CM डीके शिवकुमार को बड़ा झटका, MLC चुनाव में कांग्रेस 0 और NDA 4, भाजपा ने उड़ाया मजाक
बेंगलुरु। कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन NDA ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज कर 4-0 से क्लीन स्वीप किया है। इनमें दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। भाजपा ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसकी सहयोगी जेडीएस ने एक सीट अपने नाम की। मंगलवार, 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद घोषित परिणामों से उत्साहित भाजपा ने बुधवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर सोशल मीडिया के जरिए निशाना साधा। पार्टी ने अभिनेता सलमान खान से जुड़े वायरल इंटरनेट ट्रेंड की तर्ज पर तंज कसते हुए एक्स पर लिखा, 'डीके, हो गया भाई! MLC चुनावों में शिक्षकों और स्नातकों की चारों सीटों पर NDA जीत गया है।' इस पोस्ट के साथ भाजपा ने शिवकुमार की एक तस्वीर भी साझा की। चुनाव परिणाम के बाद कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस गठबंधन के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में NDA का क्लीन स्वीप
कर्नाटक की चार विधान परिषद सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इन सीटों पर शिक्षकों और स्नातकों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
मतगणना के बाद भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की।
भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, पश्चिम स्नातक और दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की।
वहीं, जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस को हराया।
इस चुनाव में कांग्रेस ने चारों सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी।
चुनाव को भाजपा और जेडीएस के बीच तालमेल की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा था। नतीजों ने इन चार निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन की चुनावी रणनीति को सफल साबित किया है।
भाजपा ने लिखा- 'डीके, हो गया भाई!'
चुनाव परिणाम आने के बाद कर्नाटक भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की।
इस पोस्ट में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को निशाना बनाते हुए लिखा गया कि NDA ने चारों शिक्षक और स्नातक सीटों पर जीत हासिल कर ली है।
पोस्ट में इस्तेमाल किया गया 'हो गया भाई' वाक्य सोशल मीडिया पर चल रहे एक लोकप्रिय ट्रेंड की तर्ज पर था।
भाजपा ने मुख्यमंत्री की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें उनके सिर पर गेंदे के फूल दिखाई दे रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह तस्वीर फरवरी 2023 की है, जब शिवकुमार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के बजट के विरोध में विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया था।
पुरानी तस्वीर का उपयोग करते हुए भाजपा ने चुनावी हार पर कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की कोशिश की।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर कांग्रेस के दिग्गज की हार
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम की रही।
यहां जेडीएस के उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पांच बार विधान परिषद सदस्य रह चुके पुत्तन्ना को हराया।
रंगनाथ को 10,810 प्रथम वरीयता मत मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार पुत्तन्ना को 9,902 वोट प्राप्त हुए।
इस तरह जेडीएस उम्मीदवार ने 908 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
यह सीट पहले कांग्रेस के पास थी।
रंगनाथ को इससे पहले 2022 और 2024 में पुत्तन्ना के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।
इस बार उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस का कब्जा सुनिश्चित किया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया था। इसलिए यह हार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर शशिल नमोशी की जीत
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के अनुभवी नेता शशिल जी. नमोशी ने जीत दर्ज की।
उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मट्टूर को 3,297 वोटों से पराजित किया।
नमोशी को 15,596 प्रथम वरीयता मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 12,299 वोट मिले।
इस जीत के साथ नमोशी ने पांचवीं बार चुनाव जीतने की उपलब्धि हासिल की।
इस निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना कलबुर्गी में हुई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मतदान में लगभग 30,253 मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। इनमें से 28,380 मत वैध पाए गए, जबकि 1,873 मत खारिज हुए।
इस जीत को उत्तर कर्नाटक में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी कांग्रेस को झटका
शिक्षक सीटों के साथ-साथ दोनों स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी भाजपा ने जीत दर्ज की।
पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार एसवी संकनूर ने कांग्रेस के मोहन लिंबिकाई को हराया।
संकनूर ने लगातार तीसरी बार इस सीट पर जीत हासिल की।
वहीं, दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के केएम सुरेश ने जीत दर्ज की।
इन दोनों सीटों के परिणामों ने NDA की 4-0 की जीत सुनिश्चित की।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य विधानसभा चुनावों की तरह सभी वयस्क नागरिक मतदान नहीं करते। यहां निर्धारित योग्यता और पंजीकरण की शर्तें पूरी करने वाले मतदाता ही वोट डाल सकते हैं।
इसलिए इन परिणामों को विशेष मतदाता समूहों की राजनीतिक पसंद के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
चुनाव परिणाम के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
भाजपा नेता अशोक गौड़ा ने कहा कि इन परिणामों से कांग्रेस सरकार के प्रति मतदाताओं की नाराजगी सामने आई है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा-जेडीएस गठबंधन की जीत ने कांग्रेस की ओर से बनाए गए राजनीतिक दावों की पोल खोल दी है।
गौड़ा ने कहा कि सरकार की नीतियों और प्रशासन से जनता संतुष्ट नहीं है।
हालांकि, यह भाजपा का राजनीतिक आकलन है। चार विशेष निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम पूरे राज्य के मतदाताओं की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
भाजपा नेताओं ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भी इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद जताई है।
एचडी कुमारस्वामी ने 2028 के लिए बताया सकारात्मक संकेत
जेडीएस नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी गठबंधन की जीत पर खुशी जताई।
उन्होंने इस परिणाम को भाजपा और जेडीएस की एकजुटता की सफलता बताया।
कुमारस्वामी के अनुसार, शिक्षकों और स्नातकों ने गठबंधन के उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
उन्होंने इस परिणाम को वर्ष 2028 में होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव की दृष्टि से सकारात्मक संकेत बताया।
गठबंधन नेताओं का मानना है कि दोनों दलों के समर्थकों ने एक-दूसरे के उम्मीदवारों को समर्थन दिया।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि भाजपा-जेडीएस गठबंधन आगामी चुनावों में अपनी संयुक्त रणनीति को और मजबूत करने का प्रयास कर सकता है।
कांग्रेस ने कहा- हार से सीखेंगे, लेकिन यह सरकार का जनादेश नहीं
दूसरी ओर कांग्रेस ने चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए भाजपा के दावों पर सवाल उठाए हैं।
कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक फैसले का सम्मान करती है और चुनावी हार से सीख लेगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन परिणामों को राज्य सरकार के कामकाज के खिलाफ व्यापक जनादेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता आधार सीमित और विशिष्ट होता है।
विधानसभा चुनाव में प्रदेश के सभी पात्र मतदाता हिस्सा लेते हैं, जबकि विधान परिषद की इन सीटों पर केवल पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदान करते हैं।
इसी आधार पर कांग्रेस ने भाजपा के राजनीतिक निष्कर्षों को चुनौती दी है।
विधान परिषद में कांग्रेस की स्थिति पर कितना असर?
चारों सीटों पर हार कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका जरूर है, लेकिन इससे राज्य सरकार की स्थिरता पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है।
कर्नाटक विधान परिषद में कुल 75 सदस्य होते हैं।
ताजा चुनाव से पहले चार सीटों में से तीन भाजपा के पास और एक कांग्रेस के पास थी।
अब भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने कांग्रेस की एक सीट भी अपने खाते में कर ली है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, परिणाम के बाद भी विधान परिषद में कांग्रेस के 38 सदस्य हैं।
इसलिए चुनावी हार के बावजूद उच्च सदन में कांग्रेस की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।
2028 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
कर्नाटक में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2028 में होना है।
ऐसे में विधान परिषद चुनाव के परिणाम को आगामी राजनीतिक मुकाबले से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा और जेडीएस इसे कांग्रेस के खिलाफ बढ़ते समर्थन का संकेत बता रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सीमित मतदाता वर्ग वाले चुनाव के नतीजों से पूरे प्रदेश की राजनीतिक स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के सामने अब संगठन को मजबूत करने और शिक्षक तथा स्नातक वर्ग के बीच समर्थन वापस हासिल करने की चुनौती होगी।
फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में NDA की 4-0 की जीत और भाजपा का 'डीके, हो गया भाई' वाला तंज सबसे ज्यादा चर्चा में है।