अवैध धान भंडारण का भंडाफोड़, गोदाम से 960 बोरा धान और पीडीएस चावल जब्त
छग
Surajpur. सूरजपुर। कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध धान भंडारण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। तहसील रामानुजनगर के ग्राम कैलाशपुर में किराना व्यापारी कन्हैया लाल साहू के गोदाम का निरीक्षण किया गया, जहां जांच के दौरान 960 बोरा खरीफ धान और 17 बोरा पीडीएस चावल अवैध रूप से भंडारित पाए गए। सूचना मिलने के बाद मौके पर राजस्व और खाद्य विभाग की टीम ने तुरंत छापा मारा और पूरे भंडारण को जब्त कर लिया। गोदाम में धान और चावल की इतनी बड़ी मात्रा होने से यह स्पष्ट हो गया कि व्यापारी ने मंडी अधिनियम का उल्लंघन किया है। व्यापारी के खिलाफ मंडी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे अवैध भंडारण से खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी। धान खरीदी को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए राज्य सरकार ने संविदा कर्मियों के अवकाश पर भी रोक लगा दी है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक चलने वाली खरीदी अवधि में संविदा कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं दिया जाएगा।
आदेश में कहा गया है कि धान खरीदी एक संवेदनशील और प्राथमिकता वाला कार्य है, इसलिए इस दौरान किसी भी कर्मचारी को कार्य से इंकार करने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम, 1979 की धारा 4(1) के तहत जारी किया गया है। बीजापुर जिला प्रशासन ने भी कड़ाई से निर्देश दिया है कि सभी खरीदी केंद्रों में कर्मचारी समय पर उपलब्ध रहें और किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। अधिकारियों ने यह भी कहा कि धान खरीदी के दौरान अवकाश पर रोक और संविदा कर्मचारियों की पूरी तैनाती सुनिश्चित करना किसानों के हित और राज्य की धान वितरण प्रणाली की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। खरीदी अवधि में अवैध धान भंडारण और वितरण प्रणाली में गड़बड़ी होने से किसानों की मेहनत बेकार हो सकती है। इसी कारण सरकार ने अवैध धान भंडारण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई और आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में कार्य कर रही है और खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी और कर्तव्य भावना को भी इस दौरान बढ़ाया गया है। राजस्व एवं खाद्य विभाग की यह कार्रवाई और संविदा कर्मचारियों की अवकाश पर रोक सुनिश्चित करेगी कि धान खरीदी प्रक्रिया निर्बाध रूप से चले और किसानों को उनके मेहनत का उचित भुगतान समय पर मिले।