बिज़नेस:  शेयर बाजार में निवेशकों की नजरों में रहने वाले निजी क्षेत्र के बैंक यस बैंक को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। इस बार मामला बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के Additional Tier-1 (AT1) बॉन्ड से जुड़ा है। बैंक ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया है कि एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने उसे इन बॉन्ड को दोबारा बहाल करने और इससे संबंधित सभी जरूरी प्रक्रियाएं तीन दिनों के भीतर पूरी करने के लिए कहा है। इस घटनाक्रम ने बैंक के निवेशकों और शेयरधारकों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है।
इस खबर का असर आने वाले कारोबारी सत्र में यस बैंक के शेयरों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, शेयरों में तेजी आएगी या गिरावट होगी, इसका अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी। शुक्रवार को बैंक का शेयर 1.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15.20 रुपये पर बंद हुआ था। ऐसे में सोमवार को बाजार खुलने पर निवेशकों की नजर इस घटनाक्रम और बैंक के शेयरों की चाल पर रहने वाली है।
यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के बॉन्ड पर बढ़ा विवाद, एक्सिस ट्रस्टी ने दी तीन दिन की मोहलत
इस पूरे मामले की जड़ मार्च 2020 से जुड़ी है। उस समय यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा था। बैंक को बचाने के लिए पुनर्गठन योजना लागू की गई थी। इसी प्रक्रिया के दौरान बैंक के तत्कालीन प्रशासक ने 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड को पूरी तरह राइट ऑफ कर दिया था। इसका मतलब था कि इन बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों की रकम खत्म कर दी गई थी। इस फैसले से हजारों निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ था और मामला अदालत तक पहुंच गया था।
इसके बाद एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज ने बॉन्डधारकों की ओर से इस फैसले को चुनौती दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 20 जनवरी 2023 को बॉन्ड को राइट ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया था। हालांकि, इसके खिलाफ यस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार की ओर से कानूनी अपील की गई। आखिरकार 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन अपीलों को खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इससे 8,415 करोड़ रुपये के बॉन्ड को दोबारा बहाल करने का रास्ता साफ हो गया।
क्या है AT1 बॉन्ड और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
AT1 बॉन्ड यानी Additional Tier-1 बॉन्ड बैंकों की पूंजी जुटाने का एक विशेष माध्यम होते हैं। बैंक इन बॉन्ड के जरिए निवेशकों से पैसा जुटाते हैं और इस पूंजी का इस्तेमाल अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने तथा नियामकीय पूंजी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में करते हैं। इन बॉन्ड की एक खास बात यह है कि इनमें निवेश का जोखिम सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट या सुरक्षित बॉन्ड की तुलना में काफी ज्यादा होता है।
AT1 बॉन्ड को सामान्य तौर पर परपेचुअल बॉन्ड कहा जाता है, क्योंकि इनकी कोई निश्चित मैच्योरिटी तारीख नहीं होती। निवेशकों को इन पर तय शर्तों के अनुसार ब्याज यानी कूपन मिलता है। हालांकि, बैंक की वित्तीय स्थिति और बॉन्ड की शर्तों के आधार पर कूपन भुगतान में बदलाव हो सकता है। गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति में इन बॉन्ड को राइट ऑफ भी किया जा सकता है। यस बैंक के मामले में भी इसी प्रावधान को लेकर विवाद पैदा हुआ था।
बॉन्ड बहाल होने से बैंक की वित्तीय स्थिति पर क्या असर पड़ेगा?
यस बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन बॉन्ड को दोबारा बहाल करने के बाद अपनी पूंजी की स्थिति संभालने की होगी। बैंक प्रबंधन के मुताबिक, अगर 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड बहाल किए जाते हैं, तो बैंक के कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) अनुपात में लगभग 240 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है।
बैंक के प्रबंधन ने संकेत दिया है कि 30 सितंबर के आंकड़ों के आधार पर इसका CET1 अनुपात 13.7 प्रतिशत से घटकर लगभग 11.4 प्रतिशत रह सकता है। CET1 अनुपात किसी बैंक की वित्तीय मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। इससे पता चलता है कि बैंक के पास संभावित नुकसान का सामना करने के लिए कितनी उच्च गुणवत्ता वाली पूंजी उपलब्ध है।
हालांकि, बैंक प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बॉन्ड की बहाली का मतलब तत्काल इतनी ही रकम का नकद भुगतान करना नहीं होगा। इससे बैंक की बैलेंस शीट में रिजर्व और उधारी से जुड़ी प्रविष्टियों में बदलाव होगा। इसके बावजूद पूंजी अनुपात पर पड़ने वाला प्रभाव बैंक के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कूपन भुगतान को लेकर भी निवेशकों की नजर
इस विवाद में केवल बॉन्ड की बहाली ही नहीं, बल्कि निवेशकों को मिलने वाले ब्याज यानी कूपन भुगतान का मामला भी महत्वपूर्ण है। एक्सिस ट्रस्टी ने यस बैंक से मार्च 2020 से 15 अक्टूबर 2026 तक के बकाया कूपन भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इसके अलावा 9 प्रतिशत और 9.5 प्रतिशत की कूपन दर वाले बॉन्ड की आगामी देनदारियों पर भी जानकारी मांगी गई है।
बॉन्डधारक यह जानना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें पहले से बकाया ब्याज कब और किस तरह मिलेगा। इस संबंध में बैंक ने पहले कहा था कि वह कानूनी फैसले और उसके प्रभावों का आकलन कर रहा है। बैंक ने अभी तक कूपन भुगतान को लेकर अपना अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं किया है।
यस बैंक ने आरोपों को बताया निराधार
एक्सिस ट्रस्टी की ओर से तीन दिन की समयसीमा दिए जाने के बाद यस बैंक ने 30 अक्टूबर को जवाब दिया। बैंक ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके कानूनी प्रभावों का विस्तार से अध्ययन कर रहा है। बैंक ने लागू कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप जरूरी कदम उठाने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
हालांकि, बैंक ने जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना करने के आरोपों को निराधार बताया है। दूसरी ओर, एक्सिस ट्रस्टी ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर वह बैंक और अनुपालन के लिए जिम्मेदार निदेशकों तथा अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकता है।
सोमवार को शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर
इस घटनाक्रम के बीच यस बैंक के शेयरों का प्रदर्शन भी चर्चा में है। शुक्रवार को बैंक का शेयर 1.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15.20 रुपये पर बंद हुआ। अब निवेशकों की नजर सोमवार को होने वाले कारोबार पर रहेगी। AT1 बॉन्ड विवाद, बैंक की पूंजी स्थिति और ट्रस्टी की चेतावनी जैसे मुद्दे शेयर की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, केवल इस खबर के आधार पर शेयर में तेजी या गिरावट का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। निवेशकों को बैंक के आधिकारिक खुलासों, कानूनी घटनाक्रम और बाजार के रुझान पर ध्यान देना होगा। इस मामले में आगे क्या फैसला होता है, यह यस बैंक के साथ-साथ उन निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा, जिनकी रकम इन बॉन्ड में फंसी हुई है।
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