नई दिल्ली। करीब 26 साल से सिगरेट पी रहे किसी व्यक्ति की लत अगर सिर्फ छह मिनट में खत्म होने का दावा किया जाए तो हैरानी होना स्वाभाविक है। धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ऐसा दावा किसी चमत्कार जैसा लग सकता है। सोशल मीडिया और वेलनेस की दुनिया में इन दिनों ऐसी तकनीकों की चर्चा होती रहती है, जिनमें हिप्नोसिस यानी सम्मोहन के जरिए कुछ ही मिनटों में सिगरेट की इच्छा खत्म करने का दावा किया जाता है। लेकिन क्या वास्तव में दशकों पुरानी निकोटीन की लत छह मिनट में खत्म हो सकती है?
इस सवाल का जवाब थोड़ा जटिल है। किसी व्यक्ति को एक छोटे से हिप्नोथेरेपी या व्यवहारिक सत्र के बाद सिगरेट पीने की इच्छा कम महसूस हो सकती है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से हर व्यक्ति के लिए छह मिनट में निकोटीन की लत का इलाज मान लेना सही नहीं होगा।
धूम्रपान की लत केवल आदत नहीं है। इसमें निकोटीन पर शारीरिक निर्भरता, मानसिक जुड़ाव, रोजमर्रा की दिनचर्या और अलग-अलग परिस्थितियों में सिगरेट पीने की इच्छा जैसे कई पहलू शामिल होते हैं।
26 साल की आदत और सिर्फ छह मिनट का दावा
ऐसे मामलों में आमतौर पर बताया जाता है कि लंबे समय से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति ने हिप्नोसिस या माइंड-ट्रेनिंग सेशन लिया। कुछ ही मिनटों के सत्र के दौरान उसे सिगरेट के प्रति अपने नजरिए और उससे जुड़े व्यवहार को बदलने के लिए सुझाव दिए गए।
सेशन के बाद व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी सिगरेट पीने की इच्छा खत्म हो गई या काफी कम हो गई।
यहीं से '26 साल की लत छह मिनट में छूटी' जैसी हेडलाइन सामने आती है।
लेकिन किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत अनुभव और किसी उपचार की वैज्ञानिक प्रभावशीलता दो अलग बातें हैं। अगर एक व्यक्ति को किसी तकनीक से तत्काल फायदा महसूस हुआ, तो इससे यह साबित नहीं होता कि वही तरीका हर धूम्रपान करने वाले पर उसी तरह काम करेगा।
हिप्नोसिस आखिर क्या है?
हिप्नोसिस को अक्सर फिल्मों में किसी व्यक्ति पर नियंत्रण करने जैसी चीज के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन चिकित्सकीय संदर्भ में इसकी अवधारणा अलग है।
हिप्नोथेरेपी के दौरान व्यक्ति को शांत और अत्यधिक केंद्रित अवस्था में लाने की कोशिश की जाती है। इसके बाद प्रशिक्षित पेशेवर व्यवहार से जुड़े सुझाव दे सकता है।
धूम्रपान छोड़ने के मामले में सुझाव सिगरेट की इच्छा को नियंत्रित करने, धूम्रपान से जुड़ी आदतों को बदलने या सिगरेट के प्रति नकारात्मक मानसिक संबंध बनाने पर केंद्रित हो सकते हैं।
कुछ लोगों को इससे फायदा महसूस हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में धूम्रपान छुड़ाने के लिए हिप्नोथेरेपी के प्रमाण पूरी तरह निर्णायक नहीं हैं।
निकोटीन दिमाग में क्या करती है?
सिगरेट में मौजूद निकोटीन तेजी से शरीर में प्रवेश करती है और दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित करती है। इससे डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि बदलती है और व्यक्ति को थोड़े समय के लिए सुख, राहत या सतर्कता का अनुभव हो सकता है।
बार-बार धूम्रपान करने पर शरीर निकोटीन का आदी हो सकता है।
यही कारण है कि लंबे समय से सिगरेट पीने वाला व्यक्ति अचानक धूम्रपान बंद करता है तो उसे बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी, नींद में बदलाव और सिगरेट पीने की तेज इच्छा जैसे निकोटीन विदड्रॉल के लक्षण हो सकते हैं।
इस शारीरिक निर्भरता को केवल इच्छाशक्ति की कमी समझना सही नहीं है।
क्या सच में छह मिनट में लत खत्म हो सकती है?
वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसा कोई स्थापित सार्वभौमिक उपचार नहीं है जिसकी गारंटी हो कि वह हर व्यक्ति की दशकों पुरानी निकोटीन निर्भरता को ठीक छह मिनट में खत्म कर देगा।
हिप्नोसिस के बाद किसी व्यक्ति को तत्काल सिगरेट से दूरी बनाने में मदद मिल सकती है। लेकिन असली सफलता यह देखने से तय होती है कि वह व्यक्ति आने वाले सप्ताह, महीने और साल में धूम्रपान से दूर रह पाता है या नहीं।
अगर छह मिनट के सत्र के बाद व्यक्ति ने उस दिन सिगरेट नहीं पी तो यह सकारात्मक शुरुआत हो सकती है। लेकिन इसे स्थायी रूप से लत खत्म होने का प्रमाण मानने के लिए लंबी अवधि की निगरानी जरूरी होगी।
आदत और निर्भरता में है फर्क
सिगरेट पीने में दो चीजें अक्सर एक साथ काम करती हैं—निकोटीन निर्भरता और व्यवहारिक आदत।
उदाहरण के लिए कुछ लोगों को सुबह चाय या कॉफी के साथ सिगरेट चाहिए। कुछ लोग काम के तनाव में सिगरेट पीते हैं। किसी को दोस्तों के साथ बैठते ही सिगरेट की इच्छा होने लगती है।
ऐसी परिस्थितियां 'ट्रिगर' बन जाती हैं।
कोई मनोवैज्ञानिक तकनीक इन ट्रिगर्स से जुड़े व्यवहार को बदलने में मदद कर सकती है। लेकिन निकोटीन पर शारीरिक निर्भरता होने पर अतिरिक्त उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
यही वजह है कि धूम्रपान छोड़ने के प्रभावी कार्यक्रम अक्सर व्यवहारिक सहायता और दवाओं को साथ इस्तेमाल करते हैं।
सिगरेट छोड़ने के कौन से तरीके ज्यादा स्थापित हैं?
धूम्रपान छोड़ने के लिए कई प्रमाण-आधारित विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें **निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT)** शामिल है, जिसमें निकोटीन गम, पैच या लोजेंज जैसी चीजों के जरिए नियंत्रित मात्रा में निकोटीन देकर धीरे-धीरे निर्भरता कम करने की कोशिश की जाती है।
कुछ लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह पर धूम्रपान छोड़ने में मदद करने वाली दवाएं भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।
इसके अलावा काउंसलिंग और व्यवहारिक थेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। व्यक्ति अपने ट्रिगर पहचानना, सिगरेट की इच्छा आने पर उसे संभालना और दोबारा धूम्रपान शुरू होने से बचने की रणनीति सीख सकता है।
दवा और व्यवहारिक सहायता का संयोजन कई लोगों के लिए केवल इच्छाशक्ति पर निर्भर रहने की तुलना में ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
सिगरेट छोड़ने के बाद शरीर में क्या होता है?
