बिज़नेस : अगर आप टैक्स बचाने के साथ-साथ लंबी अवधि में अच्छी कमाई का विकल्प तलाश रहे हैं तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) म्यूचुअल फंड आपके लिए एक विकल्प हो सकता है। इन फंड्स की खासियत यह है कि इनमें निवेश करके पुराने टैक्स रिजीम के तहत आयकर में कटौती का लाभ लिया जा सकता है। साथ ही शेयर बाजार में निवेश होने के कारण लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना भी रहती है। हालांकि, इनमें बाजार से जुड़ा जोखिम भी होता है।
इस कड़ी में हम बात कर रहे हैं मोतीलाल ओसवाल ELSS टैक्स सेवर फंड (Motilal Oswal ELSS Tax Saver Fund) की। इस फंड ने बीते तीन वर्षों में अपने निवेशकों को लगभग 17.8 प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया है। इस प्रदर्शन ने टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। लेकिन निवेश से पहले फंड की रणनीति, जोखिम, लॉक-इन अवधि और टैक्स संबंधी नियमों को समझना जरूरी है।
क्या है मोतीलाल ओसवाल ELSS टैक्स सेवर फंड?
मोतीलाल ओसवाल ELSS टैक्स सेवर फंड एक इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम है। इसकी शुरुआत 21 जनवरी 2015 को हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य इक्विटी और उससे जुड़े वित्तीय साधनों में निवेश करके लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाना है।
इस तरह के फंड में कम से कम 80 प्रतिशत निवेश इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट में किया जाता है। फंड मैनेजर बाजार की परिस्थितियों और कंपनियों की संभावनाओं को देखते हुए निवेश का फैसला करते हैं।
इस फंड का बेंचमार्क Nifty 500 TRI है। यानी इसके प्रदर्शन की तुलना निफ्टी 500 के टोटल रिटर्न इंडेक्स से की जाती है। निवेशक इसमें एकमुश्त रकम के अलावा एसआईपी के माध्यम से भी निवेश कर सकते हैं।
तीन साल में मिला 17.8 प्रतिशत सालाना रिटर्न
इस फंड की सबसे ज्यादा चर्चा इसके पिछले तीन साल के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 तक इसके रेगुलर ग्रोथ प्लान ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 17.81 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) दिया है।
इसका मतलब यह है कि यह रिटर्न तीन साल की पूरी अवधि का कुल रिटर्न नहीं, बल्कि सालाना औसत चक्रवृद्धि दर है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक ने तीन साल पहले इस फंड में 1 लाख रुपये निवेश किए होते और उसे 17.8 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से रिटर्न मिला होता, तो उसकी निवेशित रकम लगभग 1.63 लाख रुपये हो सकती थी।
निवेश की रकम 3 साल बाद अनुमानित वैल्यू
₹10,000 ₹16,300
₹50,000 ₹81,500
₹1,00,000 ₹1,63,000
₹2,00,000 ₹3,26,000
यह केवल 17.8% सालाना रिटर्न मानकर की गई गणना है। वास्तविक रिटर्न बाजार और निवेश की तारीख के अनुसार अलग हो सकता है।
कितने रुपये से शुरू कर सकते हैं निवेश?
