जमुई सिंचाई प्रमंडल में परिचारी ने कार्यपालक अभियंता पर लगाया भेदभाव का आरोप
जमुई। जमुई सिंचाई प्रमंडल कार्यालय में कार्यरत एक परिचारी ने अपने ही विभाग के कार्यपालक अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिचारी गजेंद्र कुमार चौबे का आरोप है कि कार्यालय में कर्मचारियों के साथ काम के आवंटन में भेदभाव किया जा रहा है। उनका कहना है कि कार्यालय में सात परिचारी कार्यरत हैं, लेकिन अन्य परिचारियों से कार्यालय से जुड़े विभिन्न कार्य लिए जाते हैं, जबकि उनसे मुख्य रूप से घास उखड़वाने और साफ-सफाई जैसे काम कराए जाते हैं।
गजेंद्र कुमार चौबे ने आरोप लगाया है कि उनके साथ इस तरह का व्यवहार उनकी जातिगत पहचान के कारण किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वह सवर्ण समुदाय से आते हैं और इसी वजह से उन्हें कथित तौर पर अलग तरह के काम दिए जा रहे हैं। इस मामले से संबंधित एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
काम के बंटवारे को लेकर उठाया सवाल
परिचारी गजेंद्र कुमार चौबे के अनुसार, जमुई सिंचाई प्रमंडल कार्यालय में कुल सात परिचारी कार्यरत हैं। उनका आरोप है कि अन्य कर्मियों से कार्यालय के नियमित और विभागीय काम लिए जाते हैं, जबकि उन्हें ऐसे कार्य सौंपे जाते हैं, जिन्हें वह अपने पद और कार्य की प्रकृति के संदर्भ में अलग मानते हैं।
उन्होंने दावा किया कि उनसे कार्यालय परिसर में घास उखड़वाने, साफ-सफाई कराने समेत अन्य काम कराए जाते हैं। इसी को लेकर उन्होंने विभागीय स्तर पर अपनी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सभी कर्मचारियों के साथ काम के आवंटन में समान व्यवहार होना चाहिए।
जातिगत भेदभाव का लगाया आरोप
गजेंद्र कुमार चौबे ने आरोप लगाया है कि उनके साथ किए जा रहे व्यवहार के पीछे उनकी जातिगत पहचान को कारण बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वह सवर्ण वर्ग से आते हैं और इसी कारण उन्हें अन्य परिचारियों की तुलना में अलग तरह के कार्य सौंपे जा रहे हैं।
हालांकि, यह परिचारी का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण संबंधित विभागीय जांच या सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के बाद ही हो सकेगा। मामले में कार्यपालक अभियंता या विभाग की ओर से विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
मामले से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर परिचारी अपनी शिकायत और कार्यस्थल पर अपने साथ हो रहे व्यवहार के बारे में बात करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।
हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया, इसकी भी स्वतंत्र जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में वीडियो में किए गए दावों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
विभागीय स्तर पर जांच की जरूरत
मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं। यदि किसी सरकारी कार्यालय में कर्मचारियों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव किए जाने का आरोप सामने आता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। इसी तरह यदि काम के आवंटन को लेकर कर्मचारी की शिकायत है, तो विभागीय अधिकारियों को दोनों पक्षों को सुनकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जांच के दौरान कार्यालय में कार्यरत सभी परिचारियों के कार्यों का विवरण, उन्हें दिए गए निर्देश और ड्यूटी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग कर्मचारियों को किस तरह के कार्य सौंपे जाते हैं और क्या काम के बंटवारे में किसी तरह की असमानता है।
शिकायत के बाद बढ़ी चर्चा
परिचारी की ओर से लगाए गए आरोप और उससे संबंधित वीडियो सामने आने के बाद कार्यालय के कामकाज को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कर्मचारियों के बीच काम के बंटवारे और कार्यस्थल के माहौल को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सरकारी कार्यालयों में पद के अनुरूप कार्य और कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में किसी कर्मचारी की ओर से भेदभाव का आरोप लगाए जाने पर विभाग के स्तर से स्थिति स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि परिचारी गजेंद्र कुमार चौबे की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित सामग्री है, जिसकी स्वतंत्र सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है।
इसलिए कार्यपालक अभियंता पर लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित अधिकारी या विभाग की ओर से यदि इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच रिपोर्ट सामने आती है, तो उससे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई
मामले में अब निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि परिचारी की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज की जाती है, तो सक्षम अधिकारी दोनों पक्षों से जानकारी लेकर मामले की जांच कर सकते हैं। जांच में कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के बयान और ड्यूटी से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल जमुई सिंचाई प्रमंडल कार्यालय में परिचारी की शिकायत ने काम के बंटवारे और कथित जातिगत भेदभाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो के बाद मामला सार्वजनिक चर्चा में आया है, लेकिन आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों का स्पष्ट पक्ष सामने आना जरूरी है।