Bihar | बिहार :  पारंपरिक खेती में बीज बोकर फसल का इंतजार करने की प्रक्रिया अब धीरे-धीरे बदल रही है। बिहार के भोजपुर जिले के नया भोजपुर गांव के किसान आशुतोष पांडेय ने आधुनिक प्रो-ट्रे तकनीक को अपनाकर सब्जी उत्पादन के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। इस तकनीक के जरिए अब किसान सीधे तैयार पौधों को खेतों में लगा रहे हैं, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आ रही है।
गौरव सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, इस आधुनिक नर्सरी तकनीक में बीज को पहले प्रो-ट्रे में लगाया जाता है, जहां नारियल के बुरादे
(कोकोपीट)
और जैविक खाद की मदद से पौधों को विकसित किया जाता है। लगभग 21 दिनों के भीतर मजबूत और वायरस-मुक्त पौधे तैयार हो जाते हैं, जिन्हें सीधे खेतों में रोप दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में शिमला मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी सब्जियों के पौधे सामान्य खेती की तुलना में काफी जल्दी तैयार हो जाते हैं। वहीं खीरा और करेला जैसे पौधे भी मात्र तीन सप्ताह में खेतों में लगाने लायक हो जाते हैं। इससे फसल चक्र में लगभग एक महीने की बचत होती है, जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है।
प्रो-ट्रे तकनीक की एक खासियत यह भी है कि पौधे पॉलीहाउस में तैयार किए जाते हैं, जिससे उन पर मौसम की मार, बाढ़ या कीटों का असर नहीं पड़ता। नियंत्रित वातावरण में तैयार होने के कारण पौधे अधिक मजबूत और स्वस्थ होते हैं, जिससे खेत में लगाने के बाद उनकी ग्रोथ तेज होती है।
किसान आशुतोष पांडेय के अनुसार, इस तकनीक से खेती की लागत लगभग आधी हो जाती है। पहले जहां सब्जी तैयार होने में करीब तीन महीने का समय लगता था, अब वही फसल लगभग दो महीने में ही उत्पादन देने लगती है। इससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि उत्पादन भी बढ़ जाता है।
इस तकनीक को अपनाने के बाद किसानों में भी जागरूकता बढ़ रही है और कई किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक नर्सरी विधि की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो खेती की उत्पादकता में बड़ा सुधार देखा जा सकता है।
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