Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश का जल संकटग्रस्त डिंडौरी जिला लंबे समय से गंभीर भूजल संकट का सामना कर रहा है। यह जिला रेड जोन में शामिल है, जहां गर्मी शुरू होते ही पानी की समस्या और अधिक गहरा जाती है। ऐसे हालात में अंजू पवन भदौरिया की पहल ने जिले को एक नई पहचान दी है।
डिंडौरी के कई गांवों में लोग आज भी बुनियादी जल सुविधाओं से वंचित हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीण झिरिया जैसे प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं, जहां जमीन से रिस-रिस कर पानी निकलता है। इसके अलावा कई जगह लोग बहते नालों के पानी का उपयोग करके अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं।
गर्मी के मौसम में यह संकट और गंभीर हो जाता है, जब पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और कई बार लोगों को घंटों इंतजार भी करना पड़ता है। इस स्थिति का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है, जिन्हें पानी लाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है।
ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में अंजू पवन भदौरिया ने जल संरक्षण और जागरूकता के क्षेत्र में काम करते हुए डिंडौरी जिले की स्थिति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनके प्रयासों के कारण जल संकट की गंभीरता और स्थानीय समस्याओं को व्यापक स्तर पर समझने में मदद मिली है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी पहल ने गांवों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई है और लोगों को पानी के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया है। इसके साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में भी कुछ प्रयास शुरू हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिंडौरी जैसे क्षेत्रों में जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण पर लंबे समय तक काम करने की जरूरत है, ताकि आने वाले वर्षों में स्थिति को सुधारा जा सके।
फिलहाल डिंडौरी जिला जहां एक ओर जल संकट से जूझ रहा है, वहीं अंजू पवन भदौरिया की पहल ने इस क्षेत्र की समस्याओं को नई पहचान और चर्चा का विषय बना दिया है।