Health: जानिए कमर और पैरों में लगातार दर्द होना किस बीमारी का लक्षण है

Update: 2025-06-08 03:00 GMT
Health: अक्सर काम के ज्यादा बोझ या झटका लगने के कारण कमर और पैरों में दर्द होने लगता है. यदि सामान्य तौर पर भी कमर और पैरों में दर्द हो रहा है तो यह गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं. यदि कमर से दर्द शुरू होकर पैरों तक जा रहा है तो सावधान हो जाना चाहिए. क्योंकि शुरू में यह दर्द कम होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह दर्द इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि चलना और खड़े होना भी मुश्किल हो जाता है. कमर और पैरों में दर्द क्यों होता है और यह किस बीमारी के कारण है. बता रहे हैं ऑर्थोपेडिक सर्जन|
कमर में दर्द शुरू होकर कूल्हे, जांघ के पिछले हिस्से और पिंडलियों में होते हुए पैरों की एड़ियों तक जाने वाले दर्द को साइटिका का दर्द कहते हैं. साइटिका एक बीमारी है, जो रीढ़ की हड्डियों में नसों के दब जाने के कारण होती है. यह दर्द इतना तेज भी होता कि खड़ा होने तक मुश्किल हो जाता है. इस दर्द में तेज चुभन होती है. कई बार इसके इलाज के लिए सर्जरी तक भी करवानी पड़ती है. क्यों होता है साइटिका का दर्द और यह क्या है|
क्यों होता है साइटिका का दर्द:
सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अजय पंवार बताते हैं कि रीढ़ में सियाटिक नर्व होती है, जो रीढ़ से पैरों की एड़ियों तक जाती है. इस नर्व के दबने पर तेज दर्द होता है.रीढ़ की हड्डी में बहुत से कुशन काम करते हैं. कई बार रीढ़ में हर्निया होने पर नरम सामग्री उभर सकती है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है. रीढ़ की हड्डी के आसपास हड्डी का बढ़ना भी नसों को प्रभावित करता है|
कई बार रीढ़ की हड्डी का संकरा होना (स्पाइनल स्टेनोसिस) भी नस को दबा सकता है. चोट लगने औरअधिक व्यायाम करने पर भी यह नस दब जाती है. इनके अलावा गर्भावस्था, पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन, कुछ ट्यूमर या सिस्ट भी साइटिका का कारण बन सकते हैं. इसके इलाज के लिए कई बार सर्जरी तक करवानी पड़ती है|
साइटिका के लक्षण:
कमर और पीठ में दर्द, पैर और जांघ में दर्द, जो कभी-कभी घुटने के पीछे तक फैल सकता है. पैर में सुन्नता या झुनझुनी भी हो सकती है. पैर में कमजोरी और अकड़न भी हो सकती है|
यदि आपको साइटिका का दर्द महसूस हो रहा है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए. इसके साथ ही आराम करना चाहिए और डॉक्टर की बताई एक्सरसाइज करनी चाहिए. कुछ दवाएं और इंजेक्शन भी इस दर्द से कुछ समय तक आराम दिलवा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपी की मदद लेनी चाहिए. साइटिका का इलाज फिजियोथेरेपीमें है, लेकिन यदि उससे भी आराम नहीं पड़ता है तब ऑपरेशन के जरिए दबी हुई नस को निकाला जाता है|
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