लाइफ स्टाइल : मेडिकल स्टोर पर बेहद कम कीमत में मिलने वाली विटामिन C की गोलियां अक्सर सोशल मीडिया पर स्किन को चमकदार बनाने, दाग-धब्बे कम करने और रंग निखारने के घरेलू तरीके के रूप में बताई जाती हैं। कई लोग रोजाना विटामिन C की टैबलेट सिर्फ इसलिए लेना शुरू कर देते हैं कि कुछ हफ्तों में चेहरा गोरा या चमकदार हो जाएगा। लेकिन क्या वास्तव में ₹20-30 में मिलने वाली विटामिन C टैबलेट त्वचा का रंग बदल सकती है? मेडिकल रिसर्च की तस्वीर सोशल मीडिया के दावों से काफी अलग है।
विटामिन C शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है। यह एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और कोलेजन बनने, घाव भरने तथा आयरन के अवशोषण जैसे कई शारीरिक कार्यों में इसकी भूमिका है। लेकिन **सिर्फ विटामिन C की गोली खाने से प्राकृतिक त्वचा का रंग गोरा हो जाएगा, इसका मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।** विटामिन C की कमी वाले व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा मिलने पर समग्र स्वास्थ्य और त्वचा की स्थिति में सुधार दिख सकता है, लेकिन इसे ‘फेयरनेस टैबलेट’ समझना गलत होगा।
आखिर विटामिन C करता क्या है?
विटामिन C यानी एस्कॉर्बिक एसिड पानी में घुलने वाला विटामिन है। शरीर इसे खुद नहीं बना सकता, इसलिए इसकी जरूरत भोजन या जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट से पूरी होती है।
यह शरीर में कोलेजन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोलेजन त्वचा समेत शरीर के कई ऊतकों का महत्वपूर्ण प्रोटीन है। विटामिन C एक एंटीऑक्सीडेंट भी है, यानी यह ऑक्सीडेटिव तनाव से कोशिकाओं की रक्षा में भूमिका निभाता है।
यही वजह है कि विटामिन C का नाम स्किन केयर में खूब सुनाई देता है। लेकिन यहां एक बड़ा अंतर समझना जरूरी है—त्वचा पर लगाया जाने वाला **टॉपिकल विटामिन C** और मुंह से खाई जाने वाली **विटामिन C टैबलेट** एक ही तरह का उपचार नहीं हैं।
क्या गोली खाने से चेहरा गोरा होता है?
सीधा जवाब है—**इस दावे के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।**
त्वचा का प्राकृतिक रंग मुख्य रूप से मेलेनिन और आनुवंशिक कारकों से निर्धारित होता है। कोई सामान्य विटामिन टैबलेट प्राकृतिक स्किन टोन को स्थायी रूप से बदल देने की गारंटी नहीं देती।
हाइपरपिग्मेंटेशन के लिए उपलब्ध ओरल यानी खाने वाली दवाओं और सप्लीमेंट पर की गई वैज्ञानिक समीक्षा में भी साधारण ओरल विटामिन C को प्रमुख प्रमाणित उपचार के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि त्वचा की पिग्मेंटेशन के लिए उपलब्ध कई ओरल उपचारों पर अध्ययन सीमित और छोटे हैं।
इसलिए कोई व्यक्ति अगर सामान्य और संतुलित आहार से पर्याप्त विटामिन C ले रहा है तो केवल गोरा होने के उद्देश्य से अतिरिक्त टैबलेट खाना जरूरी नहीं माना जा सकता।
फिर विटामिन C से ‘ब्राइटनिंग’ की बात क्यों होती है?
इसके पीछे मुख्य रूप से **टॉपिकल विटामिन C** पर मौजूद शोध है।
त्वचा पर लगाए जाने वाले विटामिन C पर हुए अध्ययनों में पिग्मेंटेशन, फोटोएजिंग और असमान स्किन टोन में कुछ सुधार पाया गया है। 2023 की एक व्यवस्थित समीक्षा में सात अध्ययनों और 139 प्रतिभागियों के आंकड़ों को देखने के बाद पाया गया कि टॉपिकल विटामिन C असमान पिग्मेंटेशन और फोटोएजिंग में मदद कर सकता है, हालांकि दिखाई देने वाले बदलाव के लिए लंबे समय तक इस्तेमाल की जरूरत हो सकती है और अधिक शोध भी जरूरी है।
यह सबूत **सीरम या क्रीम के रूप में त्वचा पर लगाए गए विटामिन C** के लिए है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मेडिकल स्टोर की सस्ती टैबलेट खाने पर भी वैसा ही असर होगा।
₹30 की टैबलेट और महंगे सप्लीमेंट में क्या फर्क?
कीमत से यह तय नहीं होता कि विटामिन C शरीर में बेहतर तरीके से काम करेगा।
NIH के अनुसार सप्लीमेंट में आमतौर पर एस्कॉर्बिक एसिड इस्तेमाल किया जाता है और इसकी जैव उपलब्धता भोजन में प्राकृतिक रूप से मौजूद एस्कॉर्बिक एसिड के समान मानी जाती है। अलग-अलग महंगे रूपों के बेहतर होने के दावों के लिए हमेशा ठोस लाभ साबित नहीं हुआ है।
इसलिए केवल पैकेट महंगा होने से कोई विटामिन C सप्लीमेंट त्वचा को ज्यादा गोरा कर देगा, ऐसा मानना सही नहीं है।
टैबलेट खरीदते समय उसकी वास्तविक मात्रा, अन्य सामग्री, गुणवत्ता और जरूरत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
कितनी विटामिन C चाहिए?
