कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में तीन संदिग्ध शिकारियों की मौत से तनाव, सात दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
चामराजनगर। कर्नाटक के कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में वन विभाग के कर्मचारियों की गोलीबारी में तीन संदिग्ध शिकारियों की मौत के बाद हनूर शहर और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। घटना के विरोध में किसानों के साथ दलित और आदिवासी संगठनों के नेताओं ने मृतकों के परिवारों का समर्थन किया है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है। विरोध बढ़ने के बाद चामराजनगर जिला प्रशासन ने तीनों मौतों की जांच के आदेश दे दिए हैं।
चामराजनगर के जिलाधिकारी ने मामले की जांच की जिम्मेदारी कोल्लेगल के सब-डिविजनल ऑफिसर दिनेश कुमार मीणा को सौंपी है। जांच अधिकारी ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है और घटनास्थल का दौरा भी किया है। प्रशासन के अनुसार जांच रिपोर्ट सात दिनों के भीतर सौंपे जाने की उम्मीद है।
दिनेश कुमार मीणा ने बताया कि उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मौका-ए-वारदात से संबंधित महाजर की प्रक्रिया पूरी की। अब घटना से जुड़े अन्य तथ्यों और दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जांच के लिए महत्वपूर्ण होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों को मिलाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
तीन लोगों की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में वन विभाग के कर्मचारियों को गोली चलानी पड़ी। मृतकों को संदिग्ध शिकारी बताया जा रहा है, लेकिन उनके परिजनों और विभिन्न संगठनों ने घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि गोलीबारी से पहले क्या हुआ था।
किसान, दलित और आदिवासी संगठनों के नेताओं ने पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि यह पता लगाया जाए कि वन विभाग की टीम ने निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया था या नहीं। तीन लोगों की जान जाने के कारण मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
घटना के बाद हनूर में बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क है। संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है। अधिकारियों की कोशिश है कि जांच प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि घटना को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सामने आ सके।
जांच अधिकारी के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम घटनाक्रम की पूरी कड़ी को स्थापित करना होगा। इसमें यह पता लगाना शामिल होगा कि तीनों लोग जंगल में कब और किस उद्देश्य से गए थे, वन विभाग की टीम से उनका सामना किन परिस्थितियों में हुआ और गोली चलाने की नौबत क्यों आई। इसके साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि घटना के समय दोनों पक्षों के पास क्या सामान या हथियार मौजूद थे।
घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य जांच के लिए बेहद अहम होंगे। गोलीबारी से जुड़े मामलों में हथियारों, कारतूस, गोलियों की दिशा और घटनास्थल की परिस्थितियों का विश्लेषण वास्तविक घटनाक्रम को समझने में मदद करता है। इसके अलावा वन विभाग की टीम में शामिल कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जाने की संभावना है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मृतकों को लगी गोलियों की संख्या, चोटों की प्रकृति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। इसी कारण जांच अधिकारी ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जांच के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों या आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
कावेरी वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है। यहां वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार रोकने के लिए वन विभाग की टीमें निगरानी करती हैं। वन कर्मचारियों को कई बार दुर्गम क्षेत्रों में गश्त करनी पड़ती है और संदिग्ध गतिविधियां मिलने पर कार्रवाई करनी होती है। हालांकि किसी अभियान में लोगों की मौत होने पर बल प्रयोग की परिस्थितियों की जांच आवश्यक हो जाती है।
इस मामले में भी जांच का मुख्य केंद्र यही होगा कि गोलीबारी परिस्थितियों के अनुरूप थी या नहीं। संदिग्ध शिकारियों की ओर से वन कर्मचारियों को किसी तरह का तत्काल खतरा था या नहीं और वन विभाग के पास उन्हें हिरासत में लेने के दूसरे विकल्प उपलब्ध थे या नहीं, जैसे सवाल जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इससे पहले गोलीबारी की निंदा करते हुए सवाल किया था कि कथित शिकारियों को जिंदा गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। उन्होंने राज्य सरकार की जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए थे। इससे मामला स्थानीय विरोध से आगे बढ़कर राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अवैध शिकार गंभीर अपराध है। संरक्षित वन क्षेत्रों में शिकार की गतिविधियों को रोकने के लिए कानून के तहत सख्त प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने और उसके खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल के प्रश्न अलग-अलग हैं। इसलिए जांच के जरिए यह निर्धारित करना जरूरी होगा कि घटना के समय वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं।
मृतकों के परिवारों को समर्थन दे रहे संगठनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनकी अपेक्षा है कि जांच में वन विभाग के अधिकारियों के पक्ष के साथ पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों की बात भी शामिल की जाए। इससे जांच को लेकर लोगों का भरोसा कायम रखने में मदद मिल सकती है।
सात दिनों की समयसीमा तय किए जाने से प्रशासन ने संकेत दिया है कि मामले की जांच तेजी से पूरी करने की कोशिश की जाएगी। हालांकि विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए पोस्टमार्टम सहित सभी आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध होना जरूरी होगा।
फिलहाल जांच अधिकारी दिनेश कुमार मीणा घटनास्थल का निरीक्षण कर महाजर की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का इंतजार है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में तीन संदिग्ध शिकारियों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और वन विभाग की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।