बिजनेस : शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए स्टॉक स्प्लिट से जुड़ी खबरें काफी महत्वपूर्ण होती हैं। अब एक कंपनी अपने शेयरों को पांच हिस्सों में बांटने की तैयारी कर रही है। यानी कंपनी का एक मौजूदा शेयर स्टॉक स्प्लिट के बाद पांच शेयरों में बदल जाएगा। इसके लिए अक्टूबर में रिकॉर्ड डेट तय की गई है। ऐसे में कंपनी के शेयर रखने वाले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि स्टॉक स्प्लिट क्या होता है और इसका उनके पोर्टफोलियो पर क्या असर पड़ता है।स्टॉक स्प्लिट का सीधा मतलब किसी कंपनी के मौजूदा शेयरों को छोटे हिस्सों में बांटना होता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई कंपनी 1:5 के अनुपात में स्टॉक स्प्लिट करती है तो निवेशक के पास मौजूद एक शेयर पांच शेयरों में बदल जाता है। हालांकि केवल शेयरों की संख्या बढ़ने से निवेश की कुल वैल्यू अपने आप पांच गुना नहीं हो जाती।
मान लीजिए किसी निवेशक के पास कंपनी के 100 शेयर हैं। स्टॉक स्प्लिट के बाद उसके पास 500 शेयर हो सकते हैं। इसके साथ ही शेयर की कीमत भी स्प्लिट अनुपात के अनुसार एडजस्ट होती है। इस वजह से स्टॉक स्प्लिट के तुरंत बाद केवल शेयरों की संख्या बढ़ने से निवेशक की कुल होल्डिंग वैल्यू में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती।कंपनियां कई कारणों से स्टॉक स्प्लिट का फैसला करती हैं। शेयर की बाजार कीमत काफी अधिक हो जाने पर उसे छोटे हिस्सों में बांटने से प्रति शेयर कीमत कम दिखाई देती है। इससे छोटे निवेशकों के लिए शेयर खरीदना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसके अलावा बाजार में शेयरों की संख्या बढ़ने से ट्रेडिंग और लिक्विडिटी पर भी असर पड़ सकता है।
इस स्टॉक स्प्लिट में सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड डेट होगी। कंपनी ने इसके लिए अक्टूबर में रिकॉर्ड डेट तय की है। रिकॉर्ड डेट के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि कौन से शेयरधारक कॉरपोरेट एक्शन के लिए पात्र होंगे। इसलिए जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में संबंधित कंपनी के शेयर हैं, उनके लिए रिकॉर्ड डेट पर नजर रखना जरूरी है।निवेशकों को रिकॉर्ड डेट के साथ एक्स-डेट और बाजार की सेटलमेंट व्यवस्था को भी समझना चाहिए। केवल रिकॉर्ड डेट वाले दिन शेयर खरीद लेने से हर स्थिति में स्टॉक स्प्लिट का लाभ मिल जाए, ऐसा मानना सही नहीं है। पात्रता बाजार की लागू सेटलमेंट व्यवस्था और एक्स-डेट के अनुसार तय होती है।
अगर किसी निवेशक के पास पात्रता के अनुसार कंपनी का एक शेयर है तो स्प्लिट के बाद उसके शेयरों की संख्या पांच हो जाएगी। इसी तरह 10 शेयर रखने वाले निवेशक के पास 50 और 100 शेयर रखने वाले के पास 500 शेयर हो सकते हैं। यह बदलाव निर्धारित स्टॉक स्प्लिट अनुपात के अनुसार होगा।यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि स्टॉक स्प्लिट बोनस शेयर से अलग होता है। बोनस शेयर में कंपनी पात्र शेयरधारकों को तय अनुपात में अतिरिक्त शेयर जारी करती है, जबकि स्टॉक स्प्लिट में मौजूदा शेयरों के फेस वैल्यू और संख्या में बदलाव किया जाता है। इसलिए दोनों कॉरपोरेट एक्शन को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
स्टॉक स्प्लिट के बाद शेयर की बाजार कीमत में भी उसी के अनुसार तकनीकी एडजस्टमेंट देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए अगर किसी शेयर की कीमत स्प्लिट से पहले 500 रुपये है और उसे पांच हिस्सों में बांटा जाता है तो सैद्धांतिक रूप से स्प्लिट के बाद उसकी एडजस्टेड कीमत करीब 100 रुपये हो सकती है। वास्तविक बाजार भाव हालांकि मांग, आपूर्ति और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।यही वजह है कि किसी शेयर का पांच हिस्सों में बंटना सीधे तौर पर निवेशकों के लिए पांच गुना मुनाफा नहीं होता। निवेशक के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन प्रति शेयर कीमत उसी अनुपात में समायोजित हो जाती है। कुल निवेश मूल्य बाद में शेयर की बाजार कीमत में होने वाले बदलाव के आधार पर बढ़ या घट सकता है।
कई कंपनियां शेयरों की कीमत को निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से स्टॉक स्प्लिट करती हैं। ज्यादा कीमत वाले शेयर में छोटे निवेशकों के लिए बड़ी संख्या में शेयर खरीदना मुश्किल हो सकता है। स्प्लिट के बाद प्रति शेयर कीमत कम होने से बाजार में ज्यादा निवेशकों की भागीदारी संभव हो सकती है।हालांकि केवल स्टॉक स्प्लिट की घोषणा देखकर किसी शेयर में निवेश करने का फैसला नहीं करना चाहिए। स्टॉक स्प्लिट कंपनी के कारोबार, मुनाफे या वित्तीय स्थिति में अपने आप कोई बदलाव नहीं करता। निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय नतीजे, कारोबार, कर्ज, आय, जोखिम और भविष्य की योजनाओं जैसी बातों को देखना जरूरी है।
जिन निवेशकों के पास पहले से कंपनी के शेयर हैं, उन्हें अपने डीमैट खाते पर भी नजर रखनी चाहिए। कॉरपोरेट एक्शन पूरा होने के बाद नए अनुपात के अनुसार शेयरों की संख्या डीमैट खाते में दिखाई देने लगती है। इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है और संबंधित जानकारी कंपनी तथा स्टॉक एक्सचेंज की आधिकारिक घोषणा के अनुसार देखी जानी चाहिए।स्टॉक स्प्लिट के बाद शेयरों की संख्या बढ़ने के कारण निवेशकों को पहली नजर में अपने पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव दिखाई दे सकता है। लेकिन सही तुलना करने के लिए शेयरों की नई संख्या के साथ एडजस्टेड बाजार भाव को भी देखना जरूरी है।
अक्टूबर की रिकॉर्ड डेट को देखते हुए संबंधित कंपनी के शेयरधारकों के लिए आने वाला समय महत्वपूर्ण रहेगा। जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में यह शेयर मौजूद है, उन्हें कंपनी की आधिकारिक कॉरपोरेट घोषणा, रिकॉर्ड डेट, एक्स-डेट और स्टॉक स्प्लिट लागू होने से संबंधित जानकारी पर नजर रखनी चाहिए।कुल मिलाकर एक शेयर को पांच हिस्सों में बांटने के बाद निवेशकों के पास शेयरों की संख्या पांच गुना हो जाएगी, लेकिन इससे निवेश की कुल वैल्यू तत्काल पांच गुना नहीं होगी। स्टॉक स्प्लिट मुख्य रूप से शेयरों की संख्या और प्रति शेयर कीमत को एडजस्ट करने वाला कॉरपोरेट एक्शन है। निवेशकों को केवल स्प्लिट के आधार पर खरीदारी करने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने निवेश के जोखिम को समझकर फैसला करना चाहिए।

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