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Meditation :कितनी देर तक करना चाहिए मेडिटेशन, जान लीजिए क्या है सही तरीका
Sarita
21 Dec 2025 10:38 AM IST

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Meditation :विश्व ध्यान दिवस (World Meditation Day) हर साल 21 दिसंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2024 में इस दिन की घोषणा की थी, जिसके बाद से इसे वैश्विक स्तर पर बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने लगा है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को मानसिक शांति, स्वास्थ्य और आत्म-जागरूकता के प्रति प्रेरित करना है। मेडिटेशन केवल धार्मिक या आध्यात्मिक अभ्यास नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक पद्धति भी है जो कई फायदे भी पहुंचाता है। ऐसे में आज यहां जानेंगे कि मेडिटेशन कितनी देर तक करना चाहिए और इसे करने का सही तरीका क्या है।
कितनी देर तक करना चाहिए मेडिटेशन?
मेडिटेशन (ध्यान) कितनी देर करना चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसकी शुरुआत कर रहे हैं या आप लंबे समय से अभ्यास कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स और रिसर्च के अनुसार
शुरुआती लोगों के लिए:
अगर आप पहली बार ध्यान शुरू कर रहे हैं, तो बहुत देर तक बैठने की कोशिश न करें। शुरुआत में केवल 5-10 मिनट का समय पर्याप्त है। इससे आपके मस्तिष्क को एकाग्र होने की आदत पड़ती है। समय से ज्यादा निरंतरता जरूरी है। रोज 5 मिनट करना हफ्ते में एक दिन 1 घंटा करने से कहीं ज्यादा बेहतर है।
नियमित अभ्यासियों के लिए:
जब आपको बैठने की आदत हो जाए, तो आप धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं। तनाव कम करने, याददाश्त सुधारने और मानसिक शांति के लिए दिन में 15-20 मिनट का समय सबसे सही माना जाता है। आप चाहें तो 10-10 मिनट के दो सेशन (सुबह और शाम) भी कर सकते हैं।
कई अनुभवी लोग 30 से 45 मिनट तक ध्यान करते हैं। शोध बताते हैं कि 8 हफ्तों तक रोज लगभग 13-20 मिनट ध्यान करने से दिमाग की कार्यक्षमता में बड़े बदलाव आते हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आपकी जितनी उम्र है, कम से कम उतने मिनट ध्यान करना चाहिए (जैसे 25 साल की उम्र में 25 मिनट)।
मेडिटेशन करने का सही तरीका:
मेडिटेशन (ध्यान) करना मन को शांत करने और तनाव दूर करने का एक बेहतरीन तरीका है। इसे सही ढंग से शुरू करने के लिए आपको किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है, बस कुछ मिनटों का समय और धैर्य चाहिए। ऐसे में यहां जानते हैं कि मेडिटेशन करने का सही तरीका क्या है।
सही स्थान और समय:
ऐसी जगह चुनें जहां कोई आपको परेशान न करे। सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन आप अपनी सुविधा के अनुसार शाम या रात का समय भी चुन सकते हैं।
आरामदायक मुद्रा:
जमीन पर सुखासन (पालथी मारकर) बैठें या यदि जमीन पर बैठने में दिक्कत हो, तो कुर्सी पर बैठें। झुककर न बैठें, न ही शरीर को बहुत कड़ा रखें। हाथों को अपने घुटनों पर रखें (ज्ञान मुद्रा में या हथेलियां ऊपर की ओर)। अब धीरे धीरे धीरे से अपनी आंखें बंद करें। गहरी और लंबी सांस लें और धीरे से छोड़ें। अब अपनी सांस की नेचुरल गति पर ध्यान दें। महसूस करें कि हवा कैसे शरीर के अंदर जा रही है और कैसे बाहर आ रही है। मेडिटेशन का मतलब विचारों को रोकना नहीं है। जब मन में विचार आएं, तो उन्हें रोकें नहीं। विचारों को एक "बादल" की तरह गुजरते हुए देखें और वापस अपना ध्यान अपनी सांसों पर ले आएं। जब आपका समय (शुरुआत में 5-10 मिनट) पूरा हो जाए, तो तुरंत आंखें न खोलें। अपने आसपास के वातावरण को महसूस करें। हथेलियों को आपस में रगड़ें, उन्हें आंखों पर रखें और फिर धीरे से आंखें खोलें।
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