बदलता बिहार

बिहार विधान परिषद की 24 सीटों के नतीजे प्रदेश की राजनीति में अहम बदलाव के संकेत दे रहे हैं। सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर भाजपा सात सीट लाने में कामयाब रही। वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद छह सीटें प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहा।

Update: 2022-04-09 05:50 GMT

Written by जनसत्ता: बिहार विधान परिषद की 24 सीटों के नतीजे प्रदेश की राजनीति में अहम बदलाव के संकेत दे रहे हैं। सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर भाजपा सात सीट लाने में कामयाब रही। वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद छह सीटें प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहा। जबकि विगत विधानसभा चुनाव में उसे राज्य में प्रथम स्थान मिला था। जदयू को विधानसभा चुनाव की तरह तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। यानी राज्य में सर्वमान्य चेहरे के बावजूद जदयू को कभी अकेले दम पर बहुमत हासिल नहीं हुआ। नीतीश कभी राजद कांग्रेस तो कभी भाजपा के बूते पिछले तकरीबन पंद्रह वर्षों से अधिक समय से राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं।

लेकिन इधर तेजस्वी यादव द्वारा समावेशी राजनीति को तरजीह देने के कारण राजद की स्वीकार्यता उन सामाजिक समूहों में बढ़ रही है जो कभी पार्टी में हाशिये पर था। यह बिहार की राजनीति में अहम बदलाव का संकेत है, जो यह उम्मीद को बंधाती है कि प्रदेश में कटुता की राजनीति अब बीते दिनों की बात होने जा रही है। अगर राजद का रथ इसी तरह आगे बढ़ता रहा तो पैंतीस वर्षों बाद बिहार में उसे अकेले दम पर बहुमत प्राप्त करने का श्रेय जाएगा।


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