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Health : महंगी दवाओं की जगह इस पौधे से कम की जा सकती है शरीर में सूजन, पतंजलि का शोध

Sarita
25 April 2025 6:31 AM IST
Health : महंगी दवाओं की जगह इस पौधे से कम की जा सकती है शरीर में सूजन, पतंजलि का शोध
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Health : शरीर में इंफ्लेमेशन ( सूजन) एक सामान्य प्रक्रिया है. यह किसी चोट, संक्रमण या अन्य किसी नुकसान के जवाब में शरीर में होती है. लेकिन अगर इंफ्लेमेशन लंबे समय तक रहे तो यह खतरनाक हो सकती है. इससे हार्ट डिजीज से लेकर गठिया तक का रिस्क रहता है. इंफ्लेमेशन को कम करने लिए एलोपैथी में दवाएं दी जाती है. हालांकि इनके कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बरडॉक पौधे में पाया जाने वाला आर्क्टीजेनिन भी शरीर से इंफ्लेमेशन को कम कर सकता है. यह पौधा देश के कई इलाकों मे आसानी से मिल जाता है. यह इंफ्लेमेशन के कारण होने वाली किसी बीमारी को भी कंट्रोल कर सकता है. पताजलि हर्बल अनुसंधान विभाग, पतंजलि अनुसंधान प्रतिष्ठान, हरिद्वार की रिसर्च में यह जानकारी आई है|
इस रिसर्च को गैविन पब्लिशर्स जर्नल में प्रकाशित किया गया है. इस रिसर्च के प्रमुख शोधकर्ता पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण हैं. रिसर्च में बताया गया है कि आर्क्टीजेनिन एक प्राकृतिक लिग्निन यौगिक है जो कई पौधों, विशेषकर बरडॉक (Arctium lappa) में पाया जाता है. इसके अलावा यह सौसल्सुरिया इन्वोलुक्राटा जैसे पौधों में भी मिलता है. आर्क्टीजेनिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरल गुण होतेहैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं जो शरीर में मौजूद फ्री रेडिक्लस को निष्क्रिय कर सकते हैं शरीर में सेल्स को तेजी से बढ़ने से रोक सकते हैं|
इंफ्लेमेशन शरीर के लिए कैसे है खतरनाक?
इंफ्लेमेशन ( सूजन) शरीर में अगर लंबे समय तक बनी रहती है तो यह गठिया, अल्जाइमर, पार्किसंस, हार्ट डिजीज और न्यूरो डिजनरेटिव डिसऑर्डर का कारण बन सकती है. रिसर्च में पता चला है कि आर्क्टिजेनिन शरीर में एनएफ-κबी को रोकता है, जिससे सूजन कम होती है. आर्क्टिजेनिन प्रो-इंफ्लेमेटरी साइटोकाइन्स को भी कम करता है. यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को भी कम करता है. यह कई प्रकार के एंजायइमों को भी कंट्रोल करता है. इससे शरीर में इंफ्लेमेशन कम होने लगती. इस कम होने से जोड़ों में दर्द में राहत मिलती है और न्यूरो डिजनरेटिव डिसऑर्डर का रिस्क भी कम होता है|
भविष्य की दिशा क्या है?
रिसर्च में कहा गया है कि यह शुरुआती परिणाम है. फिलहाल यह रिसर्च चूहों पर की गई है. ऐसे में अभी आर्क्टिजेनिन के फायदो को लेकर बड़े स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल करने की जरूरत है. आर्क्टिजेनिन के फार्माकोकाइनेटिक्स पर भी अधिक रिसर्च करने की आवश्यकता है. इसकी के साथ इसकी सुरक्षा प्रोफ़ाइल और इंसानों में इसके प्रभाव के बारे में और अधिक जानने की जरूरत है|
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