बाजार की दिशा तय करेंगे तीन बड़े फैक्टर कच्चा तेल फेड नीति और वैश्विक तनाव
US ईरान विवाद से प्रभावित होगा शेयर बाजार
New Delhi : भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रमों पर रहेगी, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत प्रमुख हैं। इन घटनाओं का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर देखने को मिल सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर लगभग खत्म होने के बाद अब निवेशकों का ध्यान वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर केंद्रित हो गया है।
क्रूड ऑयल की कीमतें रहेंगी सबसे बड़ा फैक्टर
भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई, रुपये की कीमत और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो इसका दबाव बाजार की धारणा पर पड़ सकता है। वहीं, तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों को राहत मिल सकती है।
US-ईरान तनाव पर बाजार की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्षेत्रीय स्थिति किस दिशा में जाती है।मध्य पूर्व में किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर ऊर्जा बाजार और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
फेड के संकेत तय करेंगे आगे की दिशा
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। निवेशक यह जानने की कोशिश करेंगे कि ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख नरम रहेगा या सख्त। अगर फेड की ओर से ब्याज दरों में राहत के संकेत मिलते हैं तो वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बन सकता है। इसके विपरीत सख्त रुख से दबाव बढ़ सकता है।
सेंसेक्स और निफ्टी में रह सकती है अस्थिरता
पिछले कारोबारी दौर में भी वैश्विक चिंताओं के कारण भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और बाजार की दिशा को समझकर रणनीति बनानी चाहिए।
किन सेक्टरों पर रहेगा असर?
तेल और गैस सेक्टर
क्रूड ऑयल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर तेल कंपनियों पर पड़ सकता है।
ऑटो और एविएशन
ईंधन महंगा होने से इन सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है।
बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर
ब्याज दरों और विदेशी निवेश की स्थिति का असर बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिल सकता है।
डिफेंस सेक्टर
भू-राजनीतिक तनाव के बीच रक्षा कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है।
निवेशकों के लिए रणनीति
बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा स्थिति में निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। वैश्विक घटनाओं के कारण आने वाली गिरावट को अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है, लेकिन जोखिम का ध्यान रखना जरूरी है।