लाइफ स्टाइल दिल की बीमारियों को लेकर लोगों में चिंता लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर डॉक्टरों के कई ऐसे वीडियो भी वायरल होते रहते हैं जिनमें घर बैठे शरीर के कुछ संकेतों को देखकर दिल की सेहत का अंदाजा लगाने की बात कही जाती है। ऐसा ही एक आसान तरीका पैरों और टखनों में होने वाली सूजन को जांचना है। इसमें पैर या टखने की सूजी हुई जगह पर अंगुली से करीब पांच सेकंड तक दबाव डालकर देखा जाता है कि अंगुली हटाने के बाद त्वचा पर गड्ढा बना रहता है या नहीं। इसे चिकित्सा भाषा में **पिटिंग एडेमा (Pitting Edema)** की जांच कहा जाता है।
अगर दबाने के बाद त्वचा पर कुछ समय तक गड्ढा बना रहता है तो शरीर में तरल जमा होने का संकेत हो सकता है। हार्ट फेलियर में ऐसा हो सकता है, लेकिन यहां एक बेहद जरूरी बात समझनी चाहिए—**यह टेस्ट हार्ट फेलियर की पुष्टि नहीं करता।** पैरों की सूजन और पिटिंग एडेमा के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
इसलिए इसे घर बैठे एक शुरुआती संकेत देखने का तरीका माना जा सकता है, हार्ट फेलियर का डायग्नोस्टिक टेस्ट नहीं।
आखिर क्या है 5 सेकंड वाला टेस्ट?
यह बेहद आसान है और इसके लिए किसी मशीन की जरूरत नहीं होती।
अगर आपके पैर, पंजे या टखने सामान्य से ज्यादा सूजे हुए दिखाई दे रहे हैं तो सूजी हुई जगह पर अंगुली या अंगूठे से लगभग पांच सेकंड तक हल्का लेकिन स्थिर दबाव दिया जाता है।
इसके बाद अंगुली हटा ली जाती है।
अगर त्वचा तुरंत अपनी सामान्य स्थिति में लौट आती है तो स्पष्ट पिटिंग नहीं है।
लेकिन अगर अंगुली हटाने के बाद वहां छोटा सा गड्ढा रह जाता है और उसे सामान्य होने में कुछ समय लगता है तो इसे पिटिंग एडेमा कहा जाता है।
यह शरीर के ऊतकों में अतिरिक्त तरल जमा होने का संकेत हो सकता है।
इसका दिल से क्या कनेक्शन है?
हमारा दिल पूरे शरीर में खून पंप करता है।
हार्ट फेलियर होने पर दिल शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त प्रभावी तरीके से रक्त पंप नहीं कर पाता।
इस स्थिति में शरीर में तरल जमा होने लग सकता है।
गुरुत्वाकर्षण के कारण यह अतिरिक्त तरल पैरों, पंजों और टखनों के आसपास ज्यादा दिखाई दे सकता है।
इसी वजह से हार्ट फेलियर वाले कुछ मरीजों में दोनों पैरों में सूजन एक महत्वपूर्ण लक्षण हो सकती है।
लेकिन पैरों में सूजन का मतलब हर बार हार्ट फेलियर नहीं होता।
हार्ट फेलियर' का मतलब दिल बंद होना नहीं
हार्ट फेलियर नाम सुनकर कई लोग समझते हैं कि दिल ने काम करना बंद कर दिया।
ऐसा नहीं है।
हार्ट फेलियर एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय की पंपिंग क्षमता शरीर की जरूरतों को पूरा करने में कमजोर या अपर्याप्त हो जाती है।
यह धीरे-धीरे विकसित हो सकता है या कुछ परिस्थितियों में लक्षण तेजी से बिगड़ सकते हैं।
इसके कारण व्यक्ति को सांस फूलना, जल्दी थकना, पैरों में सूजन और शारीरिक गतिविधि करने में परेशानी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
सही उपचार से कई मरीज लंबे समय तक स्थिति को नियंत्रित रख सकते हैं।
सिर्फ पैरों की सूजन देखकर फैसला न करें
पिटिंग एडेमा का संबंध हार्ट फेलियर से हो सकता है, लेकिन इसके कई दूसरे कारण भी हैं।
किडनी की बीमारी में शरीर अतिरिक्त पानी और नमक बाहर निकालने में परेशानी महसूस कर सकता है, जिससे पैरों में सूजन आ सकती है।
लिवर की गंभीर बीमारी भी शरीर में तरल जमा होने का कारण बन सकती है।
नसों की समस्या, लंबे समय तक खड़े रहना या बैठना और कुछ दवाएं भी सूजन पैदा कर सकती हैं।
इसलिए घर पर पांच सेकंड दबाकर गड्ढा दिखाई देने के बाद सीधे यह मान लेना कि आपको हार्ट फेलियर है, गलत होगा।
किन लक्षणों के साथ बढ़ जाती है चिंता?
