बुलडोजर एक्शन: 100 साल पुरानी बस्ती और अवैध कब्रिस्तान को किया ध्वस्त
प्रशासन ने बताया कार्रवाई का कारण
Lucknow. लखनऊ। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती और कानपुर में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की गई है। श्रावस्ती के इकौना देहात में तालाब के खाते में दर्ज जमीन पर बने मकानों को प्रशासन ने ध्वस्त कराया, जिससे नौ परिवार प्रभावित हुए हैं। वहीं कानपुर के बर्रा क्षेत्र में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने सरकारी जमीन के एक हिस्से पर कब्रिस्तान के नाम पर किए गए कथित अतिक्रमण को हटाया। दोनों जगह कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
श्रावस्ती के इकौना देहात में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर प्रभावित परिवारों ने कई सवाल उठाए हैं। परिवारों का दावा है कि वे लंबे समय से यहां रह रहे थे और उनकी पिछली पीढ़ियां भी इसी स्थान पर रहती आई थीं। कुछ प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास का लाभ भी मिला था। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि जमीन तालाब के खाते में दर्ज थी तो उस समय यहां सरकारी योजना के तहत आवास कैसे स्वीकृत हुए।
प्रशासन का पक्ष इससे अलग है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित जमीन राजस्व अभिलेखों में तालाब के लिए सुरक्षित भूमि के रूप में दर्ज है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अदालत के निर्देशों तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक इकौना देहात में गाटा संख्या 2393ख और 2394ग की करीब 0.145 हेक्टेयर भूमि खतौनी में तालाब खाते की सुरक्षित जमीन के रूप में दर्ज है।
बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से यहां चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाया जा रहा था। शुक्रवार को जेसीबी के जरिए निर्माण ध्वस्त करने के साथ मलबा हटाने का काम भी शुरू कराया गया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि जमीन की पैमाइश को लेकर उन्हें अलग-अलग जानकारी दी गई। परिवारों के मुताबिक कभी 26 मीटर तो कभी 36 मीटर का दायरा बताया गया और आखिरकार नौ मकान कार्रवाई की जद में आ गए।
कार्रवाई के बाद सबसे बड़ी चिंता प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर सामने आई है। एक महिला ने दावा किया कि उसे 2022 में सरकारी आवास योजना का लाभ मिला था, लेकिन अब उसी मकान को ध्वस्त कर दिया गया। परिवारों का कहना है कि बच्चों और घरेलू सामान के साथ उनके सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सरकारी तालाबों और जल स्रोतों की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी है और कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है।
इधर कानपुर में भी सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ी कार्रवाई की गई। बर्रा क्षेत्र में KDA की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों के मुताबिक जमीन के एक हिस्से का इस्तेमाल कब्रिस्तान के रूप में किया जा रहा था और वह सरकारी भूमि पर था। प्रशासन ने इसी हिस्से को अतिक्रमण मानते हुए कार्रवाई की। KDA के अधिकारी सत्य शुक्ला के अनुसार संबंधित पक्ष को सुनवाई और स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था।
KDA के अनुसार कार्रवाई के बाद करीब 2,500 से 3,000 वर्ग मीटर सरकारी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई। संबंधित पक्ष ने कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन उसकी रिट याचिका खारिज हो गई। अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद भी कई बार मौखिक और लिखित रूप से अतिक्रमण स्वयं हटाने के लिए कहा गया, लेकिन ऐसा नहीं होने पर प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान केवल जमीन के ऊपर बने चबूतरे और उभरे हुए ढांचों को हटाया गया तथा अंदर की संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। संवेदनशील मामला होने के कारण मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। स्थानीय रिपोर्टों में इस जमीन को मेट्रो निर्माण कार्य में बाधा बनने की बात भी कही गई है।
श्रावस्ती और कानपुर की इन दोनों कार्रवाइयों में प्रशासन ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने और कानूनी प्रक्रिया के पालन की बात कही है। दूसरी ओर श्रावस्ती में प्रभावित परिवार सरकारी योजना के तहत पहले आवास मिलने और अब उसे ध्वस्त किए जाने को लेकर जवाब मांग रहे हैं। ऐसे में वहां यह सवाल बना हुआ है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और वर्ष 2022 में आवास स्वीकृत किए जाने से जुड़े दावों पर प्रशासन आगे क्या स्थिति स्पष्ट करता है।