बेंगलुरु। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की छठी गारंटी योजना के रूप में शुरू की गई ‘लैंड गारंटी’ योजना को उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत आने वाले पांच नगर निगमों में B-खाता संपत्तियों को A-खाता में बदलने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के तहत 14 अगस्त तक केवल 5.54 प्रतिशत संपत्ति मालिकों ने कन्वर्जन के लिए आवेदन किया।

सरकार ने B-खाता संपत्तियों को नियमित करने और उनके मालिकों को A-खाता रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुल्क में बड़ी छूट दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में संपत्ति मालिकों ने योजना का लाभ नहीं उठाया। योजना की कम भागीदारी ने सरकार के राजस्व लक्ष्य को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

8.49 लाख B-खाता संपत्तियां, आवेदन सिर्फ 47 हजार

बेंगलुरु में कुल 8,49,975 B-खाता संपत्तियां दर्ज हैं। सरकार को उम्मीद थी कि शुल्क में छूट मिलने के बाद बड़ी संख्या में संपत्ति मालिक अपनी संपत्तियों को A-खाता में परिवर्तित कराने के लिए आगे आएंगे।

लेकिन 14 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें से केवल 47,088 संपत्ति मालिकों ने कन्वर्जन के लिए आवेदन किया। यानी कुल B-खाता संपत्तियों की तुलना में आवेदन करने वालों की हिस्सेदारी महज 5.54 प्रतिशत रही।

इन आवेदनों में से भी सभी को मंजूरी नहीं मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 24,965 आवेदन मंजूर किए गए हैं। इसका मतलब है कि आवेदन करने वाले मालिकों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहा है।

सरकार को 311.77 करोड़ रुपये का राजस्व

योजना के तहत सरकार को अब तक 311.77 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। हालांकि, सरकार ने योजना शुरू करते समय इससे कहीं अधिक राजस्व जुटाने की उम्मीद की थी।

सरकार का अनुमान था कि B-खाता संपत्तियों के A-खाता में रूपांतरण से लगभग 10,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है। लेकिन योजना की समाप्ति तक वास्तविक राजस्व अनुमानित लक्ष्य के मुकाबले काफी कम रहा।

इस अंतर ने योजना की प्रभावशीलता और लोगों की कम भागीदारी पर चर्चा को जन्म दिया है। सरकार के सामने अब यह सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में B-खाता संपत्तियों के बावजूद केवल सीमित संख्या में मालिक ही कन्वर्जन के लिए क्यों आगे आए।

कन्वर्जन फीस में बड़ी छूट

‘लैंड गारंटी’ योजना को आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने कन्वर्जन फीस में महत्वपूर्ण कटौती की थी। योजना के तहत B-खाता से A-खाता में संपत्ति बदलने के लिए निर्धारित फीस को गाइडेंस वैल्यू के 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया था।

सरकार को उम्मीद थी कि इस छूट से बड़ी संख्या में संपत्ति मालिक आवेदन करेंगे। कम शुल्क के कारण उन लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद थी, जो अधिक फीस के कारण पहले A-खाता कन्वर्जन की प्रक्रिया से दूर रहे थे।

इसके बावजूद आवेदन का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम रहा। इससे संकेत मिलता है कि केवल शुल्क में कमी करना ही संपत्ति मालिकों को आवेदन के लिए प्रेरित करने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।

रविवार को खत्म हुई योजना

‘लैंड गारंटी’ योजना की निर्धारित अवधि रविवार को समाप्त हो गई। योजना खत्म होने के बाद अब उन संपत्ति मालिकों के सामने सवाल है, जो आवेदन नहीं कर सके या जिनके आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं।

फिलहाल सरकार की ओर से योजना को आगे बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यदि सरकार समयसीमा बढ़ाने का फैसला करती है तो बड़ी संख्या में ऐसे संपत्ति मालिकों को राहत मिल सकती है, जो योजना का लाभ उठाने से वंचित रह गए हैं।

हालांकि, योजना की कम भागीदारी को देखते हुए सरकार को आगे की रणनीति पर विचार करना होगा।

B-खाता और A-खाता का मामला

बेंगलुरु में संपत्तियों से जुड़े A-खाता और B-खाता रिकॉर्ड लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं। सामान्य तौर पर A-खाता संपत्तियों को संबंधित स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड में अधिक नियमित और स्वीकृत संपत्तियों के रूप में देखा जाता है, जबकि B-खाता रिकॉर्ड में ऐसी संपत्तियां शामिल हो सकती हैं जिनसे जुड़े नियमन या दस्तावेजी पहलू अलग होते हैं।

B-खाता संपत्ति मालिकों के लिए A-खाता में परिवर्तन कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे संपत्ति के रिकॉर्ड को नियमित करने और भविष्य में संपत्ति से जुड़े कुछ प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाने की उम्मीद रहती है।

इसी उद्देश्य से सरकार ने ‘लैंड गारंटी’ योजना शुरू की थी।

कम आवेदन के पीछे कई कारण

योजना के तहत आवेदन करने वालों की संख्या कम रहने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ संपत्ति मालिकों को प्रक्रिया, दस्तावेजों और पात्रता संबंधी जानकारी की कमी हो सकती है। वहीं, कुछ लोगों को अतिरिक्त शुल्क या संपत्ति से जुड़े अन्य लंबित मामलों की वजह से आवेदन करने में कठिनाई हो सकती है।

इसके अलावा, जिन संपत्तियों के दस्तावेज पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हैं, उनके मालिक आवेदन करने से पहले कानूनी या प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करना चाहते होंगे। यही वजह है कि केवल फीस कम करने के बावजूद योजना को व्यापक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

सरकार के सामने आगे की चुनौती

‘लैंड गारंटी’ योजना के आंकड़े सरकार के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं। एक तरफ शहर में 8.49 लाख से अधिक B-खाता संपत्तियां हैं, वहीं दूसरी तरफ केवल 47 हजार से कुछ अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

सरकार को अब यह समझने की जरूरत होगी कि बाकी संपत्ति मालिक योजना से क्यों नहीं जुड़े। यदि योजना को आगे बढ़ाया जाता है तो आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने, लोगों को जानकारी देने और लंबित मामलों के जल्द निपटारे पर जोर देना होगा।

10 हजार करोड़ के लक्ष्य से काफी पीछे

सरकार ने योजना के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये तक राजस्व जुटाने की उम्मीद जताई थी, लेकिन अब तक 311.77 करोड़ रुपये का राजस्व ही प्राप्त हुआ है। यह अनुमानित लक्ष्य से काफी कम है।

इसलिए योजना की सफलता का आकलन केवल प्राप्त आवेदनों और राजस्व से नहीं, बल्कि B-खाता संपत्तियों के नियमितीकरण के व्यापक उद्देश्य से भी किया जाएगा।

फिलहाल योजना की समयसीमा समाप्त हो चुकी है और इसके विस्तार पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में बेंगलुरु के लाखों B-खाता संपत्ति मालिकों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि योजना को दोबारा या विस्तारित अवधि के साथ लागू किया जाता है, तो सरकार के लिए लोगों की कम भागीदारी के कारणों को दूर करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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