कर्नाटक : प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली बनी हुई है। राज्य के 14 बड़े जलाशयों में 24 जुलाई तक कुल 419.35 टीएमसी फीट (TMCft) पानी दर्ज किया गया है। पिछले छह वर्षों के आंकड़ों की तुलना में यह इसी तारीख पर दर्ज किया गया दूसरा सबसे कम जल भंडारण है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में जल भंडारण की स्थिति पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कमजोर बनी हुई है। इससे आने वाले समय में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में 24 जुलाई तक जलाशयों में सबसे कम पानी दर्ज किया गया था। उस समय कावेरी और कृष्णा नदी बेसिन के जलाशयों तथा पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में कुल 895.69 टीएमसी फीट की क्षमता के मुकाबले सिर्फ 371.07 टीएमसी फीट पानी उपलब्ध था।
इस साल भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। राज्य के अधिकांश प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम है। अधिकारियों के अनुसार, ज्यादातर जलाशयों में जल भंडारण में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
राज्य के प्रमुख जलाशयों में केवल अलमट्टी जलाशय ऐसा है, जहां पिछले वर्षों की तुलना में इस समय अधिक जल भंडारण दर्ज किया गया है। अलमट्टी जलाशय में 106.33 टीएमसी फीट पानी उपलब्ध है, जो अन्य जलाशयों की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
इसके विपरीत, कावेरी और कृष्णा बेसिन के कई अन्य जलाशयों में पानी की उपलब्धता कम बनी हुई है। इन जलाशयों में कम जल स्तर का सीधा असर कृषि गतिविधियों और स्थानीय जल प्रबंधन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलाशयों में कम पानी का मुख्य कारण मानसून की स्थिति, बारिश का असमान वितरण और पिछले वर्ष के जल उपयोग का प्रभाव हो सकता है। कर्नाटक में खेती के लिए बड़ी मात्रा में पानी जलाशयों से उपलब्ध कराया जाता है, ऐसे में जल भंडारण में कमी किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
राज्य में कावेरी और कृष्णा नदी बेसिन के जलाशय सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन जलाशयों में पानी की उपलब्धता का असर न केवल ग्रामीण क्षेत्रों बल्कि शहरों की जल जरूरतों पर भी पड़ता है।
बेंगलुरु सहित कई बड़े शहरों की जल आपूर्ति भी जल संसाधनों पर निर्भर करती है। ऐसे में कम जल भंडारण की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को जल प्रबंधन और संरक्षण पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
जल संसाधन विभाग की ओर से लगातार जलाशयों की स्थिति की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश की स्थिति में सुधार होने पर जलाशयों में पानी की आवक बढ़ सकती है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जल भंडारण को देखते हुए सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने को लेकर आशंका बनी हुई है। यदि मानसून कमजोर रहता है तो फसलों पर इसका असर पड़ सकता है और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
पानी की कमी को देखते हुए विशेषज्ञ लोगों से जल संरक्षण की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि जल संसाधनों का संतुलित उपयोग और पानी की बर्बादी रोकना जरूरी है, ताकि भविष्य में संकट की स्थिति से बचा जा सके।
फिलहाल कर्नाटक के जलाशयों में जल स्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति यह तय करेगी कि जल भंडारण में कितना सुधार होता है। राज्य सरकार और संबंधित विभागों के सामने अब जल प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।