लाइफ स्टाइल : शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव कई बार सेहत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं। पेशाब का रंग, गंध और उसमें दिखाई देने वाला झाग भी ऐसे ही संकेतों में शामिल है। कभी-कभी पेशाब में थोड़े बुलबुले या झाग दिखाई देना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे या झाग पहले से ज्यादा होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।डॉक्टरों के मुताबिक तेज धार से पेशाब करने, शरीर में पानी की कमी या टॉयलेट में मौजूद क्लीनिंग केमिकल के कारण भी पेशाब में झाग बन सकता है। लेकिन लगातार बहुत ज्यादा झागदार पेशाब शरीर में प्रोटीन की अधिक मात्रा पेशाब के रास्ते बाहर निकलने यानी प्रोटीन्यूरिया का संकेत भी हो सकता है। किडनी से जुड़ी कई बीमारियों में ऐसा देखा जा सकता है।ऐसे में यदि पेशाब में बार-बार सफेद या घना झाग दिखाई दे रहा है तो इसके पीछे इन चार स्वास्थ्य समस्याओं की जांच जरूरी हो सकती है।
1. क्रॉनिक किडनी डिजीज
लगातार झागदार पेशाब किडनी की बीमारी का एक संकेत हो सकता है। किडनी का काम खून को फिल्टर करना और शरीर के जरूरी प्रोटीन को खून में बनाए रखना है। जब किडनी के फिल्टर को नुकसान पहुंचता है तो एल्ब्यूमिन जैसे प्रोटीन पेशाब में जाने लग सकते हैं।पेशाब में ज्यादा प्रोटीन होने से उसमें झाग दिखाई दे सकता है। क्रॉनिक किडनी डिजीज शुरुआती अवस्था में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देती। बीमारी आगे बढ़ने पर पैरों और टखनों में सूजन, आंखों के आसपास सूजन, थकान, भूख कम लगना और पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।यदि झागदार पेशाब के साथ शरीर में सूजन या हाई ब्लड प्रेशर भी बना रहता है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
2. डायबिटीज से किडनी को नुकसान
लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं और फिल्टर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसे डायबिटिक नेफ्रोपैथी या डायबिटीज से जुड़ी किडनी बीमारी कहा जाता है।इसके शुरुआती चरण में अक्सर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देता, लेकिन पेशाब की जांच में प्रोटीन पाया जा सकता है। बीमारी बढ़ने पर पेशाब झागदार दिखाई दे सकता है। इसके साथ हाथ-पैर या चेहरे पर सूजन, ज्यादा थकान, मितली और त्वचा में खुजली जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।डायबिटीज वाले लोगों को नियमित रूप से ब्लड शुगर के साथ किडनी फंक्शन और यूरिन एल्ब्यूमिन की जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
3. ग्लोमेरुलर डिजीज या नेफ्रोटिक सिंड्रोम
किडनी में मौजूद बेहद छोटे फिल्टर को ग्लोमेरुली कहा जाता है। इनमें सूजन या नुकसान होने पर शरीर का प्रोटीन पेशाब में निकलने लगता है। ऐसी स्थिति में पेशाब बहुत ज्यादा झागदार दिखाई दे सकता है।ग्लोमेरुलर बीमारी में पेशाब में प्रोटीन के अलावा खून भी आ सकता है। पेशाब गुलाबी या कोला के रंग जैसा दिखाई देना, आंखों के आसपास सूजन, पैरों और टखनों में सूजन तथा ब्लड प्रेशर बढ़ना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं।अगर पेशाब में झाग के साथ सूजन तेजी से बढ़ रही हो या पेशाब का रंग बदल रहा हो तो जल्द मेडिकल जांच की जरूरत होती है।
4. ऑटोइम्यून बीमारी से किडनी प्रभावित होना
कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां, जैसे ल्यूपस, किडनी को प्रभावित कर सकती हैं। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही अंगों और ऊतकों पर हमला करने लगती है। किडनी प्रभावित होने पर प्रोटीन पेशाब में आने लगता है और पेशाब झागदार दिखाई दे सकता है।डॉक्टरों के अनुसार लगातार प्रोटीन्यूरिया केवल किडनी की बीमारी ही नहीं, बल्कि ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून स्थितियों में भी हो सकता है। इसलिए केवल पेशाब देखकर बीमारी का फैसला नहीं किया जा सकता।
हर बार झाग दिखना बीमारी नहीं
पेशाब में एक-दो बार झाग दिखाई देने पर घबराने की जरूरत नहीं है। बहुत भरे हुए ब्लैडर के कारण तेज धार से पेशाब करने पर बुलबुले बन सकते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर पेशाब ज्यादा गाढ़ा हो सकता है और उसमें झाग नजर आ सकता है।इसके अलावा टॉयलेट क्लीनर के केमिकल पेशाब के संपर्क में आने पर भी झाग बन सकता है। ऐसे में थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हो जाती है।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर पेशाब में झाग कई दिनों तक लगातार दिखाई दे रहा है, झाग की मात्रा बढ़ती जा रही है या एक बार फ्लश करने के बाद भी घना झाग बना रहता है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।विशेष रूप से पैरों या चेहरे पर सूजन, अत्यधिक थकान, मितली-उल्टी, भूख कम लगना, सांस फूलना, पेशाब में खून या पेशाब का रंग बहुत गहरा होने जैसे लक्षणों के साथ झाग दिखाई दे तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।कारण जानने के लिए डॉक्टर सामान्य यूरिन टेस्ट, यूरिन प्रोटीन या एल्ब्यूमिन जांच, ब्लड टेस्ट और जरूरत के अनुसार किडनी की दूसरी जांच करा सकते हैं। केवल झागदार पेशाब के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।इसलिए कभी-कभार दिखने वाले झाग को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार होने वाले बदलाव को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या पहले से किडनी की समस्या वाले लोगों के लिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है।
Tags: