बिज़नेस। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से सरकारी फ्लोटिंग रेट बॉन्ड में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया फ्लोटिंग रेट बॉन्ड 2034 (FRB 2034) की ब्याज दर 6.45 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.26 प्रतिशत किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस बदलाव से बॉन्ड रखने वाले निवेशकों को पहले की तुलना में अधिक ब्याज मिलेगा। ब्याज दर में 0.81 प्रतिशत अंक यानी 81 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में जिन निवेशकों ने इस सरकारी बॉन्ड में बड़ी रकम लगाई है, उनकी ब्याज से होने वाली कमाई भी बढ़ जाएगी।
उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक के पास FRB 2034 के पांच लाख रुपये के अंकित मूल्य के बॉन्ड हैं, तो 7.26 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर के हिसाब से छह महीने का ब्याज करीब 18,150 रुपये होगा। पहले 6.45 प्रतिशत की दर से इतनी ही अवधि का ब्याज 16,125 रुपये बनता था। यानी निवेशक को छह महीने में लगभग 2,025 रुपये का अतिरिक्त ब्याज मिलेगा।
क्या है फ्लोटिंग रेट बॉन्ड?
फ्लोटिंग रेट बॉन्ड एक ऐसा ऋण साधन है, जिसकी ब्याज दर पूरी अवधि के लिए स्थिर नहीं रहती। बाजार की परिस्थितियों और निर्धारित बेंचमार्क के आधार पर इसकी ब्याज दर समय-समय पर बदलती रहती है।भारत सरकार अपने वित्तीय संसाधनों की जरूरतें पूरी करने के लिए विभिन्न प्रकार की सरकारी प्रतिभूतियां जारी करती है। इनमें फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट दोनों तरह के बॉन्ड शामिल होते हैं।
फिक्स्ड रेट बॉन्ड में ब्याज दर सामान्यतः पूरी अवधि के लिए तय रहती है। इसके विपरीत फ्लोटिंग रेट बॉन्ड में निर्धारित अंतराल पर ब्याज दर का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इसलिए बेंचमार्क दर बढ़ने पर निवेशकों की ब्याज आय बढ़ सकती है, जबकि दर घटने पर कम भी हो सकती है।
ब्याज दर बढ़ने से कितना होगा फायदा?
FRB 2034 की ब्याज दर 7.26 प्रतिशत होने पर निवेशकों को पहले से अधिक ब्याज मिलेगा। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 7.26 प्रतिशत सालाना दर है। इसका मतलब यह नहीं है कि छह महीने में पूरी 7.26 प्रतिशत रकम ब्याज के रूप में मिलेगी।पांच लाख रुपये के अंकित मूल्य पर सालाना ब्याज 36,300 रुपये बनता है। इसे छह महीने की अवधि के लिए आधा करने पर 18,150 रुपये का अनुमानित ब्याज निकलता है।इसी प्रकार एक लाख रुपये के बॉन्ड पर छह महीने में लगभग 3,630 रुपये और दस लाख रुपये के बॉन्ड पर लगभग 36,300 रुपये ब्याज बन सकता है।यह गणना छह महीने तक समान ब्याज दर लागू रहने और साधारण अर्धवार्षिक गणना के आधार पर की गई है। वास्तविक भुगतान बॉन्ड की निर्धारित ब्याज अवधि और भुगतान नियमों के अनुसार होगा।
81 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब
ब्याज दर में बदलाव को वित्तीय बाजार में अक्सर बेसिस पॉइंट के रूप में बताया जाता है। एक बेसिस पॉइंट का मतलब 0.01 प्रतिशत अंक होता है। इस हिसाब से 81 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अर्थ ब्याज दर में 0.81 प्रतिशत अंक का इजाफा है।पहले बॉन्ड की सालाना दर 6.45 प्रतिशत थी। नई दर 7.26 प्रतिशत होने पर पांच लाख रुपये के अंकित मूल्य पर सालाना ब्याज में 4,050 रुपये का अंतर आता है।
हालांकि, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि फ्लोटिंग रेट बॉन्ड की ब्याज दर भविष्य में दोबारा बदल सकती है। इसलिए मौजूदा दर को बॉन्ड की पूरी शेष अवधि के लिए निश्चित आय मानना सही नहीं होगा।
क्या सरकारी बॉन्ड में निवेश सुरक्षित है?
भारत सरकार द्वारा जारी सरकारी प्रतिभूतियों को सामान्यतः कम क्रेडिट जोखिम वाला निवेश माना जाता है, क्योंकि इनके भुगतान की जिम्मेदारी सरकार की होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इनसे जुड़ा हर वित्तीय जोखिम समाप्त हो जाता है।
यदि कोई निवेशक बॉन्ड को परिपक्वता से पहले बाजार में बेचता है, तो उसे उस समय की बाजार कीमत के अनुसार लाभ या नुकसान हो सकता है। ब्याज दरों में बदलाव से बॉन्ड की कीमत प्रभावित होती है।इसके अलावा बाजार में खरीदे गए बॉन्ड की वास्तविक निवेश राशि उसके अंकित मूल्य से अलग हो सकती है। ऐसे में निवेशक का वास्तविक प्रतिफल केवल कूपन दर देखकर तय नहीं किया जा सकता।
फिक्स्ड डिपॉजिट से कितना अलग है यह निवेश?
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और सरकारी फ्लोटिंग रेट बॉन्ड दोनों से ब्याज आय प्राप्त की जा सकती है, लेकिन इनकी संरचना अलग होती है।फिक्स्ड रेट वाली बैंक एफडी में निवेश के समय तय ब्याज दर आमतौर पर संबंधित अवधि तक लागू रहती है। दूसरी ओर फ्लोटिंग रेट बॉन्ड की दर बेंचमार्क के अनुसार बदल सकती है।इसके अलावा दोनों निवेश विकल्पों में तरलता, समय से पहले निकासी, कर और जोखिम से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल अधिक ब्याज दर देखकर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए।
ब्याज पर टैक्स भी समझना जरूरी
सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज आय सामान्यतः लागू आयकर नियमों के तहत कर योग्य होती है। निवेशक की वास्तविक कमाई उसकी कर देनदारी और निवेश से जुड़े अन्य खर्चों पर भी निर्भर करेगी।उदाहरण के लिए, पांच लाख रुपये के अंकित मूल्य पर छह महीने में 18,150 रुपये ब्याज की गणना कर से पहले की है। कर कटने के बाद निवेशक के हाथ में बचने वाली रकम कम हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी सलाह?
FRB 2034 की ब्याज दर में बढ़ोतरी मौजूदा बॉन्डधारकों के लिए सकारात्मक बदलाव है। इससे निर्धारित ब्याज अवधि में उनकी आय बढ़ सकती है। हालांकि, निवेशकों को अगली ब्याज पुनर्निर्धारण तिथि, भुगतान की तारीख, बॉन्ड की बाजार कीमत और परिपक्वता अवधि की जानकारी अवश्य रखनी चाहिए।
सरकारी बॉन्ड में निवेश करने से पहले उसकी आधिकारिक शर्तें और नवीनतम ब्याज दर की पुष्टि करना भी जरूरी है। ब्याज दर में मौजूदा बढ़ोतरी से फायदा जरूर दिखाई देता है, लेकिन भविष्य की आय बाजार और बॉन्ड के नियमों के अनुसार बदल सकती है।
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