अगर पैरों की सूजन के साथ दूसरे लक्षण भी मौजूद हैं तो चिकित्सकीय जांच ज्यादा जरूरी हो जाती है।
उदाहरण के लिए थोड़ा चलने पर सांस फूलना, सामान्य काम करने पर अत्यधिक थकान, रात में सांस लेने में परेशानी या लेटते समय सांस फूलना दिल से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
कुछ लोगों को सोने के लिए एक से ज्यादा तकियों की जरूरत महसूस होने लगती है क्योंकि सीधा लेटने पर सांस लेने में दिक्कत होती है।
शरीर में तरल तेजी से बढ़ने पर कुछ दिनों में वजन भी बढ़ सकता है।
ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सुबह ठीक और शाम को सूजन ज्यादा?
कुछ लोगों में सुबह पैरों की सूजन कम होती है लेकिन दिन खत्म होते-होते टखने ज्यादा सूज जाते हैं।
इसके पीछे लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने जैसे सामान्य कारण भी हो सकते हैं।
लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, दोनों पैरों में बार-बार सूजन आती है या इसके साथ सांस फूलने जैसी समस्या है तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है।
विशेष रूप से पहले से हृदय, किडनी या लिवर की बीमारी वाले लोगों को नई सूजन को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
हार्ट फेलियर की असली जांच कैसे होती है?
हार्ट फेलियर का निदान केवल एक घरेलू टेस्ट के आधार पर नहीं किया जाता।
डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री समझते हैं।
इसके बाद ब्लड प्रेशर, हृदय गति, फेफड़ों और दिल की जांच की जाती है।
जरूरत के अनुसार **ECG** कराया जा सकता है, जिससे हृदय की विद्युत गतिविधि और रिदम की जानकारी मिलती है।
सबसे महत्वपूर्ण जांचों में **इकोकार्डियोग्राम** शामिल है। यह अल्ट्रासाउंड आधारित जांच है जिससे दिल की संरचना और पंपिंग क्षमता देखी जा सकती है।
कुछ मामलों में BNP या NT-proBNP जैसे रक्त परीक्षण भी किए जाते हैं, जो हार्ट फेलियर की संभावना का आकलन करने में डॉक्टर की मदद कर सकते हैं।
चेस्ट एक्स-रे और अन्य जांच भी मरीज की स्थिति के अनुसार कराई जा सकती हैं।
अचानक वजन बढ़ना क्यों महत्वपूर्ण?
हार्ट फेलियर वाले लोगों में शरीर में तरल जमा होने से वजन तेजी से बढ़ सकता है।
इसलिए जिन मरीजों को पहले से हार्ट फेलियर का निदान है, उन्हें डॉक्टर रोजाना वजन रिकॉर्ड करने की सलाह दे सकते हैं।
अगर कुछ दिनों में अचानक वजन बढ़ता है तो यह शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने का संकेत हो सकता है।
लेकिन वजन बढ़ने के और भी कई कारण होते हैं, इसलिए इसे भी अकेले हार्ट फेलियर का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
पहले से हार्ट फेलियर वाले मरीजों को अपने डॉक्टर द्वारा दी गई व्यक्तिगत सीमा और एक्शन प्लान का पालन करना चाहिए।
नमक का भी है कनेक्शन
सोडियम शरीर में पानी को रोकने में भूमिका निभाता है।
जिन लोगों को हार्ट फेलियर या तरल जमा होने की समस्या है, उन्हें डॉक्टर जरूरत के अनुसार नमक सीमित करने की सलाह दे सकते हैं।
लेकिन हर व्यक्ति को अत्यधिक कम नमक वाली डाइट शुरू कर देना भी सही नहीं है।
नमक की जरूरत व्यक्ति की बीमारी, दवाओं और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर कर सकती है।
इसलिए गंभीर हृदय रोग में डाइट में बड़ा बदलाव डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह से करना बेहतर है।
पानी पीना अचानक कम न करें
पैरों में सूजन देखकर कुछ लोग अपने आप पानी पीना बहुत कम कर देते हैं।
यह तरीका नुकसानदायक हो सकता है।
हर हार्ट फेलियर मरीज के लिए तरल की सीमा एक जैसी नहीं होती।
कुछ मरीजों को डॉक्टर तरल सीमित करने की सलाह देते हैं, जबकि दूसरे लोगों को इसकी जरूरत नहीं होती।
इसलिए केवल सूजन देखकर पानी कम करने का फैसला नहीं करना चाहिए।
दवाएं खुद से बंद न करें
कुछ दवाएं पैरों में सूजन से जुड़ी हो सकती हैं।
