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मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। गोवा के एक लग्जरी विला से कथित तौर पर संचालित हो रहे साइबर ठगी के इस नेटवर्क की जांच अब भारत से बाहर तक पहुंच गई है। जांचकर्ताओं को शक है कि गिरोह का एक मुख्य हैंडलर श्रीलंका में मौजूद हो सकता है। शुरुआती जांच के मुताबिक, पिछले करीब छह महीनों में 150 से अधिक ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिए लगभग 500 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाने के बाद दुबई भेजा गया और वहां उसे USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदले जाने की आशंका है। इस पूरे नेटवर्क में भारत में मौजूद बैंक खातों, विदेशों में बैठे संचालकों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे को ट्रैक करना मुश्किल बनाने की कोशिश की गई।
गोवा के लग्जरी विला से चल रहा था नेटवर्क
मुंबई क्राइम ब्रांच ने हाल ही में गोवा के एक लग्जरी विला से कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। जांच के दौरान सामने आया कि विला का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़े ऑपरेटरों के लिए किया जा रहा था।
शुरुआती कार्रवाई के बाद जब जांचकर्ताओं ने वित्तीय लेन-देन और डिजिटल कनेक्शन की पड़ताल शुरू की तो नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा नजर आया। अधिकारियों को ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया गया था।
इन खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। साइबर अपराधी अक्सर दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध धन को प्राप्त करने और अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। इससे रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए कठिन हो जाता है।
छह महीने में 500 करोड़ रुपये के लेन-देन का शक
जांचकर्ताओं के मुताबिक, पिछले छह महीनों के दौरान 150 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स में करीब 500 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। इतनी बड़ी रकम के कई खातों से होकर गुजरने से जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह कोई छोटा साइबर अपराध गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क हो सकता है।
जांच का एक अहम पहलू इस रकम की विदेशों में आवाजाही है। अधिकारियों को शक है कि ठगी की रकम को पहले विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से इकट्ठा किया गया और इसके बाद उसका एक हिस्सा दुबई भेजा गया। वहां इसे USDT में बदले जाने की आशंका है।
क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल से साइबर अपराधी कथित तौर पर पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर रकम को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग दे सकते हैं।
श्रीलंका में मुख्य हैंडलर का शक
जांच का सबसे अहम नया पहलू श्रीलंका से जुड़ा है। अधिकारियों को संदेह है कि इस नेटवर्क का एक मुख्य हैंडलर श्रीलंका में हो सकता है। यदि यह आशंका जांच में पुष्ट होती है तो इससे पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संचालन को समझने में मदद मिल सकती है।
अब तक दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों, खासकर कंबोडिया जैसे स्थानों से संचालित साइबर अपराध नेटवर्क की खबरें सामने आती रही हैं। कई मामलों में भारतीय नागरिकों को विदेशों में ले जाकर साइबर ठगी के कॉल सेंटरों में काम कराने के आरोप भी सामने आए हैं।
ऐसे में श्रीलंका में किसी मुख्य हैंडलर की मौजूदगी की आशंका ने जांच एजेंसियों के सामने एक नया सवाल खड़ा किया है कि क्या यह द्वीप देश भी अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के लिए नया संचालन केंद्र बन रहा है।
हालांकि, इस संबंध में अभी जांच जारी है और श्रीलंका में किसी विशेष नेटवर्क की मौजूदगी या वहां से बड़े पैमाने पर साइबर अपराध संचालित होने की पुष्टि आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ से WhatsApp DP फ्रॉड तक
नई जांच में आरोपियों द्वारा साइबर ठगी के कई तरीकों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम, WhatsApp DP से जुड़े फ्रॉड और APK फाइल आधारित साइबर ठगी प्रमुख हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अपराधी आम तौर पर पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। पीड़ित को किसी कथित अपराध या जांच में फंसने का डर दिखाकर वीडियो कॉल पर बने रहने और पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव डाला जाता है।
WhatsApp DP फ्रॉड में अपराधी किसी परिचित या अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल कर पीड़ित से संपर्क करने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं APK आधारित फ्रॉड में संदिग्ध मोबाइल एप्लिकेशन या फाइल डाउनलोड कराने के जरिए फोन और निजी जानकारी तक पहुंच हासिल करने का प्रयास किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही क्राइम ब्रांच
मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय और डिजिटल कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांचकर्ताओं की नजर म्यूल अकाउंट्स, हवाला या अन्य माध्यमों से संभावित धन हस्तांतरण, विदेशों में मौजूद संपर्कों और क्रिप्टो लेन-देन पर है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि 500 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन में वास्तविक ठगी की रकम कितनी थी, किन खातों से होकर पैसा गुजरा और विदेश में बैठे संचालकों की इसमें क्या भूमिका थी।
इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गोवा में मौजूद ऑपरेटरों का श्रीलंका और दुबई से किस तरह संपर्क था और क्या पूरे नेटवर्क के लिए अलग-अलग देशों में अलग-अलग स्तर के हैंडलर काम कर रहे थे।
श्रीलंका को लेकर बढ़ी चिंता
यदि श्रीलंका में मुख्य हैंडलर की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो भारतीय जांच एजेंसियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक नया आयाम जुड़ सकता है। सीमा पार साइबर अपराध के मामलों में अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना और वित्तीय लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण होती है।
मुंबई क्राइम ब्रांच की मौजूदा जांच ऐसे समय में सामने आई है जब साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं और ठगी की रकम को तेजी से कई देशों और वित्तीय माध्यमों के जरिए स्थानांतरित करने की कोशिश करते हैं।
फिलहाल जांच का दायरा गोवा से निकलकर भारत के बाहर तक पहुंच चुका है। 150 से अधिक म्यूल अकाउंट्स और करीब 500 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। अब जांचकर्ताओं की कोशिश इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के मुख्य संचालकों, विदेशों में मौजूद हैंडलरों और रकम के अंतिम ठिकाने का पता लगाने की है। श्रीलंका में संदिग्ध हैंडलर की भूमिका की पुष्टि और नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का खुलासा इस जांच की अगली बड़ी कड़ी हो सकता है।





