायतकर्ता को रोकने, डराने और उससे पैसे लेने की पूरी प्रक्रिया को सामने रखता है।
एपीएमसी पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में सीसीटीवी फुटेज से मदद मिली। फुटेज और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने कुछ ही घंटों में एक आरोपी की पहचान कर ली। इसके बाद यश मोतीराम पाटिल को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, फुटेज किस स्थान का था और तकनीकी विश्लेषण में किन सूचनाओं का उपयोग किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। उपलब्ध विवरण में इन दोनों माध्यमों को आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी में सहायक बताया गया है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद मिले सुरागों के आधार पर टीम एक आरोपी को जल्दी पकड़ने में सफल रही। कुछ घंटों के भीतर हुई गिरफ्तारी इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। इसके बावजूद दूसरे कथित आरोपी के फरार होने के कारण मामले में एक और व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है। उसके नाम और उम्र का विवरण उपलब्ध नहीं है। फिलहाल उसके डोंबिवली का निवासी होने की जानकारी ही सामने आई है।
यश का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने की बात पुलिस ने कही है। यह जानकारी उसके पूर्व रिकॉर्ड से संबंधित है और वर्तमान मामले में लगे आरोपों से अलग तथ्य है। अभी उस पर पुलिसकर्मी बनकर शिकायतकर्ता को रोकने और उससे रकम लेने का आरोप है। उपलब्ध विवरण में आरोपी की ओर से कोई बयान या आरोपों पर उसकी प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। मामले से जुड़े निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और आगे की प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।
इस घटनाक्रम में नकद निकासी और डिजिटल ट्रांसफर दोनों का इस्तेमाल हुआ। ऐसे में रकम से जुड़े लेनदेन का विवरण मामले को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, गूगल पे से पैसा किस खाते में भेजा गया और शिकायतकर्ता से ली गई राशि में से कितनी रकम बरामद हुई, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसी तरह आरोपियों ने पुलिस की वर्दी पहनी थी या कोई पहचान पत्र दिखाया था, इसका भी उल्लेख नहीं है। केवल पुलिसवाला बनकर रोकने की बात बताई गई है।
तुर्भे की इस घटना में पुलिस के नाम और जुर्माने के डर का इस्तेमाल कर 30 वर्षीय व्यक्ति से 40 हजार रुपये लेने का आरोप है। एपीएमसी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी विश्लेषण की मदद से 20 वर्षीय यश मोतीराम पाटिल को कुछ घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया। उसका कथित साथी अभी फरार है। दूसरे आरोपी की पहचान से जुड़े विस्तृत विवरण और रकम की बरामदगी की स्थिति सामने आने पर मामले की अन्य कड़ियां स्पष्ट हो सकेंगी।