CG BREAKING: खैर लकड़ी तस्करी में बड़ा खुलासा, 120 करोड़ के नेटवर्क का दावा
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Mahasamund. महासमुंद। खैर लकड़ी की कथित तस्करी के मामले की जांच में महासमुंद पुलिस ने बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के कथित सिंडिकेट ने पिछले दो वर्षों के दौरान ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की अवैध तस्करी की। इस कारोबार को कागजों में वैध दिखाने के लिए 8 शेल कंपनियों और रकम के लेनदेन व लेयरिंग के लिए 10 से अधिक म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने का दावा है। मामले में फर्जी इनवॉइस उपलब्ध कराने के आरोप में ओडिशा के दो फर्म संचालकों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में पीयूष इंटरप्राइजेज के संचालक पारितोष मिश्रा (47) और सिंघल इंटरप्राइजेज संबलपुर के संचालक अखिलेश सिंघल (52) शामिल हैं। दोनों को 14 सितंबर को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। इस पूरे मामले की शुरुआत 23 हजार 350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन की जांच से हुई। वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा की ओर से दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया था कि खैर लकड़ी के परिवहन के लिए इस्तेमाल एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना कर उसे असली दस्तावेज के रूप में उपयोग किया गया। इससे शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया।
शिकायत के आधार पर पिथौरा थाने में अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5) और 111 के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने मामले से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेनदेन और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए। पुलिस का दावा है कि इन्हीं कड़ियों को जोड़ने के दौरान खैर लकड़ी की कथित तस्करी का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला मिला।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल और उसके कथित सिंडिकेट ने पिछले दो साल में सुनियोजित तरीके से ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक खैर लकड़ी की तस्करी की। इसकी कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान पुलिस ने लगाया है। जांच में यह भी दावा किया गया है कि अवैध कारोबार को वैध दिखाने के लिए फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते थे। इसके लिए कुल 8 शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जा रहा था। कथित अवैध कारोबार से आने वाली रकम के भुगतान, ट्रांसफर और लेयरिंग के लिए 10 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल होने की बात भी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक फर्जी कंपनियों और इनवॉइस से संबंधित तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल की भूमिका सामने आई। आरोप है कि दोनों ओडिशा से फर्मों का संचालन करते हुए नेटवर्क को फर्जी इनवॉइस उपलब्ध करा रहे थे। इससे पहले 7 सितंबर को पुलिस ने मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने की तलाशी ली थी। पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई में 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे। अब जांच में वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है।
महासमुंद पुलिस का कहना है कि वन विभाग और संबंधित वित्तीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर कथित अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान की जा रही है। ऐसी संपत्तियों की कुर्की अथवा राजसात की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी भी दी गई है। मामले में शामिल अन्य संभावित सह-आरोपियों की तलाश जारी है। इसके साथ ही बैंक खातों, वित्तीय ट्रेल, फर्जी कंपनियों और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।