धूम्रपान छोड़ने का फायदा शरीर को जल्दी मिलना शुरू हो सकता है। आखिरी सिगरेट के बाद समय बीतने के साथ शरीर कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे हानिकारक प्रभावों से उबरना शुरू करता है।
आगे चलकर सांस और फेफड़ों से जुड़े कुछ पहलुओं में सुधार हो सकता है और लंबे समय में हृदय रोग, स्ट्रोक तथा कई प्रकार के कैंसर का जोखिम कम होता है।
इसलिए कोई व्यक्ति कितने वर्षों से धूम्रपान कर रहा है, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि अब छोड़ने से फायदा नहीं होगा। लंबे समय से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को भी सिगरेट छोड़ने से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
शुरुआती दिन हो सकते हैं मुश्किल
निकोटीन छोड़ने के शुरुआती दिनों में क्रेविंग यानी सिगरेट की तेज इच्छा परेशान कर सकती है। कुछ लोगों में विदड्रॉल के लक्षण पहले कुछ दिनों में ज्यादा महसूस होते हैं और बाद में धीरे-धीरे कम हो सकते हैं।
इस दौरान ट्रिगर से दूरी बनाना उपयोगी हो सकता है।
अगर चाय के साथ हमेशा सिगरेट पीने की आदत है तो कुछ दिनों के लिए रूटीन बदलना मदद कर सकता है। सिगरेट की इच्छा आने पर थोड़ी देर टहलना, पानी पीना, शुगर-फ्री गम चबाना या किसी दूसरे काम में ध्यान लगाना भी कुछ लोगों के लिए उपयोगी रणनीति हो सकती है।
एक बार फिर सिगरेट पी ली तो क्या सब खत्म?
धूम्रपान छोड़ने की कोशिश में कई लोगों से बीच में एक-दो बार सिगरेट पीने की गलती हो सकती है। इसे पूरी कोशिश की असफलता मानकर फिर नियमित धूम्रपान शुरू करना जरूरी नहीं है।
इसके बजाय यह समझना ज्यादा उपयोगी है कि सिगरेट किस परिस्थिति में दोबारा पी गई। क्या तनाव था? शराब के साथ इच्छा बढ़ी? किसी दोस्त ने ऑफर किया? या निकोटीन क्रेविंग बहुत तेज थी?
ट्रिगर पहचानकर अगली बार उसके लिए पहले से रणनीति बनाई जा सकती है।
कई लोगों को स्थायी रूप से धूम्रपान छोड़ने से पहले एक से ज्यादा प्रयास करने पड़ते हैं।
वायरल दावों से रहें सावधान
'5 मिनट में सिगरेट छुड़ाएं', 'एक सेशन में निकोटीन की लत खत्म' या '100 प्रतिशत गारंटी से स्मोकिंग बंद' जैसे दावों को सावधानी से देखना चाहिए।
किसी तकनीक से व्यक्तिगत स्तर पर फायदा हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक चिकित्सा में किसी उपचार की प्रभावशीलता बड़े अध्ययनों, लंबे फॉलोअप और दूसरे उपचारों से तुलना के आधार पर तय की जाती है।
हिप्नोथेरेपी को आजमाने वाला व्यक्ति इसे प्रमाण-आधारित उपचारों का स्वतः विकल्प न माने। खासकर लंबे समय से भारी धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए डॉक्टर या प्रशिक्षित तंबाकू-निषेध विशेषज्ञ की मदद ज्यादा उपयोगी हो सकती है।
26 साल की लत छोड़ना संभव है लेकिन '6 मिनट' पर न टिकाएं उम्मीद
इस तरह की कहानी का सकारात्मक पहलू यह है कि कोई व्यक्ति 26 साल बाद भी धूम्रपान छोड़ने का फैसला कर सकता है। अगर किसी छोटे से सेशन ने उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित किया और वह लंबे समय तक सिगरेट से दूर रहा तो यह उसके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकती है।
लेकिन छह मिनट को कोई जादुई समय सीमा समझना ठीक नहीं होगा।
निकोटीन निर्भरता व्यक्ति-व्यक्ति में अलग होती है। कोई बिना दवा के छोड़ सकता है, किसी को निकोटीन पैच या गम की जरूरत पड़ सकती है और किसी को काउंसलिंग तथा दवाओं के संयोजन से ज्यादा फायदा मिल सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात सिगरेट छोड़ने का निर्णय लेना और जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक रूप से स्थापित सहायता लेना है।
इसलिए '26 साल की सिगरेट की लत छह मिनट में छूट गई' वाला दावा आकर्षक जरूर है, लेकिन इसकी असली परीक्षा छह मिनट बाद नहीं बल्कि आने वाले महीनों में होती है। अगर व्यक्ति लंबे समय तक सिगरेट से दूर रहता है तभी कहा जा सकता है कि प्रयास वास्तव में सफल रहा।