Dhamtari. धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाओं में शामिल होने को लेकर बड़ी संख्या में लोगों द्वारा प्रशासन को आवेदन दिए जाने का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि जिले में 1500 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया है। हालांकि प्रशासन ने आवेदनों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है। मामले को लेकर हिंदू और आदिवासी संगठनों ने धर्मांतरण की आशंका जताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के मुताबिक धमतरी जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों ने प्रार्थना सभा में शामिल होने को लेकर आवेदन दिए हैं। दावा है कि केवल नगरी क्षेत्र से करीब 600 आवेदन आए हैं। प्रशासन की ओर से फिलहाल इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि आवेदन प्राप्त हुए हैं और उन्हें संबंधित एसडीएम के पास भेजा जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि आवेदन आने भर से किसी तरह की अनुमति या अन्य कार्रवाई स्वतः नहीं होगी। संबंधित स्तर पर आवेदन भेजे जाने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया देखी जाएगी। ऐसे में 1500 से अधिक लोगों के आवेदन का आंकड़ा फिलहाल आधिकारिक रूप से सत्यापित संख्या नहीं माना जा सकता। मामला सामने आने के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। संगठनों का आरोप है कि इसे केवल प्रार्थना सभा में शामिल होने का सामान्य मामला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसके पीछे कथित धर्मांतरण की गतिविधियों की आशंका जताई है और प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
संगठनों की ओर से आरोप लगाया गया है कि लोगों को कथित तौर पर प्रलोभन या अन्य तरीकों से प्रभावित कर प्रार्थना सभाओं में शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी फंडिंग से जुड़ी आशंकाएं भी व्यक्त की गई हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अभी कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या प्रशासनिक पुष्टि सामने नहीं आई है। दावा किया जा रहा है कि आवेदन करने वालों में साहू और आदिवासी समाज से जुड़े लोगों की संख्या अधिक है। कुछ संगठनों ने आरोप लगाया है कि इन समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। इन दावों की भी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज से जुड़े पदाधिकारियों ने भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि गरीब आदिवासियों को कथित प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने इस विषय पर बड़ी बैठक बुलाने और प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग करने की बात कही है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रशासन को दिए गए आवेदन केवल धार्मिक प्रार्थना सभाओं में स्वेच्छा से शामिल होने से संबंधित हैं या इनके पीछे किसी तरह का दबाव, प्रलोभन अथवा धर्म परिवर्तन से जुड़ी गतिविधि है। फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम प्रशासनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। मामला धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील विषय से जुड़ा होने के कारण तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति का स्वेच्छा से धार्मिक सभा में शामिल होना और प्रलोभन, दबाव या धोखे से धर्म परिवर्तन कराना अलग-अलग विषय हैं। इसलिए प्रशासनिक जांच या आधिकारिक पुष्टि से पहले आवेदकों को धर्मांतरित व्यक्ति बताना उचित नहीं होगा।