श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की विदेश नीति की खुलकर तारीफ की है। दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के बाद उमर अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकी हमले की संयुक्त घोषणा में निंदा को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया। खास बात यह है कि उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा रही है और कांग्रेस लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाती रही है। ऐसे में उमर का बयान राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है।
उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि BRICS में ऐसे कई देश मौजूद थे जिनके पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध हैं। इसके बावजूद पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा को संयुक्त घोषणा में शामिल कराना आसान नहीं था। उन्होंने इसे केंद्र सरकार और भारत की कूटनीति की उपलब्धि के तौर पर देखा।
उमर के मुताबिक इस सफलता का श्रेय जहां बनता है, वहां दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि अगर सरकार कोई अच्छा काम करती है तो उसकी तारीफ करने में हिचक नहीं होनी चाहिए।
BRICS घोषणा में पहलगाम का जिक्र
दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर संयुक्त घोषणा जारी की। इसमें आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया और पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई।
भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि BRICS में चीन सहित ऐसे देश भी शामिल हैं जिनके पाकिस्तान के साथ मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं।
ऐसे मंच पर भारत से जुड़े आतंकी हमले को लेकर सर्वसम्मति बनाना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया।
भाजपा ने भी BRICS घोषणा में पहलगाम हमले की निंदा को मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है।
उमर बोले- कमरे में पाकिस्तान के कितने दोस्त थे, यह देखिए
उमर अब्दुल्ला ने इसी पहलू को अपने बयान में प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि यह देखना चाहिए कि उस कमरे में पाकिस्तान के कितने सहयोगी और मित्र देश मौजूद थे। इसके बावजूद भारत पहलगाम हमले की निंदा को संयुक्त घोषणा में शामिल कराने में सफल रहा।
उमर का तर्क था कि अगर इतने अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मुद्दे पर सहमत किया गया है तो इसे भारत की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
उनका बयान सीधे तौर पर मोदी सरकार की पूरी विदेश नीति का समर्थन नहीं था, बल्कि BRICS में पहलगाम हमले पर हासिल हुई सहमति की तारीफ थी।
यही फर्क राजनीतिक खबर में महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस उठा रही थी BRICS पर सवाल
दूसरी तरफ कांग्रेस ने BRICS सम्मेलन और मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार से चार सवाल पूछे थे।
कांग्रेस ने पूर्वी लद्दाख की स्थिति, भारत-चीन सीमा, अरुणाचल प्रदेश, चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे और पाकिस्तान के प्रति चीन के रुख जैसे मुद्दों को उठाया।
पार्टी ने मोदी सरकार के चीन के प्रति दृष्टिकोण को लेकर तीखी आलोचना करते हुए 'calibrated capitulation' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
इसलिए यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि कांग्रेस **BRICS में पहलगाम हमले की निंदा का विरोध नहीं कर रही**, बल्कि मोदी सरकार की व्यापक चीन और विदेश नीति के दूसरे पहलुओं पर सवाल उठा रही है।
कांग्रेस और भाजपा में हुई थी जुबानी जंग
BRICS घोषणा के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई।
भाजपा नेताओं ने संयुक्त घोषणा को भारत की कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कांग्रेस ने दूसरी तरफ सरकार से पूछा कि चीन के साथ संबंधों में भारत को वास्तविक रूप से क्या हासिल हुआ और सीमा तथा व्यापार से जुड़े मुद्दों पर क्या प्रगति हुई।
यानी दोनों दल BRICS को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की सफलता बता रही है, जबकि कांग्रेस ठोस नतीजों और चीन से जुड़े अनसुलझे सवालों पर जोर दे रही है।
इसी माहौल में उमर अब्दुल्ला का केंद्र की उपलब्धि की तारीफ करना खास हो जाता है।
उमर ने कहा- जहां क्रेडिट बनता है वहां देना चाहिए
उमर अब्दुल्ला का रुख यह रहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय हित से जुड़े किसी सकारात्मक परिणाम को स्वीकार करने में समस्या नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि केंद्र सरकार के साथ उनके कई मुद्दों पर मतभेद हैं। जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली से लेकर दूसरे राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों तक उनकी पार्टी केंद्र से अलग रुख रखती है।
इसके बावजूद विदेश नीति में अगर कोई सकारात्मक परिणाम हासिल हुआ है तो उसकी तारीफ की जा सकती है।
इस बयान ने उमर को विपक्ष के उन नेताओं से अलग स्थिति में खड़ा कर दिया जो BRICS सम्मेलन के बाद केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहे।
