लाइफ स्टाइल : गणेश चतुर्थी का त्योहार नजदीक आते ही देशभर में भगवान गणेश के स्वागत की तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजारों से लेकर घरों और गणेश पंडालों तक उत्सव का रंग दिखाई देने लगा है। हर साल की तरह इस बार भी गणपति बप्पा की प्रतिमाओं में कलाकारों की अनोखी कल्पना देखने को मिल रही है। कहीं कार में विराजमान गणपति लोगों को आकर्षित कर रहे हैं तो कहीं बाल गणेश का मनमोहक स्वरूप भक्तों का दिल जीत रहा है। अलग-अलग आकार, डिजाइन और मुद्राओं में तैयार की गई प्रतिमाओं के बीच भक्त अपनी पसंद के गणपति को घर लाने की तैयारी कर रहे हैं।
गणेश उत्सव से पहले मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में सबसे ज्यादा रौनक देखने को मिल रही है। कई महीने पहले से प्रतिमाएं बनाने में जुटे कलाकार अब उन्हें अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। किसी प्रतिमा में गणेश जी पारंपरिक सिंहासन पर बैठे दिखाई दे रहे हैं तो किसी में आधुनिक थीम का इस्तेमाल किया गया है। बाजार में छोटी प्रतिमाओं से लेकर बड़े पंडालों के लिए तैयार विशाल गणेश प्रतिमाओं तक कई विकल्प मौजूद हैं।
इस बार भक्तों के बीच अलग-अलग थीम वाली गणेश प्रतिमाओं को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। पारंपरिक गणपति के साथ ऐसे स्वरूप भी पसंद किए जा रहे हैं, जिनमें भगवान गणेश को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। इनमें कार में बैठे गणपति से लेकर बाल गणेश तक के स्वरूप शामिल हैं। कलाकारों ने रंगों और सजावट के जरिए इन प्रतिमाओं को आकर्षक बनाने की कोशिश की है।
कार वाले गणपति ने खींचा ध्यान
गणेश प्रतिमाओं के कई स्वरूपों के बीच कार में बैठे गणपति लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। भगवान गणेश को कार के साथ दिखाने वाला यह आधुनिक स्वरूप खासकर बच्चों और युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बाजार में आने वाले लोग ऐसी प्रतिमाओं को देखकर रुक रहे हैं और उनके साथ तस्वीरें भी ले रहे हैं।
मूर्तिकार हर साल नई थीम तैयार करने की कोशिश करते हैं। इसके पीछे उद्देश्य यही होता है कि पारंपरिक आस्था को बनाए रखते हुए प्रतिमाओं में कुछ नया पेश किया जाए। यही कारण है कि गणेश उत्सव के दौरान समय-समय पर अलग-अलग पेशों, वाहनों और सामाजिक संदेशों से जुड़ी थीम पर गणपति प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं।
बाल गणेश का रूप बना पसंद
दूसरी ओर बाल गणेश का स्वरूप भी भक्तों को खूब पसंद आ रहा है। मासूम चेहरे और आकर्षक मुद्रा वाली छोटी प्रतिमाओं की मांग घरों में स्थापना के लिए अधिक रहती है। कम जगह में आसानी से स्थापित की जा सकने वाली प्रतिमाओं को परिवार पसंद कर रहे हैं।
बाल गणेश के अलग-अलग रूपों में भी कलाकारों ने कई प्रयोग किए हैं। कहीं गणपति मुस्कुराते हुए नजर आते हैं तो कहीं मोदक के साथ दिखाई देते हैं। अलग-अलग रंगों और वस्त्रों के साथ तैयार ये प्रतिमाएं बाजार की खूबसूरती बढ़ा रही हैं।
गणपति बप्पा का बाल स्वरूप बच्चों को भी खास तौर पर आकर्षित करता है। परिवार के साथ बाजार पहुंचे बच्चे अक्सर छोटी और रंग-बिरंगी प्रतिमाओं को पसंद करते दिखाई देते हैं। ऐसे में मूर्तिकारों और दुकानदारों ने भी छोटे आकार की प्रतिमाओं की अच्छी-खासी रेंज तैयार की है।
पारंपरिक स्वरूप की मांग भी बरकरार
आधुनिक थीम वाली प्रतिमाओं के बीच पारंपरिक गणेश प्रतिमाओं की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। सिंहासन पर विराजमान गणपति, हाथ में मोदक लिए गणेश जी और मूषक के साथ दिखाई देने वाले पारंपरिक स्वरूप आज भी बड़ी संख्या में खरीदे जाते हैं।
कई परिवार वर्षों से एक खास शैली की प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं। ऐसे भक्त नई थीम के बजाय पारंपरिक प्रतिमा को प्राथमिकता देते हैं। वहीं सार्वजनिक गणेशोत्सव समितियां भी अपने पंडाल की थीम और सजावट के मुताबिक प्रतिमा का चयन करती हैं।
