मौसम बदलते ही बीमारी का कहर, GMCH के मेडिसिन वार्ड में मरीजों की भरमार

Update: 2026-07-20 11:34 GMT

बिहार: बेतिया में बारिश के बाद बढ़ी उमस और मौसम में आए बदलाव का असर लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। लगातार बारिश के बाद अब वायरल संक्रमण, त्वचा रोग और आंखों से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल (GMCH), बेतिया की ओपीडी और आईपीडी सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में कुल 1,842 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जिसके बाद अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई।

मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण GMCH का मेडिसिन वार्ड पूरी तरह भर चुका है। स्थिति यह है कि नए मरीजों को जरूरत के अनुसार दूसरे वार्डों में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे ज्यादा दबाव मेडिसिन, चर्म रोग और नेत्र रोग विभाग पर देखने को मिल रहा है।

बारिश के बाद वातावरण में नमी और उमस बढ़ने से संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले अधिकतर मरीज बुखार, सर्दी-जुकाम, कमजोरी, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, आंखों में जलन और आंखों से पानी आने जैसी समस्याओं से परेशान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मानसून के दौरान तापमान और नमी में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

GMCH के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को मेडिसिन विभाग में सबसे ज्यादा 650 मरीज पहुंचे। इसके अलावा चर्म रोग विभाग में 695 मरीजों का इलाज किया गया, जबकि नेत्र रोग विभाग में 207 मरीज पहुंचे। शिशु रोग विभाग में 105, महिला रोग विभाग में 50 और ऑर्थो विभाग में 40 मरीजों का उपचार किया गया। ईएनटी, कैंसर और अन्य विभागों में भी करीब 95 मरीज पहुंचे।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में इस समय मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। GMCH के अस्पताल प्रबंधक कुमार विशाल ने कहा कि मेडिसिन वार्ड पूरी तरह भर चुका है। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण आवश्यकता के अनुसार उन्हें दूसरे वार्डों में भर्ती कर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।

चिकित्सकों के अनुसार, मानसून के मौसम में वायरल फीवर के साथ-साथ टाइफाइड, डायरिया, डेंगू, मलेरिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बारिश के कारण कई जगह जलजमाव हो जाता है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है। इसके अलावा दूषित पानी और गंदगी भी संक्रमण फैलाने का बड़ा कारण बनते हैं।

डॉक्टरों ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि बारिश के मौसम में साफ पानी का सेवन करें, घर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। इसके अलावा ताजा और सुरक्षित भोजन करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, त्वचा पर लाल चकत्ते, आंखों में लालिमा, जलन या पानी आने जैसी समस्या हो रही है तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं लेनी चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच कराने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

GMCH अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने लोगों से अपील की है कि मौसम में बदलाव के दौरान सावधानी बरतें। उन्होंने कहा कि वर्षा के बाद उमस और जलजमाव के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोग स्वच्छता बनाए रखें और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें।

फिलहाल बेतिया में बढ़ते मरीजों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और संक्रमण के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

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