बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य के टियर-2 और टियर-3 शहरों में औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 167 शहरों और कस्बों में प्रस्तावित रिंग रोड के दोनों ओर कुल चार किलोमीटर चौड़ा विकास कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस क्षेत्र में आवासीय टाउनशिप, अपार्टमेंट, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, होटल, कार्यालय, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क, शिक्षण संस्थान और विभिन्न उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे।

राज्य सरकार ने इस योजना को ‘रोड नेटवर्क ग्रिड प्लान’ नाम दिया है। इसका उद्देश्य मौजूदा मास्टर प्लान में दर्ज सड़कों को आपस में जोड़ना, शहरों के चारों ओर रिंग रोड विकसित करना और मुख्य शहरी क्षेत्रों पर यातायात का दबाव कम करना है। नए सड़क नेटवर्क के माध्यम से शहरों के बाहरी हिस्सों में योजनाबद्ध विकास को गति देने की तैयारी है।

सरकारी आदेश के मुताबिक रोड नेटवर्क ग्रिड प्लान या मौजूदा मास्टर प्लान में प्रस्तावित रिंग रोड के दोनों ओर दो-दो किलोमीटर के क्षेत्र को ‘इम्पैक्ट जोन’ माना जाएगा। इस प्रकार रिंग रोड के साथ कुल चार किलोमीटर चौड़ा विकास कॉरिडोर तैयार होगा। इस क्षेत्र में जमीन के इस्तेमाल से संबंधित कई गतिविधियों को अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।

योजना की खास बात यह है कि इसमें वे शहर और कस्बे भी शामिल किए गए हैं, जिनके मास्टर प्लान को अभी अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे क्षेत्रों में रोड नेटवर्क ग्रिड प्लान भविष्य के शहरी विस्तार की रूपरेखा तैयार करने में मदद करेगा। रिंग रोड के प्रस्तावित मार्ग और उसके आसपास के क्षेत्र को पहले से चिह्नित करने से अनियोजित निर्माण को नियंत्रित करने तथा जरूरी बुनियादी ढांचे के लिए स्थान सुरक्षित रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

इम्पैक्ट जोन में आवासीय टाउनशिप, बहुमंजिला अपार्टमेंट और ऊंची इमारतें बनाने की अनुमति होगी। इसके अलावा बाजार, होटल, कार्यालय, बैंक, सुपरमार्केट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी रास्ता खोला गया है। इससे छोटे और मध्यम शहरों के बाहरी क्षेत्रों में नए आवासीय तथा कारोबारी केंद्र विकसित हो सकते हैं।

सरकार ने वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स पार्क को भी अनुमत गतिविधियों की सूची में शामिल किया है। रिंग रोड से सीधे संपर्क होने के कारण माल ढुलाई करने वाले वाहनों को शहरों के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में प्रवेश करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे माल के परिवहन और भंडारण के लिए शहरों के बाहर नए केंद्र विकसित करने का अवसर मिलेगा।

ऑटोमोबाइल शोरूम और वाहनों से जुड़े अन्य प्रतिष्ठान भी प्रस्तावित कॉरिडोर में स्थापित किए जा सकेंगे। इसके साथ खतरनाक श्रेणी में शामिल उद्योगों को छोड़कर अन्य औद्योगिक इकाइयों को अनुमति दी जाएगी। सरकार का मानना है कि सड़क संपर्क बेहतर होने से उद्योगों को परिवहन, कच्चे माल और बाजार तक पहुंचने में सुविधा होगी।

शिक्षण संस्थानों को भी इम्पैक्ट जोन में स्थान दिया गया है। इसके अलावा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से संबंधित सुविधाएं और पर्यटन परियोजनाएं भी विकसित की जा सकेंगी। हालांकि प्रत्येक गतिविधि के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय योजना प्राधिकरणों के नियमों तथा आवश्यक अनुमतियों का पालन करना होगा।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रोड नेटवर्क ग्रिड प्लान की घोषणा करते हुए कहा था, “हम सभी कस्बों और शहरों में आवाजाही के लिए सड़कों का एक नया ग्रिड बना रहे हैं।” इससे पहले सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक ट्रैफिक ग्रिड तैयार करने और शहरों में रिंग रोड विकसित करने की योजना की जानकारी दी थी। 

प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य विकास को केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रखकर छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंचाना है। राज्य में रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा कुछ प्रमुख शहरों में केंद्रित है। रिंग रोड के आसपास योजनाबद्ध आवासीय और कारोबारी क्षेत्र तैयार होने से टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में निवेश की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

नए सड़क नेटवर्क के कारण शहरों के भीतर यातायात व्यवस्था में भी सुधार की संभावना जताई जा रही है। भारी और लंबी दूरी के वाहनों को रिंग रोड से बाहर निकालने पर अंदरूनी सड़कों का दबाव कम हो सकता है। इसके साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध होंगे। हालांकि इसका वास्तविक लाभ रिंग रोड की चौड़ाई, जंक्शन, सर्विस रोड और सार्वजनिक परिवहन जैसी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।

योजना लागू करते समय भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय निवासियों के हितों का संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा। बड़े विकास कॉरिडोर से जमीन के उपयोग में बदलाव आएगा। इसलिए कृषि भूमि, जल स्रोतों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता होगी। अनियोजित निर्माण को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को निगरानी भी मजबूत करनी होगी।

सरकार के आदेश से निवेशकों और रियल एस्टेट क्षेत्र की दिलचस्पी बढ़ सकती है, लेकिन भूमि मालिकों और आम लोगों के लिए योजना से संबंधित नियमों की स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक होगा। किस जमीन पर कौन-सी गतिविधि की अनुमति मिलेगी, सड़क के लिए कितना क्षेत्र आरक्षित रहेगा और भवन निर्माण के क्या मानक होंगे, इसका निर्धारण संबंधित योजना प्राधिकरण करेगा।

फिलहाल सरकार का यह निर्णय राज्य में भविष्य के शहरी विकास की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। यदि रोड नेटवर्क ग्रिड प्लान को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया गया तो 167 शहरों और कस्बों में बेहतर संपर्क, नए उद्योग, आवासीय परियोजनाएं तथा रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि विकास कॉरिडोर सुविधाजनक होने के साथ सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बने।

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