श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि शीर्ष अदालत ने इस मामले पर ध्यान दिया है। अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट मामले में लगाए गए आरोपों की पड़ताल करेगा और यदि कोई गलती हुई है तो उस पर गौर किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR से जुड़े कुछ फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित कई अहम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के अन्य दो सदस्यों की सहमति के बिना कथित तौर पर एकतरफा तरीके से लिए। अदालत ने फिलहाल इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मुझे सच में खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ध्यान दिया है। हमें उम्मीद है कि वह इस मामले को देखेगा और उनके द्वारा की गई गलतियों पर गौर करेगा।” उनका बयान ऐसे समय सामने आया है जब SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल रहे। अदालत ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के SIR से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय चुनाव आयोग के भीतर आवश्यक सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए। रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाओं में करीब 14 फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लिए गए इन फैसलों पर चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों की आपत्तियां थीं। हालांकि इन दावों की न्यायिक जांच अभी जारी है और सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इन्हें साबित तथ्य नहीं माना है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने की अंतरिम मांग भी की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर ऐसा आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इस तरह का अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके बजाय कोर्ट ने संबंधित पक्षों का जवाब और आधिकारिक रिकॉर्ड देखने का फैसला किया है।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि संवैधानिक संस्थाओं का कामकाज कानून के अनुरूप होना चाहिए। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड देखने के बाद कोई फैसला कानून के खिलाफ पाया जाता है तो उस पर उचित न्यायिक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयोग के किसी फैसले को अदालत ने अंतिम रूप से अवैध घोषित नहीं किया है।
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों और पात्रता से संबंधित विवरण की जांच की जाती है। मौजूदा विवाद इस प्रक्रिया के दौरान लिए गए कुछ निर्णयों और चुनाव आयोग के भीतर उन्हें मंजूरी दिए जाने की प्रक्रिया से जुड़ा है।
मामले में Form 6 से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान संशोधित Form 6 को लेकर सवाल उठे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी थी। अब अदालत संबंधित रिकॉर्ड देखकर यह समझना चाहती है कि बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किए गए।
फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को सुनवाई के लिए लेने और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने पर केंद्रित रही। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत मामले की गहराई से पड़ताल करेगी। इससे पहले भी विपक्ष के कई नेता SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुके हैं।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी करना आरोपों की पुष्टि या किसी पक्ष को दोषी ठहराना नहीं है। अदालत ने अभी संबंधित पक्षों से जवाब और रिकॉर्ड मांगे हैं। इन दस्तावेजों की जांच और पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही विवादित फैसलों की वैधानिकता पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ तत्काल अंतरिम कार्रवाई की मांग स्वीकार नहीं की है।
फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस में एक और प्रतिक्रिया जुड़ गई है। अब इस मामले में चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब पर नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई के दौरान आधिकारिक रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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