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SCIENCE: एंजायटी यानी चिंता आज के दौर की एक आम लेकिन गंभीर मानसिक समस्या बन चुकी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीवनशैली में कुछ खास बदलाव कर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और अन्य शोध संस्थानों द्वारा की गई स्टडीज में यह साबित हुआ है कि नियमित व्यायाम, मेडिटेशन, संतुलित आहार और नींद की अच्छी गुणवत्ता से मानसिक स्थिति में सुधार आता है।
रोज़ाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जैसे वॉक, रनिंग या योग करने से शरीर में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे 'हैप्पी हार्मोन' बनते हैं, जो तनाव और घबराहट को कम करने में सहायक होते हैं। वहीं माइंडफुलनेस मेडिटेशन से मस्तिष्क में नर्व सिस्टम का संतुलन बेहतर होता है, जिससे व्यक्ति अधिक शांत और स्थिर महसूस करता है।
इसके अलावा, वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कैफीन, एल्कोहल और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन एंजायटी को बढ़ा सकता है। ऐसे में हरी सब्ज़ियाँ, फल, होल ग्रेन्स और ओमेगा-3 युक्त चीज़ें जैसे अखरोट और मछली का सेवन करना फायदेमंद होता है।
गहरी साँसों की तकनीक (डीप ब्रीदिंग), जैसे 4 सेकंड साँस लेना, 4 सेकंड रोकना और 4 सेकंड में छोड़ना, भी तंत्रिका तंत्र को शांत करती है। पर्याप्त नींद (कम से कम 7-8 घंटे) भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है।
अगर इन उपायों के बावजूद एंजायटी बनी रहती है, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि समय रहते इलाज शुरू करने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।