अगर किसी नई दवा को शुरू करने के बाद सूजन दिखाई दे रही है तो डॉक्टर से बात करें।
लेकिन दवा अपने आप बंद नहीं करनी चाहिए।
ब्लड प्रेशर और दिल की कई दवाओं को अचानक रोकना नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि सूजन दवा से जुड़ी है या किसी दूसरी बीमारी का लक्षण है।
एक पैर में अचानक सूजन हो तो अलग खतरा
अगर केवल एक पैर अचानक बहुत ज्यादा सूज गया है और उसके साथ दर्द, गर्माहट या लालिमा है तो इसे सिर्फ हार्ट फेलियर से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
एक पैर की अचानक सूजन कभी-कभी **डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT)** यानी नस में खून का थक्का बनने जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकती है।
ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय जांच की जरूरत हो सकती है।
अगर इसके साथ अचानक सांस फूलने या सीने में दर्द की समस्या भी हो तो आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
सांस फूलने को हल्के में न लें
हार्ट फेलियर में सांस फूलना महत्वपूर्ण लक्षण है।
अगर पहले आप आराम से सीढ़ियां चढ़ लेते थे लेकिन अब थोड़ी दूरी चलने पर भी सांस फूलने लगी है तो इसकी वजह पता करना जरूरी है।
रात में अचानक सांस फूलने के कारण नींद खुलना भी चिंता का संकेत हो सकता है।
हालांकि सांस फूलना फेफड़ों की बीमारी, एनीमिया और कई दूसरी स्थितियों में भी हो सकता है।
इसलिए सही कारण डॉक्टर की जांच से ही पता चलता है।
कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
अगर अचानक गंभीर सांस फूल रही हो, सीने में दबाव या दर्द हो, बेहोशी या बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो तो घरेलू टेस्ट करने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
इसी तरह होंठ या त्वचा नीली पड़ना, भ्रम की स्थिति या बहुत तेजी से बिगड़ती सांस की परेशानी भी आपात स्थिति हो सकती है।
ऐसे मामलों में पांच सेकंड का कोई घरेलू टेस्ट उपयोगी विकल्प नहीं है।
युवाओं को भी क्यों रहना चाहिए सतर्क?
हार्ट फेलियर उम्रदराज लोगों में ज्यादा आम हो सकता है, लेकिन यह केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है।
कुछ युवाओं में जन्मजात हृदय रोग, कार्डियोमायोपैथी, गंभीर संक्रमण या दूसरी स्थितियों के कारण हृदय की पंपिंग प्रभावित हो सकती है।
इसीलिए लगातार सांस फूलना, असामान्य थकान या बिना स्पष्ट कारण पैरों में सूजन जैसे लक्षण किसी भी उम्र में जांच की मांग कर सकते हैं।
पांच सेकंड का टेस्ट आखिर कितना काम का?
पैर पर पांच सेकंड दबाकर पिटिंग एडेमा देखना शरीर में सूजन का एक साधारण निरीक्षण है।
इसके लिए कोई मशीन या पैसा नहीं चाहिए और व्यक्ति आसानी से इसे देख सकता है।
लेकिन इसकी सीमा समझना सबसे जरूरी है।
**पिटिंग एडेमा = शरीर में तरल जमा होने का संभावित संकेत।**
**पिटिंग एडेमा ≠ हार्ट फेलियर की पक्की पुष्टि।**
अगर पिटिंग दिखाई देती है और इसके साथ सांस फूलना, थकान या दूसरे लक्षण मौजूद हैं तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
घरेलू संकेत को डायग्नोसिस न बनाएं
सोशल मीडिया के दौर में '5 सेकंड में बीमारी पहचानें' या 'घर बैठे फ्री टेस्ट' जैसी बातें तेजी से ध्यान खींचती हैं।
लेकिन गंभीर बीमारियों के मामले में ऐसी बातों को सावधानी से समझना जरूरी है।
पैरों की सूजन देखकर शरीर में तरल जमा होने का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है, लेकिन हार्ट फेलियर का सही निदान मेडिकल जांच से ही होता है।
इसलिए अगर पांच सेकंड दबाने के बाद पैर पर गड्ढा रह जाता है तो घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन लगातार सूजन को नजरअंदाज भी न करें।
और अगर सूजन के साथ सांस फूलना, सीने में दर्द या अचानक तबीयत बिगड़ने जैसे लक्षण हों तो घरेलू उपाय के बजाय तुरंत चिकित्सकीय मदद लें।