जस्टिस विक्रम नाथ का बयान: सरकारी संस्थानों को जनता के सवालों के जवाब के लिए तैयार
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आज लोग अधिक जागरूक हैं और सरकारी संस्थानों को सवाल-जवाब व जवाबदेही के लिए तैयार रहना चाहिए।
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा है कि लोकतंत्र में सरकारी संस्थानों को जनता के सवालों और जवाबदेही की अपेक्षाओं के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं और वे संस्थानों से पारदर्शिता की उम्मीद रखते हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ ने यह बात संस्थानों की भूमिका और जनता के साथ उनके संबंधों पर चर्चा करते हुए कही। उन्होंने जोर दिया कि मजबूत लोकतंत्र के लिए संवाद और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
जनता अब अधिक जागरूक है
जस्टिस नाथ ने कहा कि सूचना के बढ़ते साधनों और शिक्षा के विस्तार के कारण आम नागरिक अब अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर पहले से ज्यादा सजग हैं।
आज लोग सरकारी फैसलों, नीतियों और संस्थानों के कामकाज को लेकर सवाल पूछते हैं। ऐसे में संस्थानों को इन सवालों का सम्मानपूर्वक जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
जवाबदेही लोकतंत्र की मजबूती का आधार
उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता केवल उनके अधिकारों से नहीं, बल्कि उनकी पारदर्शिता और जवाबदेही से भी तय होती है।
जब संस्थान जनता के प्रति उत्तरदायी रहते हैं, तो लोगों का भरोसा मजबूत होता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है।
संस्थानों को बदलते समय के साथ चलना होगा
जस्टिस विक्रम नाथ के अनुसार, बदलते दौर में सरकारी संस्थानों को अपनी कार्यप्रणाली में भी बदलाव लाने की जरूरत है। तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में सूचनाएं तेजी से लोगों तक पहुंचती हैं, इसलिए संस्थानों को अधिक खुले और उत्तरदायी तरीके से काम करना होगा।
नागरिकों की भूमिका भी अहम
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जागरूक नागरिक लोकतंत्र की महत्वपूर्ण ताकत हैं। सवाल पूछना, जानकारी हासिल करना और संस्थानों से जवाब मांगना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।