वयस्क पुरुषों के लिए विटामिन C की अनुशंसित दैनिक मात्रा लगभग **90 मिलीग्राम** और वयस्क महिलाओं के लिए लगभग **75 मिलीग्राम** है। धूम्रपान करने वालों को प्रतिदिन अतिरिक्त 35 मिलीग्राम की आवश्यकता बताई गई है।
यह मात्रा संतरा, अमरूद, आंवला, नींबू, शिमला मिर्च, टमाटर, ब्रोकली और दूसरे फल-सब्जियों वाले संतुलित आहार से प्राप्त की जा सकती है।
यानी स्वस्थ व्यक्ति को केवल त्वचा चमकाने के उद्देश्य से रोज 500 या 1000 मिलीग्राम की गोली लेना जरूरी नहीं है।
ज्यादा खाने से ज्यादा ग्लो मिलेगा?
नहीं। ‘जितनी ज्यादा विटामिन C उतना ज्यादा ग्लो’ वाला फॉर्मूला सही नहीं है।
शरीर की विटामिन C को संभालने और अवशोषित करने की क्षमता सीमित होती है। जरूरत से बहुत अधिक मात्रा लेने से अतिरिक्त लाभ सुनिश्चित नहीं होता।
वयस्कों के लिए विटामिन C की ऊपरी सहनीय सीमा **2000 मिलीग्राम प्रतिदिन** निर्धारित की गई है। इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को इतनी मात्रा लेनी चाहिए; यह अधिकतम सीमा है, रोजाना लेने की सिफारिश नहीं।
ज्यादा विटामिन C के नुकसान क्या हैं?
विटामिन C को आम तौर पर कम विषाक्तता वाला माना जाता है, लेकिन अधिक मात्रा में सप्लीमेंट लेने से नुकसान हो सकता है।
उच्च मात्रा लेने पर दस्त, मतली, पेट में मरोड़ और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में अधिक विटामिन C और किडनी स्टोन बनने के जोखिम को लेकर भी चिंता जताई गई है। आयरन ओवरलोड से जुड़ी आनुवंशिक बीमारी वाले लोगों में ज्यादा विटामिन C समस्या बढ़ा सकता है।
इसलिए ‘यह तो सिर्फ विटामिन है, जितना चाहें ले सकते हैं’ वाला नजरिया सुरक्षित नहीं है।
किडनी से जुड़ी समस्या वाले रहें ज्यादा सावधान
जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी या पथरी की समस्या रही हो, उन्हें हाई-डोज विटामिन C सप्लीमेंट अपनी मर्जी से शुरू नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए डॉक्टर से सलाह लेना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
इसी तरह कोई व्यक्ति नियमित दवाएं ले रहा है, गर्भवती है या किसी पुरानी बीमारी का इलाज चल रहा है तो सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेना बेहतर है।
दाग-धब्बों में काम आ सकता है विटामिन C?
टॉपिकल विटामिन C के लिए कुछ सकारात्मक प्रमाण जरूर हैं। अध्ययनों में UV से होने वाली पिग्मेंटेशन को सीमित करने और असमान पिग्मेंटेशन में सुधार के संकेत मिले हैं।
लेकिन मेलाज्मा, मुंहासों के बाद के काले निशान या दूसरे प्रकार के हाइपरपिग्मेंटेशन की वजह अलग-अलग हो सकती है। इसलिए हर व्यक्ति के लिए सिर्फ विटामिन C सीरम पर्याप्त होगा, यह भी सही नहीं है।
यदि चेहरे पर अचानक ज्यादा पिग्मेंटेशन हो रहा है या दाग लगातार बढ़ रहे हैं तो त्वचा विशेषज्ञ से कारण पता कराना बेहतर है।
ग्लो चाहिए तो सिर्फ टैबलेट पर निर्भर न रहें
स्वस्थ त्वचा के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, फल-सब्जियां, पर्याप्त प्रोटीन और धूप से सुरक्षा अधिक व्यावहारिक कदम हैं।
विशेष रूप से सूर्य की UV किरणें पिग्मेंटेशन और फोटोएजिंग को बढ़ा सकती हैं। इसलिए त्वचा की रंगत समान रखने की कोशिश में सनस्क्रीन और धूप से उचित बचाव की भूमिका किसी ‘ग्लो टैबलेट’ से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर विटामिन C स्किनकेयर में शामिल करना है तो त्वचा के प्रकार और समस्या के हिसाब से सही टॉपिकल फॉर्मूलेशन चुना जा सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में किसी भी सक्रिय स्किनकेयर सामग्री से जलन हो सकती है।
डॉक्टर की सलाह कब जरूरी?
अगर आपको बार-बार कमजोरी, मसूड़ों से खून आना, घाव भरने में असामान्य देरी या पोषण की कमी का संदेह है तो केवल सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
इसी तरह सिर्फ चेहरे की रंगत बदलने के लिए लंबे समय तक हाई-डोज सप्लीमेंट लेना सही रणनीति नहीं है।
तो ₹30 वाली विटामिन C टैबलेट लें या नहीं?
अगर डॉक्टर ने विटामिन C की कमी या किसी विशेष जरूरत के लिए सप्लीमेंट बताया है तो कम कीमत वाली मानक विटामिन C टैबलेट भी अपना पोषण संबंधी काम कर सकती है। लेकिन **केवल रंग गोरा करने के लिए इसे रोजाना खाना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका नहीं है।**
विटामिन C शरीर और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, मगर इसे चमत्कारी ‘फेयरनेस पिल’ समझना गलत होगा। टॉपिकल विटामिन C के पिग्मेंटेशन और फोटोएजिंग पर कुछ बेहतर प्रमाण मौजूद हैं, जबकि साधारण ओरल टैबलेट से प्राकृतिक त्वचा का रंग बदलने का दावा स्थापित नहीं है।
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