ट्रैफिक से राहत के लिए स्कूल-कॉलेजों का समय बदलने की तैयारी, शिक्षा मंत्री ने दिए संकेत
बेंगलुरु। राजधानी की सड़कों पर लगातार बढ़ती यातायात समस्या का प्रभाव अब केवल कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह गया है। हर दिन लगने वाले लंबे जाम से स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी, शिक्षक तथा अभिभावक भी परेशान हो रहे हैं। बच्चों को समय पर विद्यालय पहुंचाने के लिए परिवारों को निर्धारित समय से काफी पहले घर से निकलना पड़ रहा है। इस समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार बेंगलुरु के सरकारी स्कूलों के समय में बदलाव करने की योजना पर विचार कर रही है।
शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने स्कूलों और कॉलेजों की समय-सारिणी में संभावित बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहर की यातायात समस्या को ध्यान में रखते हुए शिक्षण संस्थानों के समय में परिवर्तन करने का अनुरोध सामने आया है। इस विषय पर संबंधित विभागों, शिक्षण संस्थानों और अन्य पक्षों के साथ बातचीत की जाएगी। सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही कोई उचित निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल सरकार की ओर से स्कूलों और कॉलेजों के लिए कोई नया समय घोषित नहीं किया गया है। शिक्षा मंत्री के बयान से इतना स्पष्ट हुआ है कि सरकार इस प्रस्ताव को गंभीरता से देख रही है। संभावित बदलाव से पहले विद्यार्थियों की सुविधा, शिक्षकों की उपलब्धता, अभिभावकों की दिनचर्या, सार्वजनिक परिवहन और स्कूल वाहनों के संचालन जैसे विषयों पर विचार किया जाएगा। अलग-अलग पक्षों से प्राप्त सुझावों के आधार पर ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रयास होगा, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुए बिना सड़कों पर दबाव कम किया जा सके।
बेंगलुरु देश के सबसे व्यस्त महानगरों में शामिल है। शहर में निजी वाहनों की संख्या बढ़ने, एक ही समय पर कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों के खुलने तथा मुख्य मार्गों पर वाहनों का दबाव अधिक होने के कारण व्यस्त समय में जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है। सुबह स्कूल बसों, निजी वाहनों, ऑटो और कार्यालय जाने वालों की गाड़ियों के एक साथ सड़कों पर आने से कई प्रमुख मार्गों पर यातायात धीमा पड़ जाता है। इसी तरह शाम के समय स्कूलों और कार्यालयों की छुट्टी के दौरान भी वाहनों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं।
इस समस्या का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। कई बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रास्ते में जाम लगने पर उनका काफी समय वाहन में ही बीत जाता है। इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक थकान का सामना करना पड़ता है। घर लौटने में देरी होने से पढ़ाई, खेलकूद और आराम के लिए मिलने वाला समय भी कम हो जाता है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से परेशानी पैदा करती है।
शिक्षकों को भी लगभग ऐसी ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यातायात की अनिश्चित स्थिति के कारण उन्हें समय से काफी पहले निकलना पड़ता है। कई बार रास्ते में अचानक जाम लगने से समय पर स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसका असर विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों और कक्षाओं के संचालन पर पड़ने की आशंका रहती है। सरकार का मानना है कि समय में व्यावहारिक बदलाव के माध्यम से वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग अवधि में बांटा जा सकता है।
स्कूल और कॉलेजों की समय-सारिणी बदलने का प्रस्ताव लागू होने पर शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों के खुलने का समय अलग-अलग हो सकता है। इससे सुबह और शाम के व्यस्त घंटों में एक साथ सड़कों पर आने वाले वाहनों की संख्या घटने की उम्मीद है। हालांकि यह बदलाव कितना प्रभावी होगा, इसका आकलन नई व्यवस्था के स्वरूप और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
इस निर्णय में अभिभावकों की राय भी महत्वपूर्ण होगी। नौकरीपेशा अभिभावक अक्सर अपने कार्यालय जाने से पहले बच्चों को स्कूल छोड़ते हैं। स्कूल का समय बदलने पर उनकी कार्य-सारिणी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा स्कूल बसों, वैन और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था को भी नई समय-सारिणी के अनुरूप बदलना पड़ेगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बदलाव के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
समय में बदलाव करते समय मौसम और बच्चों की उम्र को ध्यान में रखना भी आवश्यक होगा। बहुत सुबह विद्यालय शुरू किए जाने की स्थिति में दूर रहने वाले बच्चों को अंधेरा रहते घर से निकलना पड़ सकता है। वहीं, छुट्टी देर से होने पर विद्यार्थियों के घर लौटने और उनकी अन्य गतिविधियों का समय प्रभावित हो सकता है। इसलिए सभी कक्षाओं और शिक्षण संस्थानों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू करने के बजाय अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
सरकारी स्कूलों के साथ निजी स्कूलों और कॉलेजों के समय में बदलाव को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। केवल कुछ संस्थानों का समय बदलने से यातायात पर सीमित असर पड़ सकता है। शहर के विभिन्न इलाकों में ट्रैफिक की स्थिति भी एक जैसी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में आईटी कंपनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या अधिक होने के कारण सुबह और शाम भारी जाम लगता है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में स्कूल वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है। ऐसे में क्षेत्रवार व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है।
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार, केवल स्कूलों का समय बदलना समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। इसके साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, स्कूल बसों के बेहतर संचालन, अवैध पार्किंग पर नियंत्रण और मुख्य मार्गों पर यातायात प्रबंधन सुधारने की भी आवश्यकता होगी। स्कूलों के आसपास वाहनों के रुकने और बच्चों को उतारने-चढ़ाने के दौरान बनने वाली अव्यवस्था को नियंत्रित करना भी जरूरी है।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार जल्दबाजी में फैसला नहीं करेगी। संबंधित विभागों और हितधारकों के साथ बातचीत के बाद ऐसा समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा, जो बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए सुविधाजनक हो। प्रस्ताव लागू होने से पहले विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। अब विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर सरकार की आगामी बैठक और अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है