नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय निर्यातकों को राहत देने और निर्यात प्रोत्साहन से जुड़ी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वाणिज्य मंत्रालय ने 'रिलीफ' (RELIEF) योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और इसके तहत स्वीकृत धनराशि के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति योजना के विभिन्न घटकों की प्रगति का आकलन करेगी और निर्यातकों तक सहायता पहुंचाने में आने वाली बाधाओं की पहचान करेगी। सरकार का उद्देश्य बढ़ती माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को अधिक प्रभावी सहायता उपलब्ध कराना है।वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 30 अक्टूबर 2026 को जारी व्यापार सूचना संख्या 33/2026-27 के माध्यम से इस समिति के गठन की जानकारी दी है। यह समिति तत्काल प्रभाव से काम करेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य योजना के लिए उपलब्ध धनराशि का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना और अधिक पात्र निर्यातकों को इसका लाभ दिलाना है।
25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन का हिस्सा है योजना
RELIEF यानी Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation योजना केंद्र सरकार के 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission) के अंतर्गत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उत्पन्न चुनौतियों के बीच भारतीय निर्यातकों को आर्थिक और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराना है।विशेष रूप से खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया के समुद्री व्यापार मार्गों पर उत्पन्न व्यवधानों के कारण निर्यातकों को माल ढुलाई और बीमा लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। इससे निर्यात की कुल लागत बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।सरकार ने इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए RELIEF पहल शुरू की थी। योजना का उद्देश्य निर्यातकों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करना और व्यापारिक गतिविधियों की निरंतरता बनाए रखना है।
समिति में छह वरिष्ठ अधिकारी शामिल
सरकार द्वारा गठित उपसमिति में विदेश व्यापार महानिदेशालय, वाणिज्य विभाग, वित्तीय सेवा विभाग और भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) के अधिकारी शामिल किए गए हैं।डीजीएफटी के लॉजिस्टिक्स डिवीजन और निर्यात प्रोत्साहन मिशन डिवीजन के अतिरिक्त महानिदेशक संयुक्त रूप से समिति की अध्यक्षता करेंगे। वाणिज्य विभाग के ट्रेड फाइनेंस डिवीजन के निदेशक, ईसीजीसी के कार्यकारी निदेशक स्तर के प्रतिनिधि और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के प्रतिनिधि समिति के सदस्य होंगे।इसके अलावा डीजीएफटी के निर्यात प्रोत्साहन मिशन अनुभाग के संयुक्त महानिदेशक समिति के संयोजक की भूमिका निभाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर समिति अन्य संबंधित विशेषज्ञों और हितधारकों को भी विचार-विमर्श में शामिल कर सकेगी।
तीन प्रमुख घटकों की होगी समीक्षा
नई समिति RELIEF योजना के तीनों प्रमुख घटकों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। इसके तहत अब तक निपटाए गए दावों, उपलब्ध शेष धनराशि और योजना के उपयोग की स्थिति का आकलन किया जाएगा।भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर समिति यह जांच करेगी कि कितने दावों का निपटान हुआ है और कितनी राशि अभी उपलब्ध है।इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि पात्र निर्यातक योजना का लाभ किस हद तक उठा पा रहे हैं। यदि किसी प्रक्रिया, पात्रता संबंधी शर्त या प्रशासनिक व्यवस्था के कारण सहायता प्राप्त करने में कठिनाई आ रही है, तो समिति उन समस्याओं का अध्ययन करेगी।समिति अपने निष्कर्षों के आधार पर योजना के बेहतर संचालन और धनराशि के प्रभावी उपयोग के लिए सुझाव देगी।
पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित निर्यातकों को राहत
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान के कारण भारतीय निर्यातकों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। माल ढुलाई के किराए में बढ़ोतरी, जहाजों की आवाजाही में अनिश्चितता और समुद्री बीमा प्रीमियम में वृद्धि से व्यापारिक लागत प्रभावित हुई है।RELIEF योजना के अंतर्गत पात्र निर्यातकों को बढ़ी हुई लॉजिस्टिक लागत और व्यापारिक जोखिमों से निपटने में सहायता देने का प्रावधान है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।योजना के प्रावधानों के अनुसार, कुछ पात्र छोटे निर्यातकों को बढ़ी हुई माल ढुलाई और बीमा लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति का लाभ मिल सकता है। वहीं पात्र निर्यात शिपमेंट के लिए जोखिम बीमा सुरक्षा का भी प्रावधान किया गया है।
31 मार्च 2027 तक बढ़ाई गई योजना की अवधि
सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी व्यापारिक चुनौतियों को देखते हुए RELIEF योजना की अवधि 31 मार्च 2027 तक बढ़ाने का निर्णय भी लिया है। इस विस्तार का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में निर्यात करने वाले कारोबारियों को सहायता जारी रखना है।योजना के अंतर्गत संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान और ईरान सहित निर्धारित देशों के लिए पात्र निर्यात गतिविधियों को सहायता उपलब्ध कराई जाती है।योजना के दूसरे घटक के अंतर्गत ईसीजीसी द्वारा पात्र शिपमेंट के लिए 95 प्रतिशत तक जोखिम सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितताओं के बावजूद निर्यात गतिविधियों को जारी रखने में मदद करना है।
समिति की सिफारिशों पर सरकार लेगी फैसला
डीजीएफटी की व्यापार सूचना के अनुसार, उपसमिति अपनी सिफारिशें निर्यात प्रोत्साहन मिशन की संचालन समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इसके बाद संचालन समिति योजना की समीक्षा और आवश्यक बदलावों पर निर्णय ले सकेगीनई समिति के गठन से योजना की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलती परिस्थितियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों को आवश्यक सहायता मिलती रहे। यदि योजना के क्रियान्वयन में सामने आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान होता है, तो इससे विशेष रूप से छोटे निर्यातकों को लाभ पहुंच सकता है।कुल मिलाकर, RELIEF योजना की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन निर्यात सहायता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। अब समिति की सिफारिशों और उनके आधार पर होने वाले फैसलों पर निर्यात क्षेत्र की नजर रहेगी।