भुवनेश्वर। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने ओडिशा में 1 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश की घोषणा की है। इस निवेश के तहत राज्य में एल्युमीनियम, माइनिंग, रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की योजना है। अग्रवाल ने शनिवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का सहयोग और जरूरी मंजूरियां मिलने पर इन परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया जा सकता है।अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता ग्रुप ओडिशा में अपनी औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना चाहता है। प्रस्तावित निवेश के जरिए नए उद्योग स्थापित करने के साथ मौजूदा परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने की योजना है। कंपनी का फोकस एल्युमीनियम उत्पादन से जुड़ी पूरी श्रृंखला को मजबूत करने पर है।अग्रवाल ने कहा, “हम 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।” उन्होंने बताया कि इस बड़े निवेश को अगले ढाई से तीन साल में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राज्य सरकार से जमीन के तेजी से आवंटन और विभिन्न सरकारी मंजूरियों में सहयोग की जरूरत होगी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ हुई बैठक में प्रस्तावित परियोजनाओं और निवेश को लेकर चर्चा हुई। अग्रवाल ने कहा कि उनका ग्रुप ओडिशा में ऐसी परियोजनाओं पर काम करना चाहता है, जिनसे औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हों।वेदांता की योजना रायगढ़ क्षेत्र में एक और रिफाइनरी और एक स्मेल्टर स्थापित करने की है। इसके अलावा बॉक्साइट और एल्युमीनियम उत्पादन से जुड़े कामकाज को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है। कंपनी राज्य में उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा औद्योगिक ढांचे के आधार पर अपने कारोबार का विस्तार करना चाहती है।
रिफाइनरी और स्मेल्टर एल्युमीनियम उद्योग की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। बॉक्साइट से एल्युमिना तैयार करने के लिए रिफाइनरी की जरूरत होती है, जबकि स्मेल्टर में एल्युमिना से एल्युमीनियम का उत्पादन किया जाता है। प्रस्तावित निवेश में इन दोनों क्षेत्रों को शामिल करने से कंपनी उत्पादन से जुड़ी अपनी गतिविधियों का विस्तार करना चाहती है।इसके साथ ही वेदांता झारसुगुड़ा में अपने मौजूदा कामकाज को और बढ़ाने की योजना बना रही है। अनिल अग्रवाल के अनुसार, ग्रुप यहां 2 मिलियन टन क्षमता वाला प्लांट स्थापित करने पर विचार कर रहा है। इसके लिए मौजूदा पावर प्लांट के पास करीब 500 एकड़ जमीन की जरूरत होगी।
अग्रवाल ने कहा कि अगर जमीन उपलब्ध हो जाती है और सरकारी स्तर पर जरूरी सहयोग मिलता है तो प्रस्तावित विस्तार पर तेजी से काम किया जा सकता है। कंपनी चाहती है कि भूमि आवंटन और विभिन्न मंजूरियों की प्रक्रिया जल्द पूरी हो, ताकि अगले ढाई से तीन वर्षों के भीतर निवेश योजनाओं को जमीन पर उतारा जा सके।झारसुगुड़ा में प्रस्तावित विस्तार को रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया गया है। अनिल अग्रवाल के मुताबिक, इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 50 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसमें प्लांट के भीतर मिलने वाले रोजगार के अलावा उससे जुड़े परिवहन, सेवा, सप्लाई और अन्य गतिविधियों में बनने वाले अवसर भी शामिल होंगे।
कंपनी का प्रस्ताव केवल प्राथमिक धातु उत्पादन तक सीमित नहीं है। निवेश योजना में डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग को भी शामिल किया गया है। एल्युमीनियम के उत्पादन के बाद उससे अलग-अलग उत्पाद तैयार करने वाली औद्योगिक इकाइयां डाउनस्ट्रीम सेक्टर का हिस्सा होती हैं। ऐसे उद्योगों के विस्तार से एल्युमीनियम आधारित मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।अनिल अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल और सरकारी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए जमीन और मंजूरी की प्रक्रिया समय पर पूरी होने से निवेश को जल्द शुरू किया जा सकेगा।
वेदांता का ओडिशा में पहले से औद्योगिक कारोबार है और अब ग्रुप अपनी मौजूदगी को और विस्तार देना चाहता है। झारसुगुड़ा में विस्तार के साथ रायगढ़ में नई रिफाइनरी और स्मेल्टर की योजना इसी रणनीति का हिस्सा है। कंपनी बॉक्साइट से लेकर एल्युमीनियम उत्पादन और उससे जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाना चाहती है।एक लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए भूमि उपलब्धता, पर्यावरण और अन्य आवश्यक मंजूरियों के साथ बुनियादी ढांचे से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना होगा। अग्रवाल ने इस प्रक्रिया में राज्य सरकार से तेजी से सहयोग मिलने की उम्मीद जताई है।
कंपनी की ओर से रोजगार सृजन को प्रस्तावित निवेश का एक महत्वपूर्ण पहलू बताया गया है। बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट शुरू होने पर निर्माण चरण से लेकर संचालन तक अलग-अलग स्तरों पर कर्मचारियों और श्रमिकों की जरूरत होती है। इसके साथ ही स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन और अन्य सहायक सेवाओं में भी रोजगार के अवसर बन सकते हैं।झारसुगुड़ा में 2 मिलियन टन क्षमता वाला प्रस्तावित प्लांट वेदांता की विस्तार योजना का प्रमुख हिस्सा है। कंपनी इसके लिए करीब 500 एकड़ जमीन चाहती है। मौजूदा पावर प्लांट के पास जमीन उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिससे नई परियोजना को मौजूदा औद्योगिक बुनियादी ढांचे से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
रायगढ़ में प्रस्तावित रिफाइनरी और स्मेल्टर के जरिए कंपनी एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता को और बढ़ाना चाहती है। इसके साथ बॉक्साइट उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना भी है। इन सभी परियोजनाओं को मिलाकर ग्रुप ने राज्य में कुल 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात कही है।अनिल अग्रवाल ने संकेत दिया कि कंपनी निवेश के लिए तैयार है और अब परियोजनाओं की रफ्तार काफी हद तक जमीन और सरकारी मंजूरियों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का सहयोग मिलता रहा तो प्रोजेक्ट्स पर तुरंत काम शुरू किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ बैठक के बाद सामने आई इस निवेश योजना में भारी उद्योग से लेकर डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग तक कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इससे कंपनी की मौजूदा गतिविधियों के विस्तार के साथ नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का रास्ता खुल सकता है।फिलहाल वेदांता ग्रुप ने ओडिशा में 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की अपनी योजना सामने रखी है। रायगढ़ में नई रिफाइनरी और स्मेल्टर, बॉक्साइट और एल्युमीनियम उत्पादन से जुड़े प्रोजेक्ट तथा झारसुगुड़ा में 2 मिलियन टन क्षमता वाले प्लांट का प्रस्ताव इस निवेश का प्रमुख हिस्सा है। कंपनी ने इन योजनाओं को अगले ढाई से तीन साल में आगे बढ़ाने के लिए जमीन के तेजी से आवंटन और सरकारी मंजूरियों में सहयोग की मांग की है।