मुंबई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले घाटकोपर निवासी 46 वर्षीय कारोबारी नीरज मेहता के परिवार को ₹5.01 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह हाल के कुछ हफ्तों में मुंबई MACT की ओर से ₹5 करोड़ से अधिक का दिया गया दूसरा बड़ा मुआवजा है। इससे पहले जुलाई में ट्रिब्यूनल ने 2022 के एक सड़क हादसे में 82 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग हुए मुलुंड निवासी 54 वर्षीय व्यक्ति को ₹19.97 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

4 अगस्त को सुनाए गए आदेश में ट्रिब्यूनल के सदस्य एए घनीवाले ने बीमा कंपनी की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि हादसे में शामिल बस के चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था तथा वाहन के पास वैध परमिट भी नहीं था।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि बीमा कंपनी अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश करने में विफल रही। इतना ही नहीं, कंपनी ने अपने पक्ष में किसी गवाह से पूछताछ नहीं की और न ही चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लाया। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर बीमा कंपनी को अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।

2024 में महाबलेश्वर जाते समय हुआ था हादसा

मामला वर्ष 2024 में हुए उस सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें घाटकोपर के रहने वाले कारोबारी नीरज मेहता की जान चली गई थी। मेहता अपने परिवार के साथ महाबलेश्वर की यात्रा पर जा रहे थे, तभी उनकी यात्रा एक गंभीर सड़क दुर्घटना में बदल गई।

हादसे के बाद परिवार ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के समक्ष मुआवजे के लिए याचिका दायर की। परिवार की ओर से हादसे के कारण हुई आर्थिक और पारिवारिक क्षति को सामने रखा गया। मामले की सुनवाई के दौरान दुर्घटना की परिस्थितियों और बीमा कंपनी की जिम्मेदारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

ट्रिब्यूनल ने उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद मेहता के परिवार को ₹5.01 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया।

बीमा कंपनी की दलील पर ट्रिब्यूनल की आपत्ति

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना में शामिल बस के चालक के पास वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसके साथ ही कंपनी ने यह दलील भी दी कि बस के पास आवश्यक वैध परमिट नहीं था। इन आधारों पर बीमा कंपनी ने अपने ऊपर मुआवजे की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि यदि बीमा कंपनी किसी कानूनी बचाव या आरोप के आधार पर मुआवजा देने की जिम्मेदारी से बचना चाहती है, तो उसे अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त सबूत भी पेश करने होंगे।

ट्रिब्यूनल के मुताबिक, बीमा कंपनी ऐसा करने में विफल रही। उसने अपने आरोपों को साबित करने के लिए न तो कोई गवाह पेश किया और न ही संबंधित चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लाया। इस कारण उसके दावे को पर्याप्त आधार नहीं मिला।

हाल के दिनों में दूसरा बड़ा मुआवजा

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मुंबई MACT ने हाल के हफ्तों में दूसरा बड़ा मुआवजा दिया है। जुलाई में ट्रिब्यूनल ने मुलुंड निवासी रासिक बिंदुमाधव जोशी को ₹19.97 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया था। जोशी वर्ष 2022 में एक ऑटो-रिक्शा दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे और उन्हें 82 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हुई थी। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को मुआवजे के साथ 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया था।

उस मामले में दुर्घटना 2 जनवरी 2022 को एलबीएस मार्ग पर हुई थी। दावा याचिका के अनुसार, ऑटो-रिक्शा तेज और लापरवाही से चलाया जा रहा था और मुलुंड में कमगार अस्पताल सिग्नल के पास वह BEST बस से टकरा गया था। हादसे में जोशी को गंभीर चोटें आई थीं।

मुआवजा तय करने में परिवार की आर्थिक क्षति अहम

मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करते समय मृतक या घायल व्यक्ति की आय, उम्र, भविष्य की संभावित आय, आश्रित परिवार और हादसे के कारण हुई आर्थिक क्षति जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है। मृतक के परिवार के मामले में मुआवजा केवल तत्काल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के भविष्य पर पड़े प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाता है।

नीरज मेहता के मामले में भी ट्रिब्यूनल ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद ₹5.01 करोड़ की राशि निर्धारित की। इस आदेश से परिवार को सड़क दुर्घटना के कारण हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई उपलब्ध कराने का रास्ता खुला है।

बीमा कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला

MACT का यह आदेश बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। दुर्घटना के बाद बीमा कंपनी द्वारा उठाई गई किसी आपत्ति को केवल दलील के तौर पर पेश करना पर्याप्त नहीं होगा; उसे संबंधित आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी प्रस्तुत करना होगा।

नीरज मेहता के मामले में ट्रिब्यूनल ने विशेष रूप से इस बात को महत्व दिया कि बीमा कंपनी अपने दावे के समर्थन में न तो गवाह पेश कर सकी और न ही चार्जशीट को रिकॉर्ड पर ला सकी। इसी आधार पर उसके बचाव को स्वीकार नहीं किया गया।

इस तरह 4 अगस्त का ₹5.01 करोड़ का आदेश सड़क हादसे में जान गंवाने वाले कारोबारी के परिवार के लिए बड़ी राहत है। वहीं, हाल के समय में MACT द्वारा दिए गए ₹19.97 करोड़ और ₹5.01 करोड़ के दो बड़े मुआवजा आदेशों ने सड़क दुर्घटना मामलों में उचित मुआवजे और बीमा कंपनियों की जवाबदेही के मुद्दे को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है।

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