Ujjain : ज्योतिर्लिंग को नुकसान से बचाने के लिए महाकाल मंदिर ने उठाया अहम कदम, जानें क्या है नया नियम

Update: 2025-09-16 03:37 GMT
Ujjain उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बाबा महाकाल का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बाबा महाकाल की भस्म आरती और भव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित करता है। लेकिन हाल ही में मंदिर प्रशासन ने बाबा महाकाल के शिवलिंग के क्षरण की समस्या को गंभीरता से लिया है और श्रृंगार के नियमों में बदलाव किए हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, शिवलिंग पर भस्म लगाने, उसे छूने और पूजा सामग्री के कण चिपकने से धीरे-धीरे क्षरण हो रहा है। इस प्रक्रिया में छोटे-छोटे जीवाणु भी विकसित हो रहे हैं, जो शिवलिंग की सतह पर छिद्र बना रहे हैं।
इस समस्या को देखते हुए, मंदिर प्रशासन ने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के संरक्षण हेतु भांग की मात्रा कम करने का निर्णय लिया है। पहले जहाँ श्रृंगार में 5 से 7 किलो भांग का उपयोग होता था, अब इसे घटाकर केवल 3 किलो कर दिया गया है। इसके अलावा, मंदिर में भांग की मात्रा मापने के लिए तराजू भी लगाए जाएँगे, ताकि पुजारी 3 किलो से ज़्यादा भांग का इस्तेमाल न कर सकें। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि अब भगवान महाकाल के श्रृंगार में अधिकतम तीन किलो भांग का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इससे शिवलिंग की सुरक्षा और दीर्घायु सुनिश्चित होगी।
यह कदम वर्ष 2017 में सारिका गुरु द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद उठाया गया था, जिसमें शिवलिंग के क्षरण को रोकने की मांग की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई, जिसने भांग की मात्रा सीमित करने सहित शिवलिंग की सुरक्षा के लिए कई उपाय सुझाए। महाकाल मंदिर में दिन में पाँच बार आरती होती है, जिसमें सुबह 4 बजे भस्म आरती और शाम 7 बजे संध्या आरती प्रमुख हैं। इन आरतियों में पुजारी और भक्त भांग चढ़ाते हैं और भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार करते हैं। अब यह श्रृंगार नए नियमों के अनुसार किया जाएगा, ताकि शिवलिंग की सुरक्षा हो सके।
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