मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म, आरोपी को मिली आजीवन कारावास की सजा

छग

Update: 2025-12-23 13:44 GMT
Pendra-Gaurela-Marwahi. पेंड्रा-गौरेला-मरवाही। पेंड्रा-गौरेला-मरवाही जिले में मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म के गंभीर मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने सुनाया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि इस तरह के जघन्य अपराधों में कठोर सजा देकर समाज को स्पष्ट संदेश देना आवश्यक है। यह मामला मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम बंशीलाल से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 24 अगस्त 2024 की रात करीब 10:30 बजे की है। आरोपी परमेश्वर उर्फ परमेश्वरदीन श्रीवास ने गांव के सरपंच चैनसिंह सरोता की दुकान के बरामदे में रह रही मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता मानसिक रूप से असंतुलित होने के कारण अपनी रक्षा करने या सहमति देने की स्थिति में नहीं थी।

अभियोजन के मुताबिक, घटना के दौरान पीड़िता के शोर मचाने पर आसपास के लोगों का ध्यान गया। ग्रामीणों ने तुरंत गांव के सरपंच के बेटे बबलू उर्फ हरवंश सरोता को सूचना दी। सूचना मिलते ही सरपंच के परिजन और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। ग्रामीणों के सामने आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया और माफी भी मांगी। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर मरवाही पुलिस ने 25 अगस्त 2024 को अपराध क्रमांक 196/2024 के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घटनास्थल का निरीक्षण किया और आरोपी के अंदरूनी कपड़े, लोअर पैंट सहित अन्य सामग्री जब्त की। इन सभी साक्ष्यों को विधिवत सील कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया गया, जिससे अभियोजन के दावे को मजबूती मिली। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गवाहों ने घटना की परिस्थितियों, आरोपी की मौजूदगी और पीड़िता की मानसिक स्थिति की पुष्टि की। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि पीड़िता मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और अपनी सहमति व्यक्त करने में सक्षम नहीं थी। इस आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी द्वारा किया गया कृत्य न केवल अपराध है, बल्कि अत्यंत अमानवीय और समाज को झकझोरने वाला है।

सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण करने के बाद अदालत ने अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध पाया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने एक कमजोर और असहाय महिला की स्थिति का फायदा उठाते हुए यह जघन्य अपराध किया है, जिसे किसी भी स्थिति में क्षम्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(c) के तहत आरोपी परमेश्वर उर्फ परमेश्वरदीन श्रीवास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है, तो आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष सभी साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों को मजबूती से रखा, जिसके आधार पर आरोपी को कठोर सजा दिलाने में सफलता मिली। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि ऐसे अपराधों पर सख्ती जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह के कृत्य को अंजाम देने से पहले सौ बार सोचे। इस फैसले के बाद क्षेत्र में न्याय को लेकर लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में कानून का डर और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीरता का संदेश भी देता है।
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