कुछ जगहों पर बड़ी प्रतिमाओं की बुकिंग पहले ही हो जाती है। इसके बाद मूर्तिकार आयोजकों की पसंद के मुताबिक आकार, मुद्रा और सजावट तैयार करते हैं। यही वजह है कि बड़ी प्रतिमाओं को तैयार करने में कई सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।
पर्यावरण के प्रति भी बढ़ रही जागरूकता
गणेशोत्सव के दौरान प्रतिमाओं के विसर्जन और पर्यावरण पर उसके प्रभाव को लेकर पिछले कुछ वर्षों में जागरूकता बढ़ी है। इसी कारण मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी प्रतिमाओं को भी लोग प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पानी में अपेक्षाकृत आसानी से घुल जाती हैं। कई कलाकार प्राकृतिक या कम हानिकारक रंगों का इस्तेमाल करने पर भी जोर दे रहे हैं। घरों में छोटी प्रतिमाओं की स्थापना करने वाले कुछ परिवार विसर्जन के लिए कृत्रिम टैंक या घर पर ही छोटे पात्र का इस्तेमाल करते हैं।
बाजार में इको-फ्रेंडली गणपति के नाम से कई प्रकार की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। भक्त प्रतिमा खरीदते समय उसकी सामग्री के बारे में भी जानकारी लेते दिखाई दे रहे हैं। इससे पता चलता है कि धार्मिक उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी लोगों की सोच बदल रही है।
बाजारों में बढ़ी रौनक
गणेश चतुर्थी केवल प्रतिमाओं तक सीमित त्योहार नहीं है। बप्पा की स्थापना के लिए पूजा सामग्री, सजावट, फूल, वस्त्र, लाइट और मिठाइयों की खरीदारी भी की जाती है। त्योहार करीब आते ही बाजारों में इन सामानों की मांग बढ़ जाती है।
दुकानों पर रंग-बिरंगी झालरें, फूलों की मालाएं और छोटी सजावटी सामग्री दिखाई देने लगी हैं। घर में गणपति की स्थापना करने वाले लोग अपने बजट और जगह के हिसाब से सजावट का सामान खरीद रहे हैं।
मोदक का भगवान गणेश से विशेष संबंध माना जाता है। इसलिए गणेश चतुर्थी के आसपास मिठाई की दुकानों पर भी अलग-अलग प्रकार के मोदक तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक मोदक के साथ चॉकलेट, ड्राई फ्रूट और अलग-अलग फ्लेवर वाले मोदक भी बाजार में दिखाई देते हैं।
पंडालों में भी तैयारी तेज
सार्वजनिक गणेशोत्सव समितियों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कहीं पंडाल का ढांचा तैयार किया जा रहा है तो कहीं सजावट अंतिम चरण में पहुंच रही है। कई समितियां हर साल अलग थीम पर पंडाल तैयार करती हैं।
बड़े गणेशोत्सव में प्रतिमा के साथ पंडाल की सजावट भी भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती है। मंदिरों, ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक विरासत की झलक देने वाले पंडाल हर साल देखने को मिलते हैं। कुछ आयोजक सामाजिक संदेशों को भी अपनी थीम में शामिल करते हैं।
गणेशोत्सव के दौरान कई स्थानों पर भजन, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके लिए समितियां पहले से कार्यक्रम तय करने और व्यवस्था संभालने में जुट जाती हैं।
भक्तों को बप्पा के आगमन का इंतजार
गणेश चतुर्थी के करीब आते ही सबसे ज्यादा उत्साह बप्पा को घर लाने को लेकर है। कई परिवार पहले ही अपनी पसंद की प्रतिमा बुक कर चुके हैं, जबकि कुछ लोग बाजार में अलग-अलग प्रतिमाएं देखकर अंतिम चयन कर रहे हैं।
किसी को पारंपरिक गणपति पसंद आ रहे हैं तो कोई नए डिजाइन की तलाश में है। किसी की पसंद कार वाले गणपति हैं तो किसी का दिल बाल गणेश के मासूम स्वरूप पर आ गया है। मूर्तिकारों की कल्पना ने इस बार भी गजानन के कई खूबसूरत और अनोखे रूप भक्तों के सामने पेश किए हैं।
गणेश चतुर्थी का उत्सव आस्था के साथ कला और रचनात्मकता का भी बड़ा संगम बन चुका है। प्रतिमा बनाने वाले कलाकार अपनी कला से भगवान गणेश को अलग-अलग स्वरूप देते हैं और भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उनमें से किसी एक रूप को अपने घर या पंडाल में स्थापित करते हैं। अब इंतजार उस पल का है जब ढोल-नगाड़ों और **‘गणपति बप्पा मोरया’** के जयकारों के बीच गजानन घर-घर विराजमान होंगे।