बेंगलुरु। कर्नाटक के कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के शाग्या बीट के होलेमुरी डट्टी जंगल क्षेत्र में हुई गोलीबारी की घटना को लेकर विवाद बढ़ गया है। वन अधिकारियों के साथ हुई कथित मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत के बाद अब मृतकों के परिवारों ने वन विभाग के दावों पर सवाल उठाए हैं।
वन विभाग ने दावा किया था कि मारे गए तीनों लोग शौकिया शिकारी थे और जंगल क्षेत्र में अवैध शिकार के उद्देश्य से पहुंचे थे। हालांकि, मृतकों के परिवारों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उनके परिजन शिकार करने नहीं गए थे और उनका शिकार से कोई संबंध नहीं था।
परिवारों ने वन विभाग के दावे को नकारा
मृतकों के परिजनों का कहना है कि वन विभाग की ओर से दी गई जानकारी वास्तविकता से अलग है। परिवारों का आरोप है कि उनके रिश्तेदार जंगल क्षेत्र में किसी गलत उद्देश्य से नहीं गए थे।
परिजनों ने सवाल उठाया है कि अगर किसी व्यक्ति से कोई गलती भी हुई थी तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का सामना करना चाहिए था, न कि गोली मार दी जानी चाहिए थी।
इस घटना के बाद वन विभाग की कार्रवाई और सुरक्षा बलों के अधिकारों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
एंथनी की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
गोलीबारी में मारे गए लोगों में से एक एंथनी की पत्नी लोर्ड मैरी ने बताया कि उनके पति किसान थे और अपने खेत में मक्का की खेती करते थे।
उन्होंने कहा कि एंथनी खेत में फसल की निगरानी कर रहे थे, क्योंकि जंगली जानवरों से फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता था।
लोर्ड मैरी का आरोप है कि उनके पति को खेत से ले जाया गया और बाद में गोली मार दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई अपराध हुआ भी था तो कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जान लेने का अधिकार किसने दिया, इसकी जांच होनी चाहिए।
घायल कुमार के परिवार ने भी उठाए सवाल
घटना में घायल हुए कुमार की पत्नी डोमिना ने भी वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि अगर उनके पति ने कोई गलती की थी तो उन्हें अदालत और कानून के सामने पेश किया जाना चाहिए था।
डोमिना ने सवाल किया कि वन अधिकारियों को गोली चलाने की अनुमति किसने दी। उन्होंने कहा कि अब उनके बच्चों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
परिवारों का कहना है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
वन विभाग का अलग दावा
वहीं, वन विभाग ने इस मामले में अलग पक्ष रखा है। विभाग का कहना है कि जंगल क्षेत्र में कुछ लोग अवैध शिकार की गतिविधियों में शामिल थे।
वन अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और गोलीबारी हुई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई।
हालांकि, परिवारों के आरोपों के बाद अब इस घटना की जांच और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव
गोलीबारी की घटना के बाद स्थानीय क्षेत्र में तनाव का माहौल है। मृतकों के परिवार और ग्रामीण इस मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की समस्याओं को समझना जरूरी है। कई ग्रामीण जंगलों के आसपास खेती करते हैं और उन्हें अक्सर जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए खेतों में जाना पड़ता है।
मानवाधिकार और कार्रवाई पर चर्चा
इस घटना के बाद मानवाधिकार और कानून के इस्तेमाल को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वन अपराधों को रोकना जरूरी है, लेकिन किसी भी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया और मानव जीवन की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति पर अवैध गतिविधि का आरोप है तो उसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच की मांग तेज
मृतकों के परिवारों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गोलीबारी की परिस्थितियों, वन अधिकारियों की भूमिका और घटनाक्रम की पूरी जांच होनी चाहिए।
परिवारों का आरोप है कि उनके परिजनों को गलत तरीके से निशाना बनाया गया।
वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह जांच का विषय है कि उस समय वास्तविक स्थिति क्या थी और गोली चलाने की जरूरत किन परिस्थितियों में पड़ी।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल मामले को लेकर विवाद जारी है। जहां वन विभाग अपने दावे पर कायम है, वहीं मृतकों के परिवार इसे गलत बता रहे हैं।
अब जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और किसकी जिम्मेदारी तय होती है।