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जम्मू और कश्मीर
Kashmir Apple Crisis: सेब से लदे पेड़ फिर भी किसानों को डर, कमाई बचाने की चुनौती
nidhi
7 Aug 2026 9:23 AM IST

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कश्मीर के सेब किसानों के सामने अच्छी फसल के बावजूद बाजार और बिक्री का संकट है।
श्रीनगर : कश्मीर के सेब बागवानों के लिए इस बार स्थिति अजीब बनी हुई है। एक तरफ बागों में पेड़ सेब से लदे नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों को पूरे साल की मेहनत की कमाई डूबने का डर सता रहा है। अच्छी पैदावार के बावजूद बाजार, भंडारण और सही समय पर बिक्री की चुनौती किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
सेब कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। लाखों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से जुड़े हैं। ऐसे में फसल तैयार होने के समय छोटी सी चूक भी किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।
अच्छी फसल के बावजूद क्यों बढ़ी चिंता?
किसानों का कहना है कि इस बार बागों में उत्पादन अच्छा है, लेकिन अधिक उत्पादन के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बनने की आशंका है। यदि समय पर बिक्री नहीं हुई या उचित मूल्य नहीं मिला तो किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सेब उत्पादन में सिर्फ ज्यादा फल होना ही पर्याप्त नहीं होता। बेहतर कमाई के लिए गुणवत्ता, पैकिंग, भंडारण और बाजार तक पहुंच भी उतनी ही जरूरी है।
किसानों से कहां हुई बड़ी गलती?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कई बागवानों ने बदलते बाजार की जरूरतों के हिसाब से समय पर तैयारी नहीं की। प्रमुख चुनौतियां हैं—
आधुनिक बागवानी तकनीकों को पूरी तरह न अपनाना।
उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों पर कम ध्यान देना।
वैज्ञानिक तरीके से छंटाई और प्रबंधन की कमी।
कोल्ड स्टोरेज और नियंत्रित वातावरण वाले भंडारण का सीमित उपयोग।
सीधे बाजार तक पहुंच बनाने में परेशानी।
इन वजहों से अच्छी फसल होने के बाद भी किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
सेब की कीमत तय करती है गुणवत्ता
बाजार में सेब का दाम उसके आकार, रंग, स्वाद और गुणवत्ता के आधार पर तय होता है। बेहतर ग्रेड वाले सेब को अधिक कीमत मिलती है, जबकि कमजोर गुणवत्ता वाले फल कम दाम पर बिक सकते हैं।
इसलिए विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे तुड़ाई से लेकर पैकिंग तक हर चरण में सावधानी बरतें।
बिचौलियों पर निर्भरता बड़ी चुनौती
कई छोटे किसान अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं। इससे उन्हें बाजार की वास्तविक कीमत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। किसानों को उत्पादक संगठनों, ऑनलाइन बाजार और सीधे खरीदारों से जुड़ने की सलाह दी जाती है।
पूरे साल की कमाई बचाने के लिए क्या करें?
किसानों के लिए जरूरी कदम—
समय पर तुड़ाई और ग्रेडिंग करें।
बेहतर पैकिंग तकनीक अपनाएं।
भंडारण सुविधाओं का उपयोग करें।
बाजार की मांग के अनुसार बिक्री की योजना बनाएं।
सरकारी योजनाओं और कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें।
कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर असर
सेब उद्योग सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है। इससे मजदूर, पैकिंग उद्योग, परिवहन क्षेत्र, व्यापारी और छोटे व्यवसाय भी जुड़े हुए हैं। कीमतों में गिरावट या बिक्री में परेशानी का असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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