सिंहस्थ 2028 के लिए रेलवे की बड़ी तैयारी, AI कैमरों से होगी निगरानी और सुरक्षा
इंदौर। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर रेलवे ने अभी से व्यापक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने इंदौर में राज्य के नेताओं और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर सिंहस्थ से जुड़े रेलवे प्रोजेक्ट और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सिंहस्थ के दौरान 25 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए रेलवे स्टेशनों और परिसरों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।
बैठक में रेलवे की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, यात्रियों की संभावित भारी भीड़ के प्रबंधन, रेलवे ओवरब्रिज, रेल सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन के साथ इंदौर और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर भी यात्रियों का दबाव काफी बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए रेलवे लंबे समय पहले से आवश्यक परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेलवे परिसरों में एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित कैमरे लगाने की योजना है। इन कैमरों में चेहरा पहचानने और स्कैन करने जैसी आधुनिक क्षमताएं होंगी। इनके जरिए स्टेशन और रेलवे परिसर में होने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सकेगी।
बताया गया है कि AI कैमरे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में भी मदद करेंगे। किसी असामान्य या संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल अलर्ट भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इससे भीड़ वाले रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा एजेंसियों को तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।
सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में लाखों यात्रियों का एक साथ रेलवे स्टेशनों पर पहुंचना बड़ी चुनौती होती है। रेलवे के सामने ट्रेनों के संचालन के साथ प्लेटफॉर्म, प्रवेश और निकास द्वार तथा स्टेशन परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी होगी। ऐसे में AI आधारित निगरानी व्यवस्था भीड़ प्रबंधन में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
बैठक में मंगलिया क्रॉसिंग रेलवे ओवरब्रिज यानी ROB का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने भरोसा दिलाया कि मंगलिया क्रॉसिंग ROB के रेलवे से संबंधित हिस्से का काम तत्काल शुरू किया जाएगा। परियोजना को अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सिंहस्थ 2028 से पहले इस परियोजना को पूरा करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनने से सड़क यातायात को बेहतर बनाने और रेलवे फाटक के कारण लगने वाले जाम को कम करने में मदद मिल सकती है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में वाहनों और यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए ऐसी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी होगा।
बैठक में शास्त्री ब्रिज को चौड़ा करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। शहर में यातायात के दबाव को देखते हुए ब्रिज की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर विचार किया गया। सिंहस्थ के दौरान इंदौर से उज्जैन के बीच सड़क और रेल दोनों माध्यमों से यात्रियों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। इसलिए रेलवे से जुड़ी परियोजनाओं के साथ संपर्क मार्गों को भी मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
देवास के रास्ते इंदौर-उज्जैन रूट पर पैसेंजर ट्रेनें चलाने के विषय पर भी बैठक में चर्चा हुई। यदि इस मार्ग पर अतिरिक्त पैसेंजर सेवाएं उपलब्ध होती हैं तो इंदौर, देवास और उज्जैन के बीच यात्रा करने वाले लोगों को एक और विकल्प मिल सकता है। सिंहस्थ के दौरान यह रूट श्रद्धालुओं की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्ष 2028 के आयोजन में 25 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद को देखते हुए रेलवे की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। बड़ी संख्या में लोग लंबी दूरी की ट्रेनों से उज्जैन और आसपास के शहरों तक पहुंचेंगे। ऐसे में अतिरिक्त ट्रेनों, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की योजना समय रहते तैयार करना जरूरी है।
रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में भीड़ नियंत्रण शामिल होगा। धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी विशेष दिन या स्नान पर्व पर अचानक यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक भीड़ रोकना, यात्रियों को सही दिशा में भेजना और ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान की जानकारी समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
AI कैमरों की प्रस्तावित व्यवस्था इसी व्यापक सुरक्षा योजना का हिस्सा मानी जा रही है। तकनीक के माध्यम से रेलवे सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियां स्टेशन परिसर के संवेदनशील हिस्सों पर नजर रख सकेंगी। संदिग्ध गतिविधि की पहचान होने पर समय रहते कार्रवाई संभव हो सकेगी।
साथ ही रेलवे परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने पर भी जोर दिया गया। मंगलिया क्रॉसिंग ROB के रेलवे हिस्से को अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद सिंहस्थ शुरू होने से पहले रेलवे के पास अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा और परीक्षण के लिए पर्याप्त समय रहेगा।
बैठक से यह संकेत मिला है कि सिंहस्थ की तैयारियों को केवल उज्जैन रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इंदौर, देवास और आसपास के रेल नेटवर्क को भी व्यापक योजना का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं का दबाव अलग-अलग स्टेशनों और मार्गों पर बांटने में मदद मिल सकती है।
आने वाले समय में रेलवे की ओर से यात्री सुविधाओं, विशेष ट्रेनों, स्टेशन विकास और सुरक्षा से संबंधित अन्य योजनाओं पर भी काम आगे बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल AI आधारित निगरानी, मंगलिया क्रॉसिंग ROB, शास्त्री ब्रिज और इंदौर-उज्जैन के बीच पैसेंजर ट्रेन सेवा जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं।
सिंहस्थ 2028 के लिए रेलवे की तैयारियों का मुख्य उद्देश्य करोड़ों श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाना है। आयोजन से पहले परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षा मजबूत करना रेलवे की प्राथमिकताओं में शामिल है।