सागर। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में कथित जहरीली शराब से 11 लोगों की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। पिछले करीब छह वर्षों में इस क्षेत्र में जहरीली शराब से मौत की यह दूसरी बड़ी घटना बताई जा रही है। मामले की जांच में जुटी टीम अब शराब की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क को खंगाल रही है। प्रारंभिक स्तर पर इस बात की आशंका जताई जा रही है कि शराब की आपूर्ति का संबंध पड़ोसी उत्तर प्रदेश से हो सकता है। हालांकि जांच पूरी होने तक शराब के स्रोत और मौतों की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

सागर जिले में 11 लोगों की मौत के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की सक्रियता बढ़ गई है। जांच का प्रमुख सवाल यह है कि पीड़ितों ने कौन सी शराब पी थी और वह उन तक कहां से पहुंची। कथित जहरीली शराब की सप्लाई स्थानीय स्तर पर हुई या इसे सीमा पार से लाया गया, इसकी कड़ियां तलाशी जा रही हैं।

बुंदेलखंड का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच फैला हुआ है। दोनों राज्यों के कई जिले एक-दूसरे की सीमा से जुड़े हैं। मध्य प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों की सीमाएं उत्तर प्रदेश से लगती हैं। यही भौगोलिक स्थिति अवैध या अनधिकृत तरीके से वस्तुओं की आवाजाही को रोकने की चुनौती भी पैदा करती है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग रोजमर्रा की खरीदारी के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में आते-जाते रहते हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में शराब और पेट्रोल की कीमतों में अंतर होने के कारण भी लोग सीमा पार जाकर खरीदारी करते हैं। खास तौर पर सस्ती शराब खरीदारों को आकर्षित करती है।

इसी कारण सागर की घटना के बाद जांच में उत्तर प्रदेश से संभावित कनेक्शन की आशंका भी सामने आई है। हालांकि केवल कीमतों के अंतर या सीमा पार आवाजाही के आधार पर शराब का स्रोत तय नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसियों को सप्लाई चेन, बिक्री के स्थान और पीड़ितों तक शराब पहुंचने की पूरी कड़ी स्थापित करनी होगी।

11 लोगों की मौत का मामला बेहद गंभीर है। जहरीली शराब के मामलों में आम तौर पर यह पता लगाना जरूरी होता है कि शराब में कौन से हानिकारक तत्व मौजूद थे। इसके लिए नमूनों की रासायनिक और फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण होगी। मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य मेडिकल रिपोर्ट से भी मौत की सही वजह निर्धारित करने में मदद मिल सकती है।

यदि जांच में शराब में जहरीले रसायन की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो यह पता लगाया जाएगा कि उसमें मिलावट कहां और किस स्तर पर हुई। साथ ही शराब बनाने, परिवहन करने और बेचने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

इस घटना ने करीब छह साल पहले बुंदेलखंड में सामने आए इसी तरह के एक मामले की याद ताजा कर दी है। फरवरी 2021 में छतरपुर जिले में कथित जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हुई थी। अब सागर में 11 लोगों की मौत के बाद अवैध शराब की बिक्री और सीमावर्ती इलाकों में उसकी आवाजाही पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

दोनों घटनाओं के बीच लंबा अंतर जरूर है, लेकिन बुंदेलखंड में जहरीली शराब के कारण मौत का मामला दोबारा सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है। विशेष रूप से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध शराब की उपलब्धता रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की लंबी साझा सीमा के कारण दोनों राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। यदि जांच में अंतरराज्यीय शराब तस्करी या अवैध आपूर्ति के संकेत मिलते हैं तो दोनों राज्यों की संबंधित एजेंसियों को मिलकर पूरे नेटवर्क की पहचान करनी पड़ सकती है।

सस्ती शराब की मांग भी अवैध कारोबार को बढ़ावा देने वाले कारणों में शामिल हो सकती है। यदि एक राज्य में शराब की कीमत दूसरे की तुलना में कम है तो सीमावर्ती क्षेत्रों में लोग खरीदारी के लिए दूसरी तरफ जा सकते हैं। इसी वैध आवाजाही की आड़ में अनधिकृत शराब की सप्लाई होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

जहरीली शराब के मामले सामान्य शराब तस्करी से कहीं अधिक गंभीर होते हैं। अवैध रूप से तैयार शराब में यदि खतरनाक रसायन या मिथेनॉल जैसी जहरीली सामग्री मिल जाए तो थोड़ी मात्रा भी गंभीर स्वास्थ्य नुकसान पहुंचा सकती है। इससे आंखों की रोशनी जाने, अंगों को नुकसान पहुंचने और मौत तक का खतरा हो सकता है।

यही वजह है कि सागर की घटना में शराब के नमूनों की जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पीड़ितों ने वास्तव में जहरीली शराब का सेवन किया था या मौतों के पीछे कोई अन्य कारण था।

घटना के बाद उन स्थानों की पहचान करना भी जरूरी होगा जहां से मृतकों ने शराब खरीदी थी। यदि सभी पीड़ितों ने एक ही स्रोत से शराब खरीदी थी तो जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है। वहीं अलग-अलग स्थानों से शराब खरीदने की स्थिति में आपूर्ति नेटवर्क का दायरा बड़ा हो सकता है।

इस मामले ने शराब की अवैध बिक्री पर निगरानी की व्यवस्था को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। सीमावर्ती जिलों में नियमित जांच, संदिग्ध वाहनों की निगरानी और अवैध बिक्री के ठिकानों की पहचान ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

स्थानीय लोगों की ओर से उत्तर प्रदेश में शराब सस्ती होने और खरीदारी के लिए सीमा पार जाने की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियां इस पहलू को भी देख सकती हैं। लेकिन फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि सागर में कथित जहरीली शराब उत्तर प्रदेश से ही आई थी। इसलिए इसे जांच के एक संभावित पहलू के रूप में देखना जरूरी है।

11 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में मातम है। अब उनकी नजर इस बात पर है कि जांच में मौतों की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और यदि जहरीली शराब जिम्मेदार पाई जाती है तो उसकी आपूर्ति करने वालों तक एजेंसियां कब पहुंचती हैं।

सागर की घटना ने बुंदेलखंड में अवैध शराब के खतरे को फिर चर्चा में ला दिया है। फरवरी 2021 में छतरपुर में चार लोगों की मौत के बाद अब 11 लोगों की जान जाने की घटना ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

फिलहाल जांच का फोकस शराब के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन पर है। उत्तर प्रदेश से संबंध होने की आशंका की भी जांच की जा रही है। अंतिम स्थिति फोरेंसिक रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगी।

Tags: