श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को श्रीनगर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इससे निपटने के लिए केंद्रित, समन्वित और मानवीय कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित विभागों और श्रीनगर नगर निगम (SMC) को निर्देश दिया कि इस समस्या को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाए और केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने यह निर्देश आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर आयोजित एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। बैठक में समस्या की मौजूदा स्थिति, नागरिकों की सुरक्षा और इससे निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की गई।

नागरिकों की सुरक्षा बड़ी चिंता

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या श्रीनगर के लोगों के लिए बड़ी चिंताओं में शामिल हो गई है। इसका असर लोगों के रोजमर्रा के जीवन के साथ-साथ उनकी सुरक्षा की भावना पर भी पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि समस्या को केवल आंकड़ों या शिकायतों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके प्रभाव को आम लोगों के नजरिए से समझने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे उपाय तैयार करने के निर्देश दिए, जिनसे नागरिकों को राहत मिल सके और समस्या का दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में अलग-अलग विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों में बेहतर तालमेल होना जरूरी है। नगर निकाय और अन्य संबंधित एजेंसियों को एक साझा रणनीति के तहत काम करना चाहिए।

दो साल में दो लाख से अधिक डॉग बाइट के मामले

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में पिछले दो वर्षों के दौरान कुत्तों के काटने के दो लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े समस्या की गंभीरता को रेखांकित करते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, जम्मू जिले में कुत्तों के काटने के लगभग 40 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए हैं। इसके मुकाबले श्रीनगर जिले में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत है।

हालांकि श्रीनगर में आंकड़ा जम्मू जिले की तुलना में कम है, लेकिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। श्रीनगर एक घनी आबादी वाला प्रमुख शहर है और यहां बड़ी संख्या में लोग रोजाना सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल करते हैं।

ऐसे में आवारा कुत्तों की मौजूदगी और उनके हमले लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकते हैं।

मानवीय तरीके से समाधान पर जोर

मुख्यमंत्री ने समस्या से निपटने के लिए मानवीय प्रतिक्रिया अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। इसका मतलब है कि आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के साथ-साथ पशु कल्याण से जुड़े मानकों का भी ध्यान रखा जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समाधान ऐसा होना चाहिए जो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ पशुओं के प्रति संवेदनशीलता को भी बनाए रखे। इसके लिए वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से काम करने की आवश्यकता है।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि समस्या का समाधान केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। इसके लिए नगर निगम, संबंधित प्रशासनिक विभागों और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

SMC को दी गई अहम जिम्मेदारी

श्रीनगर नगर निगम को इस मामले में प्रमुख भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने निगम और संबंधित विभागों से कहा कि वे समस्या की पहचान कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाएं।

शहर में जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या अधिक है या जहां लोगों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, वहां विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।

साथ ही, अधिकारियों को समस्या के समाधान की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की नियमित समीक्षा करने और उनके परिणामों का आकलन करने पर भी जोर दिया गया।

सिर्फ अभियान नहीं, स्थायी समाधान जरूरी

आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए लंबे समय से अलग-अलग स्तर पर अभियान चलाए जाते रहे हैं, लेकिन कई शहरों में समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थायी और प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों से संकेत मिलता है कि प्रशासन अब इस मुद्दे को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से देखने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत समस्या के कारणों की पहचान करने से लेकर आबादी नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा तक विभिन्न पहलुओं पर एक साथ काम करने की जरूरत होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने के पीछे खुले में कचरा और भोजन की उपलब्धता जैसे कारण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए केवल कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के बजाय शहर की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी होगा।

आम लोगों की सुरक्षा पर फोकस

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्रवाई का अंतिम उद्देश्य श्रीनगर के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने घरों, सड़कों, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस होना चाहिए।

खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पैदल चलने वाले लोगों के लिए आवारा कुत्तों के झुंड चिंता का कारण बन सकते हैं। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने की आवश्यकता है।

शिकायतों और आंकड़ों की निगरानी जरूरी

सरकार की ओर से समस्या के समाधान के लिए शिकायतों और डॉग बाइट के आंकड़ों की लगातार निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किन क्षेत्रों में समस्या ज्यादा गंभीर है और किन उपायों का प्रभाव दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित एजेंसियों को परिणाम आधारित तरीके से काम करने का संदेश दिया है। यानी योजनाओं और बैठकों के बजाय नागरिकों को वास्तविक राहत मिलना इस पूरी कवायद का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।

फिलहाल जम्मू-कश्मीर में पिछले दो वर्षों में सामने आए दो लाख से अधिक डॉग बाइट के मामले प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की समीक्षा बैठक के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि श्रीनगर नगर निगम और संबंधित विभाग इस समस्या से निपटने के लिए किस तरह की संयुक्त रणनीति लागू करते हैं और उसका असर जमीन पर कितना दिखाई देता है।

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