NTA के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नियमित स्टाफ बढ़ाने और सिस्टम दुरुस्त करने के निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के प्रशासनिक ढांचे और कामकाज को व्यवस्थित करने की जरूरत पर जोर देते हुए एजेंसी को स्थायी संस्थागत व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि NTA जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा एजेंसी के पास अपना स्थायी कार्यालय और पर्याप्त संख्या में नियमित कर्मचारी होने चाहिए। अदालत ने प्रतिनियुक्ति यानी डेप्युटेशन पर कर्मचारियों की अत्यधिक निर्भरता कम करने की जरूरत भी बताई।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए NTA के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे की जानकारी ली। अदालत को बताया गया कि एजेंसी अब दिल्ली के मिंटो रोड स्थित स्थायी कार्यालय से काम कर रही है। इस पर पीठ ने कहा कि वह कार्यालय का दौरा कर वहां उपलब्ध व्यवस्था का प्रत्यक्ष रूप से जायजा लेना चाहेगी।
अदालत ने कहा कि दौरे के दौरान यह देखा जाएगा कि NTA में परीक्षा संचालन से जुड़े सिस्टम, मैनपावर और प्रशासनिक कामकाज किस तरह संचालित किए जा रहे हैं। देशभर में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों से जुड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था के लिए पर्याप्त संसाधन और स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी होने की बात पीठ ने कही।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA में नियमित कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। अदालत ने संकेत दिया कि एजेंसी के कम से कम आधे कर्मचारी नियमित आधार पर नियुक्त होने चाहिए। बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति पर लेकर संस्था चलाने की व्यवस्था को दीर्घकालिक समाधान नहीं माना जा सकता।
प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारी और कर्मचारी एक निर्धारित अवधि के बाद अपने मूल विभागों में वापस चले जाते हैं। ऐसे में संस्थागत अनुभव और निरंतरता प्रभावित होने की आशंका रहती है। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि NTA के पास अपना स्थायी कैडर और प्रशिक्षित कार्यबल हो, जो परीक्षा प्रणाली की तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को लंबे समय तक संभाल सके।
NTA देश की प्रमुख प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं का संचालन करती है। इनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, विश्वविद्यालय प्रवेश और अन्य उच्च शिक्षा से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं। लाखों उम्मीदवार इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इस कारण परीक्षा केंद्रों के निर्धारण से लेकर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परिणाम जारी करने और तकनीकी प्लेटफॉर्म के संचालन तक मजबूत व्यवस्था की जरूरत होती है।
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े विवादों के बाद NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा चर्चा में रहा है। परीक्षा की पारदर्शिता, साइबर सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और केंद्रों की निगरानी जैसे विषयों पर लगातार ध्यान देने की जरूरत सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा टिप्पणी को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। अदालत केवल परीक्षा के दिन की व्यवस्थाओं तक सीमित रहने के बजाय NTA के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। पर्याप्त नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी संस्था के पास केवल स्थायी कार्यालय होना पर्याप्त नहीं है। कार्यालय के भीतर काम करने वाले सिस्टम, प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी व्यवस्था और जवाबदेही की प्रक्रिया भी प्रभावी होनी चाहिए। यही वजह है कि पीठ ने मिंटो रोड स्थित कार्यालय का निरीक्षण करने की बात कही है।
NTA के स्थायी कार्यालय की व्यवस्था को अदालत ने एक सकारात्मक बदलाव के रूप में दर्ज किया। अब अगला फोकस एजेंसी की आंतरिक कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के ढांचे पर है। पीठ यह समझना चाहती है कि परीक्षा संचालन के इतने बड़े दायित्व के अनुपात में संस्था के पास पर्याप्त कर्मचारी और तकनीकी संसाधन मौजूद हैं या नहीं।
NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक देशभर में अलग-अलग परीक्षाओं का बड़े स्तर पर संचालन है। एक ही परीक्षा में लाखों उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं और हजारों परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं। ऐसे में डेटा प्रबंधन, उम्मीदवारों की पहचान, परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और शिकायत निवारण जैसी जिम्मेदारियों के लिए विशेषज्ञ कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
नियमित कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से संस्था के भीतर विशेषज्ञता और जवाबदेही दोनों मजबूत होने की उम्मीद की जा सकती है। इसके विपरीत बार-बार अधिकारियों के बदलने से नीतियों और प्रक्रियाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है। अदालत ने इसी संदर्भ में प्रतिनियुक्ति पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का प्रस्तावित निरीक्षण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायाधीश NTA कार्यालय पहुंचकर वहां मौजूद बुनियादी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को समझेंगे। इसके आधार पर भविष्य में एजेंसी की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए और निर्देश सामने आ सकते हैं।
अदालत की चिंता का केंद्र विद्यार्थियों के हित और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता है। प्रवेश परीक्षाओं में किसी भी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी गड़बड़ी लाखों छात्रों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की क्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही सीधे उम्मीदवारों के भरोसे से जुड़ी होती है।
NTA के कामकाज को मजबूत करने के लिए पहले भी केंद्र सरकार की ओर से सुधार संबंधी कदम उठाए गए हैं। परीक्षा प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और एजेंसी की संरचना को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर समीक्षा की गई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने संस्थागत ढांचे और मानव संसाधन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
पीठ की टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि अदालत NTA को अस्थायी व्यवस्थाओं पर लंबे समय तक निर्भर रहने के बजाय स्थायी और पेशेवर संस्था के रूप में विकसित होते देखना चाहती है। इसके लिए स्थायी कार्यालय के साथ पर्याप्त नियमित कर्मचारी और आधुनिक तकनीकी ढांचा जरूरी माना गया है।
फिलहाल NTA का स्थायी कार्यालय दिल्ली के मिंटो रोड पर स्थापित होने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई है। सुप्रीम कोर्ट के प्रस्तावित दौरे के बाद एजेंसी की वास्तविक कार्यप्रणाली, कर्मचारियों की उपलब्धता और तकनीकी व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। इसके बाद अदालत आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि NTA नियमित नियुक्तियों, प्रतिनियुक्ति पर निर्भरता कम करने और आंतरिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।