मोतीलाल ओसवाल ELSS टैक्स सेवर फंड में निवेश की शुरुआत छोटी रकम से भी की जा सकती है। उपलब्ध स्कीम दस्तावेज के मुताबिक, एकमुश्त निवेश की न्यूनतम राशि 500 रुपये है। इसके बाद भी 500 रुपये और उसके गुणकों में अतिरिक्त निवेश किया जा सकता है।
निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार एसआईपी का विकल्प चुन सकते हैं। एसआईपी के जरिए हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करने से बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग कीमतों पर यूनिट खरीदने का अवसर मिलता है।
हालांकि, केवल छोटी रकम से निवेश शुरू कर पाना इस बात की गारंटी नहीं है कि फंड में जोखिम कम है। यह पूरी तरह इक्विटी आधारित निवेश है।
तीन साल का लॉक-इन पीरियड है जरूरी
ELSS म्यूचुअल फंड की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी तीन साल की लॉक-इन अवधि है। यानी जिस तारीख को निवेशक की यूनिट आवंटित होती हैं, उस तारीख से तीन साल तक संबंधित रकम को निकाला नहीं जा सकता।
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति नवंबर 2026 में इस फंड में निवेश करता है तो उस निवेश की यूनिट नवंबर 2029 में लॉक-इन पूरी होने के बाद ही भुनाई जा सकेंगी।
एसआईपी के मामले में हर किस्त की लॉक-इन अवधि अलग-अलग होती है। इसका मतलब है कि जनवरी में निवेश की गई किस्त और फरवरी में निवेश की गई किस्त के लिए तीन साल की अवधि अलग-अलग तारीखों से गिनी जाएगी।
यही वजह है कि ELSS में निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों और आने वाले खर्चों का ध्यान रखना चाहिए।
टैक्स बचाने में कैसे मिल सकता है फायदा?
ELSS फंड में निवेश का एक प्रमुख आकर्षण टैक्स में छूट है। पुराने टैक्स रिजीम के तहत पात्र निवेश पर धारा 80C के अंतर्गत सालाना अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ मिल सकता है। इस सीमा में पीएफ, जीवन बीमा, पीपीएफ और अन्य पात्र निवेश भी शामिल होते हैं।
इसलिए यदि कोई निवेशक पहले ही पीएफ या दूसरी योजनाओं के जरिए 80C की पूरी सीमा का उपयोग कर चुका है तो अतिरिक्त ELSS निवेश से अलग टैक्स कटौती नहीं मिलेगी।
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि नई टैक्स व्यवस्था में सामान्य रूप से 80C की कटौती उपलब्ध नहीं है। इसलिए केवल टैक्स बचाने के लिए ELSS में पैसा लगाने से पहले पुराने और नए टैक्स रिजीम की तुलना जरूर करनी चाहिए।
निवेश से पहले समझ लें कितना है जोखिम
मोतीलाल ओसवाल ELSS टैक्स सेवर फंड का रिटर्न आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन इसमें निवेश का जोखिम भी काफी अधिक है। इस फंड का रिस्कोमीटर Very High Risk श्रेणी में है। इसका मतलब है कि शेयर बाजार में गिरावट आने पर निवेश की वैल्यू में भी बड़ी कमी हो सकती है।
उदाहरण के लिए, बाजार में कमजोरी आने पर फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) घट सकती है। ऐसे में निवेशकों को कुछ समय के लिए नुकसान भी दिखाई दे सकता है। तीन साल का लॉक-इन पूरा होने के बाद भी फंड से सकारात्मक रिटर्न मिलने की कोई गारंटी नहीं होती।
इसलिए केवल पिछले तीन साल के 17.8 प्रतिशत रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। फंड के पांच और सात साल के प्रदर्शन, बेंचमार्क के मुकाबले रिटर्न, पोर्टफोलियो और खर्च अनुपात को भी देखना जरूरी है।
क्या आपके लिए सही है यह फंड?
यदि आपका निवेश का लक्ष्य लंबी अवधि में संपत्ति बनाना है और आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं, तो ELSS फंड पर विचार किया जा सकता है। वहीं जिन लोगों को अगले एक-दो साल में निवेश की रकम की जरूरत पड़ सकती है या जो जोखिम नहीं लेना चाहते, उनके लिए इक्विटी आधारित टैक्स सेविंग फंड उपयुक्त नहीं हो सकता।
कुल मिलाकर, मोतीलाल ओसवाल ELSS टैक्स सेवर फंड का तीन साल का लगभग 17.8 प्रतिशत सालाना रिटर्न आकर्षक रहा है। लेकिन म्यूचुअल फंड में पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता। निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, टैक्स व्यवस्था और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार फैसला लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार की मदद भी ली जा सकती है।