INDIA गठबंधन में है नेशनल कॉन्फ्रेंस
उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस विपक्षी INDIA गठबंधन के साथ रही है। जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव भी लड़े हैं।
इसी वजह से केंद्र सरकार की विदेश नीति की उमर की तारीफ राजनीतिक रूप से ज्यादा ध्यान खींच रही है।
हालांकि इसे INDIA गठबंधन से दूरी या भाजपा के करीब जाने के संकेत के तौर पर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।
उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी कई घरेलू राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ हैं। खासकर जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उनके राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख है।
इसलिए BRICS पर तारीफ को एक विशेष मुद्दे पर समर्थन के रूप में देखना ज्यादा सटीक है।
पहले भी केंद्र के फैसलों की तारीफ कर चुके उमर
उमर अब्दुल्ला का यह पहला बयान नहीं है जब उन्होंने केंद्र सरकार के किसी कदम की सार्वजनिक रूप से सराहना की हो।
मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कई मौकों पर यह संकेत दिया है कि केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विकास और जनहित से जुड़े मामलों में सहयोग जरूरी है।
उनका कहना रहा है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों को आगे बढ़ाना है।
इसी व्यावहारिक राजनीतिक दृष्टिकोण की झलक BRICS से जुड़े बयान में भी दिखाई देती है।
पहलगाम हमला क्यों बना बड़ा कूटनीतिक मुद्दा
पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भारत के लिए केवल आंतरिक सुरक्षा का मामला नहीं रहा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को लगातार उठाया।
ऐसे में BRICS जैसे मंच की संयुक्त घोषणा में पहलगाम हमले का स्पष्ट उल्लेख भारत के लिए महत्वपूर्ण था।
BRICS में चीन, रूस, ईरान, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत अलग-अलग विदेश नीति वाले देश शामिल हैं। विस्तारित समूह में कई ऐसे देश भी हैं जिनके पाकिस्तान के साथ राजनयिक और आर्थिक रिश्ते हैं।
सभी सदस्यों की सहमति से संयुक्त घोषणा तैयार होती है। इसलिए किसी खास घटना की निंदा को अंतिम दस्तावेज में शामिल कराने के लिए व्यापक सहमति जरूरी होती है।
उमर अब्दुल्ला ने इसी तथ्य की तरफ ध्यान दिलाया।
चीन की मौजूदगी ने बढ़ाया महत्व
इस घोषणा का एक महत्वपूर्ण पहलू चीन भी है।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। दूसरी तरफ चीन पाकिस्तान का करीबी रणनीतिक साझेदार है।
इसके बावजूद BRICS घोषणा में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा पर सहमति बनना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से उपयोगी परिणाम माना गया।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत और चीन के बीच सीमा, व्यापार या पाकिस्तान से जुड़े सभी मतभेद समाप्त हो गए हैं।
कांग्रेस भी इसी अंतर को रेखांकित कर रही है। पार्टी का कहना है कि एक संयुक्त घोषणा से आगे बढ़कर सरकार को सीमा और व्यापार जैसे मूल मुद्दों पर भी जवाब देना चाहिए।
क्या INDIA गठबंधन में अलग-अलग सुर?
उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विदेश नीति को लेकर INDIA गठबंधन में अलग-अलग राय है।
वास्तव में विपक्षी गठबंधन में शामिल दल हर मुद्दे पर एक जैसी राय रखें, यह जरूरी नहीं है। विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलों में क्षेत्रीय दल कई बार केंद्र सरकार के किसी विशेष फैसले का समर्थन करते रहे हैं।
उमर का मौजूदा बयान भी उसी तरह देखा जा सकता है।
उन्होंने कांग्रेस की आलोचना नहीं की और न ही भाजपा की पूरी विदेश नीति का समर्थन किया। उन्होंने खास तौर पर BRICS में पहलगाम हमले की निंदा कराने की कूटनीतिक सफलता की प्रशंसा की।
इसलिए इसे INDIA गठबंधन में टूट या बड़े मतभेद का प्रमाण कहना फिलहाल अतिशयोक्ति होगी।
राष्ट्रीय हित पर राजनीति से अलग रुख
उमर अब्दुल्ला के बयान का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि विपक्ष में रहते हुए भी सरकार की किसी उपलब्धि की तारीफ की जा सकती है।
उनका मानना है कि पहलगाम आतंकी हमले की निंदा पर BRICS देशों को एक साथ लाना आसान नहीं था, खासकर तब जब मंच पर पाकिस्तान के कई करीबी देश मौजूद थे।
यही वजह है कि उन्होंने केंद्र सरकार को इस उपलब्धि का श्रेय दिया।
दूसरी ओर कांग्रेस सीमा, चीन और व्यापार जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रही है। दोनों बातें एक साथ मौजूद हो सकती हैं—BRICS घोषणा में भारत की कूटनीतिक उपलब्धि को स्वीकार करना और व्यापक विदेश नीति के दूसरे पहलुओं पर सवाल उठाना।
फिलहाल उमर अब्दुल्ला के बयान ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि **मोदी सरकार के राजनीतिक विरोधी होने के बावजूद वह विदेश नीति में किसी उपलब्धि की तारीफ करने से पीछे नहीं हटेंगे।**
पहलगाम हमले की BRICS घोषणा में निंदा को लेकर उनका कहना इसी दिशा में है। ऐसे समय में जब भाजपा और कांग्रेस BRICS के नतीजों को लेकर आमने-सामने हैं, INDIA गठबंधन से जुड़े मुख्यमंत्री का केंद्र सरकार को श्रेय देना राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का नया मुद्दा बन गया है।