Lifestyle लाइफस्टाइल : शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन B12 बेहद जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, नसों के सही कामकाज और डीएनए बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई लोग विटामिन B12 की कमी दूर करने के लिए सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई बार जांच में B12 का स्तर कम ही दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सप्लीमेंट लेने के बाद भी शरीर में विटामिन B12 क्यों नहीं बढ़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
शरीर में B12 का अवशोषण न होना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ विटामिन B12 की गोली या कैप्सूल लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि शरीर को उसे सही तरीके से अवशोषित भी करना पड़ता है। कई लोगों में आंत या पेट से जुड़ी समस्या के कारण B12 शरीर में ठीक से नहीं पहुंच पाता। ऐसे मामलों में व्यक्ति नियमित रूप से सप्लीमेंट लेने के बाद भी कमी से जूझ सकता है।
विटामिन B12 को शरीर में पहुंचने के लिए पेट में बनने वाले एक खास प्रोटीन जिसे इंट्रिंसिक फैक्टर कहा जाता है, उसकी जरूरत होती है। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में यह प्रोटीन कम बनता है तो B12 का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल सामान्य सप्लीमेंट्स पर्याप्त असर नहीं दिखा पाते।
पेट और आंत की बीमारी से भी घट सकता है B12
डॉक्टर बताते हैं कि जिन लोगों को लंबे समय से पेट की समस्या रहती है, उनमें विटामिन B12 की कमी का खतरा ज्यादा हो सकता है। सीलिएक डिजीज, क्रोहन डिजीज जैसी आंतों की बीमारियां या पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियां शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके अलावा जिन लोगों की पेट या छोटी आंत की सर्जरी हुई होती है, उनमें भी B12 की कमी बनी रह सकती है, क्योंकि शरीर की पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना जरूरी होता है।
कुछ दवाएं भी कम कर सकती हैं B12 का स्तर
कई लोग लंबे समय तक कुछ दवाओं का सेवन करते हैं, जिनका असर विटामिन B12 के अवशोषण पर पड़ सकता है। डायबिटीज की दवा मेटफॉर्मिन और पेट में एसिड कम करने वाली कुछ दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल से कुछ लोगों में B12 की कमी देखी जा सकती है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि दवाएं बंद कर देनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी जरूरी दवा को रोकना नुकसानदायक हो सकता है। अगर लंबे समय से ऐसी दवाएं चल रही हैं तो समय-समय पर जांच करवाना बेहतर होता है।
खानपान भी हो सकता है जिम्मेदार
विटामिन B12 मुख्य रूप से मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। जो लोग पूरी तरह शाकाहारी भोजन लेते हैं, उनमें B12 की कमी होने की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में यह विटामिन प्राकृतिक रूप से बहुत कम पाया जाता है।
ऐसे लोगों के लिए डॉक्टर अक्सर B12 सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं, लेकिन अगर शरीर में अवशोषण की समस्या हो तो केवल भोजन या सामान्य सप्लीमेंट्स से पर्याप्त फायदा नहीं मिल सकता।
उम्र बढ़ने के साथ भी बढ़ता है खतरा
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में पाचन क्षमता और पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया कम हो सकती है, जिससे विटामिन B12 को अवशोषित करना मुश्किल हो जाता है। बुजुर्ग लोगों में पर्याप्त भोजन लेने के बावजूद B12 की कमी देखी जा सकती है।
विटामिन B12 की कमी के लक्षण
शरीर में B12 कम होने पर कई तरह के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें लगातार थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी, याददाश्त कमजोर होना, चक्कर आना और त्वचा का पीला पड़ना शामिल हो सकता है। लंबे समय तक कमी रहने पर नसों से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी
अगर सप्लीमेंट लेने के बाद भी विटामिन B12 का स्तर नहीं बढ़ रहा है तो केवल मात्रा बढ़ाना सही तरीका नहीं है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि पहले यह पता लगाया जाए कि कमी का असली कारण क्या है। कई मामलों में खून की जांच के साथ-साथ पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं की भी जांच करनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन B12 की कमी केवल खानपान की वजह से नहीं होती, बल्कि शरीर की अवशोषण क्षमता, दवाओं और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक कमी रहने पर खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है।