लाइफ स्टाइल: क्या आपकी भी सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले हाथ मोबाइल की तरफ जाता है? क्या आप सोने से पहले फोन को तकिए के पास रखकर सोते हैं ताकि उठते ही मैसेज, नोटिफिकेशन या सोशल मीडिया अपडेट देख सकें? अगर ऐसा है तो आप अकेले नहीं हैं। आज के समय में बड़ी संख्या में लोग अपनी सुबह की शुरुआत चाय या पानी से पहले मोबाइल स्क्रीन देखकर करते हैं। कई लोग इसे स्मार्टफोन की लत मान लेते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे सिर्फ आदत नहीं बल्कि हमारे दिमाग का एक खास व्यवहार भी काम करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब हम नींद से जागते हैं तो हमारा दिमाग दोबारा बाहरी दुनिया से जुड़ने की कोशिश करता है। नींद के दौरान हमारा संपर्क दुनिया से कम हो जाता है, इसलिए जागने के बाद दिमाग नई जानकारी हासिल करना चाहता है। यही वजह है कि कई लोग उठते ही यह जानने की कोशिश करते हैं कि रातभर में क्या नया हुआ, किसका मैसेज आया या दुनिया में कौन सी बड़ी खबर सामने आई।
दिमाग को नई जानकारी और अपडेट पाने की इच्छा होती है। यही कारण है कि मोबाइल फोन सुबह के समय सबसे आसान माध्यम बन जाता है। फोन पर मिलने वाले नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया अपडेट और नए मैसेज दिमाग को तुरंत संतुष्टि देते हैं। धीरे-धीरे यह व्यवहार एक आदत में बदल जाता है और व्यक्ति बिना सोचे-समझे हर सुबह उठते ही मोबाइल देखने लगता है।
इस आदत के पीछे "क्यू-रूटीन-रिवॉर्ड" नाम की प्रक्रिया भी काम करती है। इसमें सबसे पहले एक संकेत यानी क्यू मिलता है। जैसे ही आपकी आंख खुलती है, दिमाग को पता होता है कि अब मोबाइल चेक करने का समय है। इसके बाद आप फोन उठाकर स्क्रीन देखते हैं और सोशल मीडिया, मैसेज या नोटिफिकेशन स्क्रॉल करना शुरू कर देते हैं। जब कोई नई जानकारी मिलती है तो दिमाग को एक तरह की संतुष्टि महसूस होती है। यही संतुष्टि इस आदत को मजबूत बनाती है।
कई बार लोग सुबह उठते ही फोन इसलिए भी देखते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं कोई जरूरी खबर, काम या संदेश छूट न जाए। इसे फोमो यानी "फियर ऑफ मिसिंग आउट" भी कहा जाता है। यह भावना व्यक्ति को बार-बार फोन चेक करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
हालांकि सुबह उठते ही फोन देखना हमेशा स्मार्टफोन एडिक्शन नहीं माना जाता। अगर कोई व्यक्ति कुछ मिनटों के लिए जरूरी अपडेट देखने के बाद अपने काम में लग जाता है तो यह सामान्य व्यवहार हो सकता है। लेकिन अगर यही आदत लंबे समय तक बिना वजह स्क्रॉलिंग में बदल जाए और पढ़ाई, काम या दिनभर की उत्पादकता को प्रभावित करने लगे तो यह चिंता का विषय बन सकता है।
लगातार सुबह-सुबह मोबाइल इस्तेमाल करने से दिमाग तुरंत मिलने वाली जानकारी का आदी हो सकता है। इससे व्यक्ति को शांत बैठने, ध्यान लगाने या दिन की शुरुआत बिना डिजिटल स्क्रीन के करने में परेशानी महसूस हो सकती है। कई विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह उठने के बाद कुछ समय मोबाइल से दूरी बनाकर रखें। इसकी जगह पानी पीना, हल्का व्यायाम करना, सूरज की रोशनी लेना या दिन की योजना बनाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
मोबाइल हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि फोन का इस्तेमाल हम नियंत्रित करें, न कि फोन हमारी आदतों को नियंत्रित करे। सुबह उठते ही फोन देखने की आदत के पीछे दिमाग की जिज्ञासा और नई जानकारी पाने की इच्छा होती है, लेकिन थोड़े बदलाव करके इस आदत को संतुलित किया जा सकता है।