Bengal by-elections: ममता खेमे को लगा बड़ा झटका, रेजीनगर उम्मीदवार ने वापस लिया नाम
बड़ी खबर
Kolkata. कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस खेमे को लगातार दूसरे दिन झटका लगा है। नंदीग्राम के बाद अब रेजीनगर विधानसभा सीट से ममता खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके साथ ही ममता खेमे का नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर अपना उम्मीदवार नहीं रह गया है। रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को रेजीनगर उपचुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ली। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने नए चुनाव चिह्न को कम समय में मतदाताओं तक पहुंचाने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में सक्रिय करने में आ रही कठिनाइयों को फैसले की वजह बताया है। इससे पहले ममता बनर्जी के खेमे को चुनाव आयोग ने अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किया था।
नंदीग्राम में भी उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान
इससे एक दिन पहले नंदीग्राम से ममता खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। संचिता ने नाम वापस लेने से पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। नंदीग्राम की राजनीति में इसके कुछ ही घंटे बाद एक और घटनाक्रम हुआ। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गिरफ्तारी के पीछे लंबित वारंट का हवाला दिया है। वहीं कांग्रेस और ममता खेमे ने इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को सत्तारूढ़ पक्ष ने स्वीकार नहीं किया है।
दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। ममता खेमे ने शुरुआत में नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया था। अब दोनों उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से इन सीटों पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर बदल गई है। रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी की नाम वापसी शनिवार को हुई। रिपोर्टों के अनुसार, उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 19 सितंबर थी। आखिरी दिन हुए इस घटनाक्रम के कारण ममता खेमे के पास अब रेजीनगर में नया उम्मीदवार उतारने का विकल्प नहीं है।
चुनाव चिह्न विवाद के बीच उपचुनाव
यह उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में हो रहा है। चुनाव आयोग ने मूल पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न को फ्रीज करते हुए प्रतिद्वंद्वी खेमों को अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने की रिपोर्ट है। नंदीग्राम और रेजीनगर के घटनाक्रम के बाद अब इन दोनों सीटों पर अन्य दलों के उम्मीदवार मैदान में बने हुए हैं। अंतिम उम्मीदवार सूची और आधिकारिक चुनाव चिह्नों के आधार पर चुनावी मुकाबले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल लगातार दो उम्मीदवारों की नाम वापसी पश्चिम बंगाल के इन उपचुनावों में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम बन गई है। अब सभी की नजर 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान और इसके बाद 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर रहेगी।